हाथरस की घटना पर बवाल, बलरामपुर की घटना पर सन्नाटा क्यों ?

    दिनांक 05-अक्तूबर-2020
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बलरामपुर में जिस दलित छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ उसकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके साथ हुई दरिंदगी का खुलासा हुआ है. छात्रा के गाल, छाती, जांघों, कोहनी और घुटने पर चोट के निशान पाए गए हैं, लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि आरोपी मुसलमान हैं

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बलरामपुर सामूहिक दुष्कर्म मामले में पकड़े गए आरोपी।
हाथरस में दलित लड़की की हत्या की गई. जिन पर आरोप लगा उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस घटना के तत्काल बाद बलरामपुर जनपद में दलित लड़की की बलात्कार के बाद हत्या हुई. हाथरस की घटना में आरोपी ठाकुर हैं जबकि लड़की वाल्मिकी समुदाय से है। हाथरस की घटना को जातीय रंग देने की पुरुजोर कोशिश की गई। वहीं बलरामपुर की घटना में अभियुक्त मुसलमान हैं इसलिए वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए सपा, बसपा और कांग्रेस पार्टी का कोई नेता बलरामपुर में दलित परिवार के घर झांकने नहीं गया।
रविवार को उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह, अवनीश कुमार अवस्थी और पुलिस महानिदेशक हितेश चन्द्र अवस्थी ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं.
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने हाथरस में पीड़ित परिवार से मुलाक़ात करने के लिए कानून एवं व्यवस्था को खराब करने का हर संभव प्रयास किया. सपा और भीम आर्मी ने हाथरस की घटना को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन किया. मगर बलरामपुर की घटना से किनारा कर लिया. वह भी दलित परिवार है मगर वहां अपराध मुसलमानों ने किया है इसलिए वोट बैंक के प्रभावित होने का खतरा है. बता दें कि बलरामपुर जनपद के गैंसड़ी बाजार इलाके की रहने वाली दलित लड़की अपने कॉलेज गई थी. गत 29 सितम्बर को जब शाम होने लगी तब परिजनों को चिंता हुई. कालेज बंद हो चुका था मगर लड़की घर नहीं लौटी थी. घरवालों ने लड़की के मोबाइल पर फोन किया मगर फोन अटेंड नहीं हुआ. कई बार फोन लगाने पर भी जब कोई जवाब नहीं आया तब लड़की के परिजनों ने परेशान होकर आस- पास ढूंढना शुरू किया. लगभग अन्धेरा हो चुका था जब रिक्शे पर लड़की घर लौटी. लड़की की हालत खराब हो चुकी थी. परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए जहां पर चिकित्सक ने बताया कि लड़की के साथ बलात्कार किया गया है. पीड़िता का मेडिकल कराने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया मगर इलाज के दौरान 30 सितम्बर को उसकी मृत्यु हो गई. बलात्कार की एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने कुछ ही देर में दो अभियुक्तों – शाहिद और साहिल को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस की पूछताछ में आरोपी शाहिद और साहिल ने स्वीकार किया कि उन्होंने लड़की के साथ दुष्कर्म किया था। साहिल उस लड़की को धोखे से अपने साथ ले गया था। जहां पर साहिल और उसके साथी शाहिद ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया. युवती की तबियत बिगड़ने पर साहिल एक निजी चिकित्सक को इलाज के लिए बुला कर ले गया था. वहां पर किसी महिला के न होने पर निजी चिकित्सक ने इलाज करने से मना कर दिया था. निजी चिकित्सक के बयान से यह स्पष्ट हो गया कि शाहिद और साहिल ने पीड़िता को धोखे से बुलाकर दुष्कर्म किया था.
वहीं हाथरस वाले मामले में जो कहा जा रहा है उस पर संदेहास्पद है। मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई. फोरेंसिक जांच में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई. पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई मगर विपक्ष इस घटना को दलित अत्याचार बताने की हर संभव कोशिश कर रहा है. हाथरस पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से यह असत्य खबर सार्वजनिक रुप से फैलाई जा रही है कि थाना चन्दपा क्षेत्रान्तर्गत दुर्भाग्यपूर्ण घटित घटना में मृतिका की जीभ काटी गई, आंखें फोड़ी गईं तथा रीढ़ की हड्डी तोड़ दी गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है, बावजूद इसके इस मामले में अभी भी राजनीति की जा रही है। कथित सेकुलर दलों का पूरा प्रयास है कि मामले को जातीय रंग देकर किसी भी तरह से माहौल बिगाड़ा जाए ताकि वोट बैंक की राजनीति हो सके।