हाथरस के बहाने जातीय दंगा भड़काने की थी साजिश , 400 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर

    दिनांक 05-अक्तूबर-2020   
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सूत्रों के अनुसार हाथरस में जातीय संघर्ष करवाने के लिए आतंकी संगठनों एवं मुस्लिम देशों से भी फंडिंग की गई थी। कई नेता और पत्रकार भी जांच के घेरे में हैं। जातीय संघर्ष कराने के लिए “ जस्टिस फॉर हाथरस विक्टिम” नाम की एक वेबसाइट बनाई गई थी. आतंकी संगठन पीएफआई और एसडीपीआई ने इस वेबसाइट को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई

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हाथरस की घटना में पीड़ित परिवार दलित बिरादरी का है और आरोपी सवर्ण बिरादरी के हैं. इसी बात का फायदा उठाने के​ लिए जातीय संघर्ष कराने का षड्यंत्र रचा गया था. इस घटना को तूल देकर पूरे प्रदेश में दंगा कराने की साजिश रची गई. जातीय हिंसा कराने के पीछे उद्देश्य यह था कि दलित बिरादरी के लोग भारतीय जनता पार्टी से नाराज हो जायेंगे. भाजपा को कमजोर करने एवं योगी सरकार को बदनाम करने के लिए जातीय हिंसा का षड्यंत्र रचा गया था. योगी सरकार ने इस साजिश को नाकाम कर दिया है और साथ ही कार्रवाई भी शुरू कर दी है. षड्यंत्र रचने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है. नेताओं और पत्रकारों की भी भूमिका की जांच की जा रही है.

पुलिस ने हाथरस के थाना चंदपा में दंगों की साजिश, राष्ट्रद्रोह, सरकार को बदनाम करने, अफवाहें फैलाने, पीड़ित परिवार को सरकार के खिलाफ भड़काने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट करने एवं जातीय नफरत फैलाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है. इस एफआईआर में भीम आर्मी के चंद्रशेखर को नामजद किया गया है और 400 लोग अज्ञात हैं. पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि इसकी फंडिंग कहां से की गई थी. पीड़िता के परिवार वालों को सरकार के खिलाफ भड़काने में टी.वी. चैनल के रिपोर्टर भी शामिल हैं. पुलिस को इन सभी के आडियो टेप मिल चुके हैं. एक टी.वी. चैनल की महिला रिपोर्टर, पीड़िता के भाई से कह रही हैं कि “ मैं तुम्हारी बहन की तरह हूं. जो मैं बता रही हूं. वही बयान अपने पिता जी से कहलवा दो और इसका एक वीडियो बना करके भेज दो, नहीं तो पुलिस तुम लोगों को ही इस केस में उल्टा फंसा देगी.”
एक बड़ा जातीय संघर्ष कराने के लिए कुछ घंटे में ही “ जस्टिस फॉर हाथरस विक्टिम” नाम की एक वेबसाइट बनाई गई थी. खबर है कि आतंकी संगठन पीएफआई और एसडीपीआई ने इस वेबसाइट को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी. इन संगठनों ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने के लिए फंडिंग का इंतजाम किया था और हिंसा भड़काई थी. जैसे ही उत्तर प्रदेश पुलिस को इस प्रकरण की जानकारी हुई. पुलिस की साइबर सेल ने वेबसाइट को निष्क्रिय कर दिया मगर इस दौरान वेबसाइट ने हिंसा भड़काने के दिशा-निर्देश हजारों लोगों के बीच पहुंचा दिये थे. खुफिया विभाग को जानकारी मिली है कि एमनेस्टी इंटरनेशल और कुछ मुस्लिम देशों से भी फंडिंग की गई थी. इसकी गहनता पूर्वक जांच की जा रही है.

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 माहौल बिगाड़ने वाले रालोद कार्यकर्ताओं को खदेड़ती पुलिस।

वेबसाइट पर बकायदे यह बताया गया था कि हिंसा फैलाने के दौरान किस प्रकार की सावधानियां बरतनी हैं. दिशा – निर्देश में कहा गया था कि गहने, टाई जैसी चीजें ना पहनें ऐसा करने से आसानी से पकड़े जा सकते हैं. खुले और बड़े बाल ना रखें. महंगे और ब्रांडेड कपड़े न पहने. इससे पकड़े जाने का खतरा है. काले-ढीले कपड़े पहने. स्वीमिंग चश्मे पहन कर चलें ताकि आंखों को टियर गैस से बचाया जा सकें.

आंखों पर पानी में भीगी पट्टी बांधे. इससे टियर गैस बेअसर हो जाती है. पूरे शरीर को ढंक कर रखें ताकि मिर्ची पाउडर से बचाव हो सके. साइकिल हैट पहनने से टियर गैस से बचा जा सकता है. दंगा कराने से पहले उस जगह को चिन्हित कर लें. घटना करने के बाद छिपने की जगह पहले से तय कर लें. पुलिस जैसे ही दिखाई दे गैस मास्क पहन लें. पुलिस की कार्रवाई का वीडियो भी बनाएं. कैश का इस्तेमाल करें और एटीएम आदि से बचें.
ऐसे रची गई साजिश
हाथरस की घटना के बाद अफवाह फैलाने के लिए कई सोशल मीडिया अकाउंट इस्तेमाल किया गया. इन सभी अकाउंट की जांच की जा रही है. अफवाहें फैलाने और दंगा भड़काने के लिए चंडीगढ़ की मृतका की फोटो को हाथरस की पीड़िता की फोटो बताया गया. दंगा भड़काने के लिए आपत्तिजनक और फोटोशॉप की फोटो को वायरल किया गया. ऐसे तत्वों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस सरगर्मी से छानबीन कर रही है.

हाथरस के पीड़ित परिवार को सरकार के खिलाफ भी जमकर भड़काया गया. पुलिस के पास कई आडियो टेप हैं. इन सभी टेप की फारेंसिक जांच कराई जा रही है. आडियो टेप में पत्रकार और नेताओं के नाम सामने आ चुके हैं. इन आडियो टेप में पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपये तक का लालच देने की बात भी कही गई. पीड़ित परिवार को कहा गया था कि जैसा कहा जा रहा है टी.वी. चैनल के सामने वैसा ही बयान दें.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पीड़िता के पिता की बात हो जाने के बाद एक न्यूज़ चैनल की महिला पत्रकार ने पीड़िता के भाई को भड़काया. महिला पत्रकार ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री की बात मान लोगे तो पुलिस उल्टे तुम्हें ही फंसा देगी. ऑडियो टेप की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है. पीड़ित परिवार को भड़काने वालों का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट भी कराया जा सकता है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही जताई थी जातीय हिंसा की आशंका
योगी आदित्यनाथ ने हाथरस की घटना को लेकर कहा कि राज्य सरकार के खिलाफ षड़यंत्र रचा गया था. जिन लोगों को विकास अच्छा नहीं लग रहा, वे लोग जातीय और सांप्रदायिक हिंसा भड़काना चाहते हैं. इस दंगे की आड़ में विकास रुकेगा. इस दंगे की आड़ में उन्हें राजनीतिक रोटियां सेंकने का अवसर मिलेगा, इसलिए नए-नए षड्यंत्र करते रहते हैं.''