जेएनयू में 12 नवम्बर का दिन ऐतिहासिक, मोदी करेंगे स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण

    दिनांक 10-नवंबर-2020
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नक्सली एवं वामपंथी शक्तियों की अराजकता की वजह से सुर्ख़ियों में रहने वाले देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 12 नवम्बर का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस दिनांक को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करेंगे

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नक्सली एवं वामपंथी शक्तियों की अराजकता की वजह से सुर्ख़ियों में रहने वाले देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में 12 नवम्बर का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस दिनांक को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इस दौरान कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' जहां उपस्थित रहेंगे वहीं अनावरण के पहले सुश्री निवेदिता भिड़े स्वामी विवेकानंद पर आख्यान देंगी। ऐसे में यह अवसर निश्चित ही एक सकारात्मक तथा स्वागत योग्य कदम है। इससे न सिर्फ परिसर के बल्कि पूरे राष्ट्र के युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा तथा ज्ञान का सन्देश जाएगा।
गौरतलब है कि यह वही स्वामी विवेकानंद जी प्रतिमा है, जिसे कुछ समय पहले विवि के अराजक वामपंथी छात्रों ने अपना निशाना बनाया था। इस दौरान उन्होंने उसे बदरंग करते हुए प्रतिमा के आस—पास अपशब्द लिखे थे।
वामपंथियों के जाल से मुक्त हो रहा विश्वविद्यालय
जेएनयू में राष्ट्र की संस्कृति तथा धरोहरों के प्रति इस प्रकार का सम्मान निश्चित ही इस बात का भी संकेत है कि यह विश्वविद्यालय वामपंथियों के जाल से मुक्त हो राष्ट्र की प्रगति तथा मुख्यधारा से धीरे—धीरे ही सही जुड़ रहा है। कुछ महीनों पहले इसी प्रतिमा पर राष्ट्रविरोधी शक्तियों ने नकारात्मक सन्देश लिखे थे, जिससे पूरे देश में आक्रोश की लहर फ़ैल गयी थी। स्वामी विवेकानंद सिर्फ भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में युवा शक्ति के प्रणेता तथा चिंतक के रूप में जाने जाते हैं। जेएनयू के कुलपति ने भी स्वामी जी के बारे में कहा है कि," स्वामी विवेकानंद भारत के सबसे प्रतिष्ठित तथा प्रिय बुद्धिजीवी तथा आध्यात्मिक चिंतकों में से एक हैं, जिन्होने भारत में स्वतंत्रता, विकास, सद्भाव और शांति के अपने संदेश से सम्पूर्ण विश्व के युवाओं को उत्साहित किया है।" आज जिस आत्मनिर्भर तथा उन्नत भारत का स्वप्न हम सब देख रहे हैं, विवेकानंद उसके प्रतीक हैं, प्रणेता हैं और जेएनयू परिसर में उनकी प्रतिमा का अनावरण निश्चित ही कहीं न कहीं इस बात का प्रतीक है कि जेएनयू परिवार भी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बढ़ चढ़कर अपना योगदान देने को तत्पर है।