अर्नब की रिहाई, जो जेल गया वो पत्रकार था जो रिहा हुआ वह 'नेशनल हीरो'

    दिनांक 12-नवंबर-2020   
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अर्नब की रिहाई पर कथित सेकुलर चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन देश खुश है। कोर्ट का आदेश आते ही ट्विटर पर अर्नब इज बैक ट्रेंड करने लगा. शाम होते-होते यह नंबर वन ट्रेंड बन गया. देश में अलग-अलग जगह अर्नब के प्रशंसकों ने खुशी मनाई

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नवी मुंबई स्थित तालुजा जेल के बाहर बुधवार की रात होते-होते लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. इसी जेल में रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी बंद थे.
दोपहर बाद तक चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया था. अर्नब जेल से निकले तो मुट्ठियां ताने हुए थे. जुबान पर तीन ही बातें थीं. वंदे मातरम, भारत माता की जय, मैं सुप्रीम कोर्ट का आभारी हूं. अर्नब की रिहाई बड़ी बात है और उस से बड़ी बात है सुप्रीम कोर्ट का फैसला. यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का भविष्य में पहरेदार का काम करेगा. साथ ही यह भी कि कांग्रेस के रिमोट पर चलती उधव ठाकरे जैसी सरकारों को अभिव्यक्ति का गला घोटने की छूट नहीं मिल सकेगी.
अर्नब को 2018 के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले में चार नवंबर को न्यायिक हिरासत में लिया गया था. यह मामला 2019 में बंद हो चुका था. अदालत में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल हो चुकी थी. लेकिन अर्नब गोस्वामी के लगातार चुभते सवालों से परेशान महाराष्ट्र सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के लिए इस मामले को खोला था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सह आरोपी नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख की भी अंतरिम जमानत की इजाजत दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने बहुत महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा, "अंतरिम जमानत के आवेदन को खारिज करने का मुंबई उच्च न्यायालय का फैसला गलत था।" जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की एक अवकाश पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 9 नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर की गई तत्काल सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने अर्नब की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने निराशा व्यक्त की कि हाईकोर्ट एक नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने में विफल रहा. उन्होंने कहा, अगर यह अदालत आज हस्तक्षेप नहीं करती है, तो हम विनाश के रास्ते पर चल रहे होंगे. इस आदमी (गोस्वामी) को भूल जाओ. आप उसकी विचारधारा को पसंद नहीं कर सकते. तो उसे लोगों पर छोड़ दें, यह मेरी पसंद है कि मैं उसका चैनल नहीं देखूंगा.
सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र सरकार से सख्त नाराज नजर आया. अदालत ने कहा- सब कुछ अलग रख दीजिए. अगर हमारी राज्य सरकारें लोगों के साथ यही सब करने जा रही हैं, इसी तरह से जेल भेजेंगी, तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना होगा. साथ ही हमें हाईकोर्ट को संदेश देना होगा- कृपया व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का उपयोग करें. हम मामले दर मामले को देख रहे हैं. न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में नाकाम हो रहे हैं. लोग ट्वीट के लिए जेल में हैं!"
अर्नब की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने दलील दी कि महाराष्ट्र सरकार एक ‌ आलोचक को चुप कराने के मकसद से द्वेष से कार्य कर रही है. "अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आत्महत्या मामले की जांच की मांग विधानसभा में उठाई गई थी, तब उनकी रिपोर्टिंग के खिलाफ चर्चा हुई थी. गृह मंत्री ने खुद कहा था कि जांच का आदेश दिया गया है. यहीं दुर्भावना पैदा होती है ... और हाईकोर्ट ने कहा कि यह दुर्भावना के सवाल का जवाब नहीं दे सकता है, क्योंकि धारा 439 का एक वैकल्पिक उपाय है? " साल्वे ने 4 नवंबर की सुबह गोस्वामी को गिरफ्तार करने के तरीके पर भी आपत्ति जताई.कहा- क्या वह आतंकवादी है? क्या उस पर हत्या का आरोप है. पिछले महीने महाराष्ट्र में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली और कहा कि मुख्यमंत्री वेतन देने में विफल रहे? आप क्या करेंगे? मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करेंगे?
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही ट्विटर पर अर्नब इज बैक ट्रेंड करने लगा. शाम होते-होते यह नंबर वन ट्रेंड बन गया. देश में अलग-अलग जगह अर्नब के प्रशंसकों ने खुशी मनाई. लेकिन सबसे चौंकाने वाला नजारा मुंबई का था. मुंबईकर और मराठी मानुस की राजनीति करने वाली शिव सेना के लिए आईना भी. यहां रोड शो जैसा नजारा था. एक ट्विट आया. धन्यवाद उधव जी. आपने एक पत्रकार गिरफ्तार किया था, एक हीरो लौटाया. अर्नब रिहाई के बाद सीधे स्टूडियो पहुंचे. घर नहीं गए. वहां रिपब्लिक टीवी पर वह अपने चिर-परिचित अंदाज में वापस थे. वही उधव ठाकरे से सीधे सवाल पूछने वाली शैली में.... उधव जी... लेकिन रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सामने चुनौतियां बहुत हैं. महाराष्ट्र सरकार ने फिलहाल रिपब्लिक के वाइस प्रेसीडेंट को गिरफ्तार किया हुआ है. उनके मुंह पर काला कपड़ा ढककर एक आतंकवादी की तरह उन्हें अदालत में पेश किया गया. तो भी ये देखना सुखद है कि कांग्रेस हमेशा की तरह एक बार फिर मीडिया का मुंह बंद करने की कोशिश में नाकाम रही. पूरे मामले पर चुप रहे कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने बुधवार को एक ट्विट किया. उन्होंने उत्तर प्रदेश में दो पक्षों के बीच हुई मारपीट को एक पत्रकार पर हुए हमले के तौर पर पेश किया. अब आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस में किस कदर बेचैनी है.
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