दिल्ली महाराष्ट्र केरल और बंगाल अपवाद बाकी जगह कोरोना काबू!

    दिनांक 19-नवंबर-2020
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देश के 77 प्रतिशत नए केस केवल 10 राज्यों से आ रहे हैं, जिनमें टॉप पर दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इन राज्यों की सरकार कोरोना को थामने में नाकारा साबित हुई है

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19 नवंबर 2020 यानी आज केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण को लेकर नवीनतम आंकड़े जारी किए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 45,576 नए केस आए हैं, जबकि 48,493 लोग संक्रमण मुक्त हो गए। देश में एक्टिव केस 4,43,303 ही बचे हैं। यह आंकड़े निश्चित रूप से दिल को सुकून देने वाले हैं, लेकिन तस्वीर के पीछे का पहलू यह है कि देश के 77 प्रतिशत नए केस केवल 10 राज्यों से आ रहे हैं, जिनमें टॉप पर दिल्ली, केरल, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इन राज्यों की नाकारा सरकारों की कोरोना की रोकथाम में नाकारा साबित हुई है।
दरअसल यहां की राज्य सरकारें राजनीति में ज्यादा व्यस्त हैं और इन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं है।
देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में सर्वाधिक 7486 नए केस दर्ज किए गए। दिल्ली की हालत यह है कि अस्पतालों में बैड नहीं बचे हैं। ऑक्सीजन की कमी बताई जा रही है। पिछले दिनों हालात बिगड़े तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक बुलाकर स्थिति को संभालने की कोशिशें शुरू की। उन्होंने आरटी-पीसीआर टेस्टों की संख्या बढ़ाने का आश्वासन दिया। बड़ी आबादी के बावजूद दिल्ली में अभी 30,000 प्रतिदिन से कम टेस्ट हो रहे हैं। अमित शाह ने 750 नए बैड्स उपलब्ध कराने की बात भी कही।
हद तो यह है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल केवल और केवल मीडिया में विज्ञापन देने में बिजी हैं, जबकि जनता कोरोना से मर रही है।
दिल्ली की स्थिति

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पिछले 24 घंटों में दिल्ली में कोरोना से 131 लोगों की मौत हुई है, जो देश में सर्वाधिक हैं। कुछ करने के बजाय केजरीवाल टेलीविजन में पराली से खाद बनाने के तरीकों को बताने पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली की 2 करोड़ आबादी में बमुश्किल 5-7 हजार लोग ही खेती करते हैं। जब दीपावली पर सतर्क रहने की जरूरत थी, तब भी केजरीवाल टेलीविजन और अखबारों में दीपावली पूजन के विज्ञापनों में ही दिख रहे थे।
पिछली बार जून में जब केजरीवाल गृह मंत्री शाह के पास गए थे, तब दिल्ली में कोरोना मरीजों के लिए 4176 बेड उपलब्ध थे, जो अब बढ़ाकर 5451 कर लिए गए हैं, यानी इन महीनों में मात्र 1275 बेड दिल्ली सरकार बढ़ा पाई है, जबकि इन महीनों में अरविंद केजरीवाल ने अपने प्रचार पर 108 करोड़ रुपए खर्च कर डाले हैं। पहले केजरीवाल लॉकडाउन की आलोचना करते थे, लेकिन अब वो दिल्ली के कई इलाकों में खुद लॉकडाउन लगाने की आज्ञा मांग रहे हैं। दिल्ली की नकारी सरकार के चलते राज्य में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 5 लाख को पार कर गया है।
महाराष्ट्र की स्थिति

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एक और नकारा राज्य महाराष्ट्र है। शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मिली-जुली सरकार ने महाराष्ट्र के लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। कोरोना की रेस में महाराष्ट्र शुरू से अव्वल बना हुआ है। राज्य में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अब तक कोरोना के 17.50 लाख से ज्यादा केस आ चुके हैं और यह संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। पिछले 24 घंटों में राज्य में 5011 नए केस दर्ज हुए हैं, जबकि 100 लोगों की जान गई है। महाराष्ट्र में अब तक 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
राजधानी मुंबई में तो स्थिति और भयावह बनी हुई है। यहां संक्रमितों की संख्या 2.71 लाख से ज्यादा हो चुकी है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अब तक कोरोना को लेकर फेल ही साबित हुए हैं। कोरोना रोकने से ज्यादा उनका ध्यान मीडिया की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने पर लगा हुआ है।
बंगाल की स्थिति

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पश्चिम बंगाल की स्थिति और भी बदतर है, क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रवैया कुछ ऐसा है कि वो न तो खुद कुछ कर रही हैं और न केंद्र सरकार को कुछ करने दे रही हैं। राज्य में टेस्टिंग भी ठीक से नहीं हो रही। शुरुआत में तो ममता बनर्जी सरकार ने आंकड़े तक देने में आना-कानी की थी। पिछले 24 घंटों में पश्चिम बंगाल में 3668 केस दर्ज हुए हैं और 54 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
राज्य में अब तक 4.82 लाख कोरोना संक्रमण केस दर्ज हुए हैं। ममता बनर्जी ने कोरोना महामारी को केवल राजनीतिक टूल बनाया हुआ है। आए दिन ममता बनर्जी केंद्र सरकार से किसी न किसी मुद्दे पर भिड़ी रहती हैं। राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
केरल की स्थिति

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दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसी ही स्थिति केरल की है। केरल में ही देश का पहला कोरोना केस मिला था। शुरुआत में वामपंथी मीडिया का सहारा लेकर केरल ने कोरोना कंट्रोल करने के फर्जी आंकड़ों के सहारे खूब वाह-वाही लूटी, लेकिन जल्द ही उसकी पोल खुल गई। अब केरल देश के टॉप 4 राज्यों में शामिल है। पिछले 24 घंटे में संक्रमित केसों में केरल का नंबर दिल्ली के बाद दूसरा है। यहां 6419 केस मिले हैं, जबकि 28 लोगों की मौत हो चुकी है। केरल में अब तक 4.68 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी केवल और केवल राजनीति में व्यस्त हैं। उनका कार्यालय सोना तस्करी केस में घिरा हुआ है। कई जांच एजेंसी राज्य में विभिन्न केसों की जांच में जुटी हैं। कुछ करने के बजाय विजयन खुद को बचाने में लगे हुए हैं। कोरोना पर कुछ ठोस करने के बजाय वो जांच एजेंसियों को रोकने के जुगाड़ लगा रहे हैं। हाल में केरल ने सीबीआई को दी सहमति वापस ली है।
यदि देश से कोरोना को खत्म करना है तो इन नकारी सरकारों को जगाना होगा, क्योंकि इनके रहते तो महामारी से मुक्ति मिलना मुश्किल ही लग रहा है।