मजहबी भीड़ ने ईसाई मां-बेटे को बर्बरता से मार डाला

    दिनांक 12-नवंबर-2020   
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पाकिस्तान के  पंजाब प्रांत में मुहम्मद हसन के नेतृत्व में पगलाई मजहबियों की भीड़ ने सरेआम ईसाई समुदाय के मां-बेटे की गोली मार कर हत्या कर दी। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईशनिंदा की थी

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गोली लगते ही मां ने दम तोड़ दिया। मगर बेटा कई गोलियां सीने में उतारे जाने के बावजूद करीब 20 मिनट तक जीवित रहा। उसका पूरा शरीर खून से लथ-पथ। पत्नी और दो बेटियां पास बैठ उसका हाथ पकड़े उसे मौत के मुंह में समाते बेबसी से देख रहीं थी। वहां कई लोग तमाशाई बने खड़े रहे, पर किसी ने घायल मां-बेटों को अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई। यह ह्रदयविदारक दृश्य है पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित गुंजरावाला जिले के वजीराबाद के कथोरकलां गांव का।
मुहम्मद हसन के नेतृत्व में पगलाई मजहबियों की भीड़ ने सरेआम ईसाई समुदाय के मां-बेटे की गोली मार कर हत्या कर दी। उन पर आरोप है कि उन्होंने ईशनिंदा की थी। पाकिस्तान में ईशनिंदा की आड़ में हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों को निशाना बनाने की घटना आम है। बिना कोर्ट-कचहरी के लोग आरोपी को मौत के घाट उतार देते हैं। पाकिस्तानी कानून में भी ईशनिंदा की सजा मौत और उम्र कैद है। इस समय सैकड़ों अल्पसंख्यक इस आरोप में पाकिस्तान की जेलों में सजा काट रहे हैं। इसका चिंताजनक पहलू है कि शासन-प्रशासन भी ईशनिंदा मामले में अत्याचारों के साथ खड़ा नजर आता है। वैसे, अत्याचारियों की मुखालफत का अर्थ है जान गंवाना। ऐसी कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं। ईशनिंदा का आरोप झेलने वालों की वकालत करने वाले की हत्या कर दी गई। ऐसे ही एक मामले में पंजाब के राज्यपाल की हत्या कर दी गई थी। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में ईशनिंदा के आरोप से बरी होने पर एक ईसाई महिला के लिए कट्टरपंथियों ने स्थिति इतनी विकट कर दी कि उसे सपरिवार कनाडा शिफ्ट होना पड़ा। ऐसे ही एक मामले में नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक अहमद नवाज की बैंक के गाॅर्ड ने हत्या कर दी। उसे पुलिस के हवाले करने की बजाए इस्लाम की आड़ में खून-खराबा करने वालों ने सड़कों पर न केवल उसके सम्मान में जुलूस निकाला। सड़कों पर नारे लगाते रहे-‘‘गुलाम-ए-रसूल में मौत भी बकूल है, हो न इश्क मुस्ता जिंदगी फजूल है।’’ पाकिस्तान के वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता राहत आस्टिन ने ट्वीटर पर इसका एक वीडियो शेयर करते हुए चिंता प्रकट की है। वीडियो में जिस तरह हत्यारे गाॅर्ड का महिमामंडन किया जा रहा था, वह वहां के अल्पसंख्यक के लिए चिंता बढ़ाने वाला है।
गुंजरावाला की घटना की जानकारी भी राहत आस्टिन ने सबसे पहले दी। सोशल मीडिया पर घटना से संबंधित उनके द्वारा साझा की गई तस्वीरें दिल दहलाने वाली हैं। तस्वीर में ईसाई मां-बेटे के ईद-गिर्द खून ही खून पसरा नजर आ रहा है। ईशनिंदा की आड़ में इस्लामी भीड़ मां-बेटे पर टूट पड़ी थी। हत्यारों ने पहले उस्मान मसीह की मां यास्मीन को मौत के घाट उतारा। फिर उसके सीने में ताबड़-तोड़ गोलियां उतार दीं।
पाकिस्तान पर नजर रखने वाले पत्रकार आदित्यराज कौल के मुताबिक, “ईसाई मां यास्मीन और उसके बेटे उस्मान मसीह को मोहम्मद हसन की अगुवाई में इस्लामी भीड़ ने बेरहमी से मार डाला। ईशनिंदा के नाम पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ क्रूर अत्याचार जारी है और पूरा विश्व पूर्ण रूप से मौन है।”
ऐसी घटनाओं पर पाकिस्तान की सियासी जमातें, गैर सरकारी संगठन एवं मीडिया भी मौन धारण कर लेता है। ताजे मामले में भी यही सब कुछ देखने को मिल रहा है। भारत में भी सीएए-एनआरसी को मुसलमानों के लिए खतरा बताने वाले इस वारदात पर चुप्पी साधे हैं।