भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ रहा पाकिस्तान-चीन

    दिनांक 05-अक्तूबर-2020
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कर्नल शिवदान सिंह

दिल्ली दंगों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने की बात सामने आई है। कश्मीर में  पाकिस्तान बरसों से दुष्प्रचार कर रहा है। अब चीन भी पाकिस्तान के साथ है। दोनों भारत के खिलाफ परोक्ष युद्ध लड़ रहे हैं
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चीन की करतूतों के चलते लद्दाख सीमा पर तनाव की स्थिति है।


अभी कुछ समय पहले देश के मीडिया में सुर्खियां थीं कि चीन भारत के प्रमुख राजनेताओं तथा व्यक्तियों  का डाटा एकत्रित कर रहा है। इस प्रकार डाटा एकत्रित करने का उसका मुख्य उद्देश्य यही हो सकता है कि इस डाटा के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य माध्यमों से वह देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर सकता है। जो छद्म युद्ध का एक उदाहरण है! इसी प्रकार दिल्ली दंगों के लिए दायर आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि पाकिस्तान की आईएसआई का दिल्ली में शाहीन बाग धरने तथा दंगों को करवाने में  पूरा हाथ है। इसकी पुष्टि इन दंगों के आरोपी अतहर खान के बयानों से हुई है।
आईएसआई ने भारत की लोकसभा के द्वारा पारित नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध धरने को और भी उग्र रूप देने के लिए खालिस्तान समर्थक तत्वों को भी शाहीन बाग  में भेज कर  यह दिखाने की कोशिश की है कि भारत के सिख भी इस कानून के विरुद्ध है! जबकि ऐसा कतई नहीं है।
खालिस्तान समर्थक जबर जंग सिंह ने धरना स्थल पर आकर भारत विरोधी भाषण दिए और वहां पर एकत्र भीड़ को भड़काने की कोशिश की! इस सब के साथ जैसे ही आईएसआई को अमेरिका के राष्ट्रपति  डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे की भनक मिली, उसने नवंबर 2019 से चले आ रहे धरने को मार्च 2020 में दंगों में  परिवर्तित कर दिया।  इसका मुख्य उद्देश्य था भारत को विश्व मीडिया जो उस समय दिल्ली में एकत्रित था के सामने शर्मिंदा करना। विश्व की महाशक्ति के राष्ट्रपति के दिल्ली में मौजूद होने के समय भी यहां की राजधानी में दंगे और इतनी अव्यवस्था है तो पूरे देश में व्यवस्था  का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।
आईएसआई की पूरी योजना के बारे में दिल्ली के पार्षद ताहिर हुसैन ने भी अपने बयान में बताया है कि दिल्ली का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र खासकर इन दंगों के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह धरना स्थल के नजदीक था तथा इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। अभी हाल ही में भारत की राष्ट्रीय जांच संस्था एनआईए ने पश्चिम बंगाल में आईएसआई समर्थित अलकायदा के एक मॉड्यूल को पकड़ा है जिसका इरादा बंगाल में व्यापक स्तर पर हिंसा फैलाना था और इसके बाद यह अलकायदा का मॉड्यूल दिल्ली के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी हमला करने की योजना बना रहा था। इस प्रकार आईएसआई भारत में एक युद्ध के बराबर ही बरबादी करना चाह रही थी!
उपरोक्त उदाहरण छद्म या परोक्ष युद्ध के ही हैं! जिनमें बगैर आमने-सामने युद्ध किए पाकिस्तान अपने दुश्मन भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अब भविष्य में परंपरागत आमने-सामने का युद्ध नहीं होगा इसके स्थान पर युद्ध के लक्ष्य इस प्रकार के परोक्ष युद्धों से ही हासिल किए जाएंगे! इस परोक्ष युद्ध में गैर परंपरागत हथियार जैसे एक देश अपने दुश्मन देश के अंदर तरह तरह के विवादों जैसे सांप्रदायिकता, क्षेत्रीयता या शाहीन बाग की तरह देश के कानूनों के विरुद्ध   देश में विवाद खड़ा करना  तथा इन विवादों में तरह तरह के भ्रम और गलत सूचनाएं फैलाकर इन विवादों को हिंसक बनाया जाना और इन विवादों की आड़ में आतंकवाद फैलाकर अशांति पैदा करना होगा। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर में ऐसा ही करता आया है। ऐसा भी एक असफल प्रयास वह पंजाब में  खालिस्तानी उग्रवाद के रूप में कर चुका है।
अक्सर पाकिस्तानी मीडिया भारत के मुसलमानों में असुरक्षा की भावना पैदा करता है और उन्हें देश की मुख्यधारा में जुड़ने से रोकता है। जिसके कारण उनका अभी तक पूर्ण विकास नहीं हो पाया है। जबकि भारत के मुसलमान देश की अन्य पिछड़ी जातियों की तरह कभी भी दबे-कुचले नहीं थे बल्कि 10वीं शताब्दी से लेकर 18 वीं शताब्दी तक वे भारत के शासक रहे हैं। परंतु फिर भी जान-बूझकर पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश भारत के मुसलमानों में असुरक्षा की भावना फैलाकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से अलग रख रहा है। इस कारण जहां भारत के अन्य वर्गों ने उन्नति की है उसी अनुपात में मुस्लिम वर्ग ने आर्थिक और सामाजिक उन्नति नहीं की है। इस समाज में अक्सर हीन भावना के कारण यह अपने विकास के स्थान पर छोटे-छोटे मुद्दों पर ही अशांत हो जाते हैं। देश में एकत्रित आंकड़ों के अनुसार अक्सर सांप्रदायिक दंगों के पीछे छोटे-छोटे ऐसे विवाद थे जिन्हें आसानी से सुलझाया जा सकता था, जैसे कि 2013 में मुजफ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा जो छेड़छाड़ के कारण शुरू हुआ और बाद में इसने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश इसके प्रभाव में आ गया और हजारों करोड़ रु. की व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक संपत्ति इनकी भेंट चढ़ गई।  इसी प्रकार दिल्ली दंगे में भी संपत्ति को भारी नुकसान के साथ-साथ बहुत से बेगुनाह लोगों की जान गई और दशकों से चला आ रहा सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित  हुआ।
दंगा प्रभावित क्षेत्रों में अब दोनों समुदायों में पहले जैसा भाईचारा देखने में नहीं आ रहा और अब वे दूसरे पर शक करने लगे हैं! इस प्रकार पाकिस्तान ने भारतवर्ष के अंदर आर्थिक तथा सामाजिक व्यवस्था को सीधा सीधा आघात पहुंचा कर एक प्रकार से सीधे आमने-सामने के युद्ध के उद्देश्यों की पूर्ति करने की कोशिश की है।


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फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगे में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका होने की बात कही जा रही है (फाइल फोटो)

दिल्ली दंगे पर दायर आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि पाकिस्तान की आईएसआई का दिल्ली में शाहीन बाग धरने तथा दंगों को करवाने में   पूरा हाथ है। इसकी पुष्टि  इस दंगे के आरोपी अतहर खान के बयानों से हुई है।


क्षेत्रीयता के  विवाद के दो बड़े उदाहरण भारतवर्ष में कश्मीर और पंजाब में देखे जा सकते है। जो पाकिस्तान की आईएसआई के द्वारा पैदा किए गए थे। ’80 के दशक में पाकिस्तान के मिलिट्री शासक जिया उल हक ने भारत के पंजाब में खालिस्तान आंदोलन के  बीज बोए और इसे उग्र बनाने के लिए उसने यहां प्रशिक्षित उग्रवादियों को पंजाब में भेज कर आतंकवादी घटनाएं करानी शुरू कर दीं! इस प्रकार  भारत के सबसे उन्नतशील प्रदेश पंजाब में अशांति फैला दी जिसके परिणामस्वरूप पंजाब के हिंदू और सिखों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। जबकि इन दोनों समुदायों में बहुत समय से बेटी-रोटी का रिश्ता है जो अभी तक चल रहा है। खालिस्तानी आतंकी  उग्रवाद के समय अक्सर  हिंदू समाज के प्रमुख लोगों को अपना निशाना बनाते थे जिससे इन दोनों समुदायों में दुश्मनी तथा शक की स्थिति पैदा हो जाए और समाज धीरे-धीरे बिखर जाए। परंतु समय रहते हुए पंजाब के सिखों ने स्थिति को संभाला और पाकिस्तान के नापाक इरादों  का मुंहतोड़ जवाब दिया। इसी प्रकार से पाकिस्तान दुष्प्रचार फैला कर भारत के कश्मीर में वहां के सामान्य निवासियों को  भारत विरोधी बनाता रहा है। इसलिए उसने समय-समय पर ऐसी स्थितियां पैदा की हैं जिससे कश्मीर के मुस्लिम समुदाय को लगे कि भारत की सरकार उनके विरुद्ध है। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान की सेना भारत के कश्मीर को हड़पना चाहती थी। इसके लिए उसने पहला प्रयास अक्तूबर 1947 में ही कर दिया था जब पाकिस्तान ने  कबाइलियों के रूप में उत्तर पश्चिमी क्षेत्र के पठानों को अपनी सेना के साथ कश्मीर में घुसा कर श्रीनगर पर कब्जा करने का प्रयास किया परंतु उसी समय भारतीय सेना ने पाकिस्तान के इस घिनौने इरादे को मिट्टी में मिला दिया था। पाकिस्तान इन पठानों के द्वारा विश्व बिरादरी को यह दिखाना चाहता था कि कश्मीर की आवाम भारत के विरुद्ध उठ खड़ी हुई है और वह पाकिस्तान के साथ मिलना चाह रही है। यह भी पाकिस्तान का परोक्ष युद्ध का ही एक नमूना था।
ऐसा ही युद्ध पाकिस्तान के अलावा विश्व की महाशक्तियां भी लड़ रही हैं जैसे कि अफगानिस्तान में रूसी सेनाओं के आने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के तालिबानी आतंकियों को अफगानिस्तान में भेज कर वहां से रूसी सेनाओं को वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया था। इसी प्रकार का परोक्ष युद्ध पिछले लंबे समय से विश्व के सबसे धनवान समझे जाने वाले मध्य एशिया के तेल संपन्न देशों के बीच में भी चल रहा है। क्षेत्र की आर्थिक संपदा को बर्बाद करने के लिए तरह-तरह के आतंकी संगठनों जैसे आईएसआईएस, हिजबुल्ला, अल कायदा और तालिबान का गठन किया गया है। जिन्होंने इस क्षेत्र के सीरिया, लीबिया, इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे देशों को करीब-करीब बबार्दी के कगार पर ला दिया है, आर्थिक  और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार अगले दशक तक मध्य एशिया के इन देशों में और भी अशांति फैल जाएगी और धीरे-धीरे इनकी प्राकृतिक संपदा भी समाप्त होकर इन्हें गरीबी और पिछड़ेपन में धकेल देगी। यहां यह विचारणीय है कि मध्य एशिया में कोई ऐसा राजनैतिक या क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है जिसके कारण युद्ध हो परंतु केवल विश्व की कुछ शक्तियां इस क्षेत्र को बर्बाद करने के लिए यहां पर इन आतंकवादी संगठनों के द्वारा परोक्ष युद्ध करवा रही हैं और इस आर्थिक संपदा से भरपूर क्षेत्र को बर्बाद कर रही हैं। जो विश्व में परोक्ष युद्ध का सबसे भयावह चेहरा है।
 पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर मई से तनाव है तथा दोनों देश की सेना पूरी तैयारी के साथ आमने-सामने हैं। परंतु यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यह तनाव युद्ध में परिवर्तित नहीं होगा। क्योंकि आज के युग में इस प्रकार के युद्ध को कोई देश फायदे का सौदा नहीं मानता। इस मुख्य कारण है कि इसमें दुश्मन को क्षति पहुंचाते-पहुंचाते स्वयंसेवकों भी भारी क्षति उठानी पड़ती है। इसलिए चीन इसी प्रकार अपना शक्ति प्रदर्शन करता रहेगा और कभी भी आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करेगा। परंतु उसके साथ-साथ पाकिस्तान और चीन दोनों तरह तरह से हमारे देश में भ्रांतियां फैला कर और सांप्रदायिकता तथा  क्षेत्रीयता के रूप में अपने एजेंटों के द्वारा अशांति की कोशिश करते रहेंगे जिसके द्वारा वे हमारे देश को कमजोर करना चाहते हैं। इसके लिए वे आज के आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य संचार माध्यमों से अपने भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को टॉरगेट तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इसलिए हमारे देश के हर नागरिक को एक सैनिक की तरह  दुश्मन की इन  चालों को नाकाम करना चाहिए।  इसके साथ-साथ भारत सरकार को भी चाहिए कि वह मीडिया के लिए आज  के समय के अनुसार आचार संहिता निर्धारित करें जिसके द्वारा भारतीय मीडिया केवल टीआरपी के चक्कर में भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल न हो। इस प्रकार हम दुश्मन को  परोक्ष युद्ध में भी उसी प्रकार परास्त  कर सकते हैं जिस प्रकार सीमाओं पर हमारी सेनाओं ने दुश्मन को परास्त किया है। इस प्रकार इस युद्ध में देश का हर नागरिक सैनिक है।