केवड़िया नहीं देखा तो क्या देखा

    दिनांक 19-नवंबर-2020
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डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ

गुजरात का केवड़िया एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा तो पहले से ही थी, अब और कई दर्शनीय स्थल भी तैयार हो गए हैं, जिनका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्तूबर को किया

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जल विमान सेवा के उद्घाटन के अवसर पर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

पर्यटन की दृष्टि से गुजरात पहले से ही देश-दुनिया के लोगों को आकर्षित करता रहा है, लेकिन ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ बनने के बाद नर्मदा जिले का केवड़िया एक नए पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है। केवड़िया में स्थापित सरदार पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। राज्य में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इसी ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ के आसपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान गत 31 अक्तूबर को सरदार पटेल जयंती के अवसर पर 17 परियोजनाओं का लोकार्पण किया तथा चार नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। ये 17 परियोजनाएं 1 नवंबर से शुरू हो चुकी हैं, जिनमें सी-प्लेन, क्रूज, रिवर राफ्टिंग, एकता नर्सरी, जंगल सफारी, बटरफ्लाई गार्डन, विश्व वन, आरोग्य वन, कैक्टस गार्डन, चिल्ड्रन पार्क आदि शामिल हैं। यानी अब पर्यटकों को एक ही स्थान पर घूमने-फिरने के लिए कई चीजें उपलब्ध होंगी। इन सभी स्थलों पर घूमने के लिए पर्यटकों को 2,900 रुपये खर्च करने होंगे। बच्चों के लिए यह राशि 2,500 रुपये होगी।

इससे पहले, एकता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरदार सरोवर से साबरमती रिवरफ्रंट तक शुरू होने वाली सी-प्लेन सेवा अपने आप में अनूठी और देश की पहली जल विमान सेवा है। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी देखने आने वाले देशवासियों को अब इस सेवा का भी विकल्प मिलेगा। इन प्रयासों से इस क्षेत्र में पर्यटन को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यहां के लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। इन उपलब्ध्यिों के लिए मैं गुजरात सरकार, गुजरात के सभी नागरिकों और सभी 130 करोड़ देशवासियों को बधाई देता हूं। इसके अलावा, पीएमओ से जारी बयान में कहा गया कि सी-प्लेन वैसे भौगोलिक क्षेत्रों से संपर्क की दिशा में मददगार हो सकते हैं, जहां दुर्गम क्षेत्रों के कारण अनेक चुनौतियां हैं। इससे लोग न केवल देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में हवाई सेवा से जुड़ सकेंगे, बल्कि उन इलाकों में हवाई अड्डा व हवाई पट्टी बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे छोटे डैने वाले विमान जलीय क्षेत्रों जैसे झीलों, बांधों, अप्रवाही जल, पथरीले और घास वाली सतह पर भी उतर सकते हैं। यही नहीं, इस साल दिसंबर से पर्यटक आसानी से केवड़िया पहुंच सकेंगे। दरअसल, भारतीय रेलवे दभोई से केवड़िया तक रेल लिंक सेवा शुरू करने वाला है। दभोई से चंदोड़ के बीच 18 किलोमीटर लंबी पटरी के गेज में बदलाव का काम पूरा हो चुका है, जबकि चंदोड़ से केवड़िया तक 32 किमी लंबी नई रेल लाइन का निर्माण कार्य 15 नवंबर तक पूरा हो जाएगा। यानी अब पर्यटक यात्री गाड़ी या एक्सप्रेस से सीधे केवड़िया पहुंच सकेंगे। दभोई से चंदोड़ के बीच 3 बड़े और 16 छोटे पुल तथा चंदोड़ से केवडिया के बीच 4 बड़े और 47 छोटे पुल होंगे। अभी तक लोग वडोदरा, भरूच और अंकलेश्वर रेलवे स्टेशनों पर उतर कर दूसरे माध्यमों से केवड़िया पहुंचते हैं।

‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ कमाई में आगे

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2018 में दीवाली के अवसर पर यहां 1,50,250 पर्यटक पहुंचे थे, जबकि 2019 में दीवाली तक यह संख्या बढ़कर 2,91,640 तक पहुंच गई। एक आंकड़े के अनुसार 1 नवंबर, 2018 से 17 मार्च, 2020 तक इस प्रतिमा को देखने के लिए देश-विदेश से 43 लाख पर्यटक आए। इनसे सरकार को करीब 120 करोड़ रुपये की आय हुई। लॉकडाउन से पहले तक इस प्रतिमा को देखने के लिए रोजना करीब 15,000 लोग आते थे। इसकी ऊंचाई 182 मीटर है। प्रतिमा का कुल वजन 1700 टन है। पैर की ऊंचाई 80 फीट, हाथ की लंबाई 70 फीट, कंधे की ऊंचाई 140 फीट और चेहरे की ऊंर्चा 70 फीट है। इसके अंदर एक लिफ्ट है, जो ऊपर गलियारे तक जाती है और वहां से सरदार सरोवर बांध दिखता है। इसमें एक पुस्तकालय भी है, जहां सरदार पटेल से जुड़े इतिहास को समेटा गया है। प्रतिमा में चार धातुओं का प्रयोग किया गया है ताकि इसमें जंग न लगे। इसमें 85 प्रतिशत तांबा, 5,700 मीट्रिक टन स्टील और 18,500 मीट्रिक टन सरिया का इस्तेमाल हुआ है। साथ ही, आधार में 22,500 मीट्रिक टन सीमेंट प्रयुक्त हुआ है। प्रतिमा के लिए लोहा देशभर के किसानों के खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार औजारों से जुटाया गया। इसके लिए सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट का गठन कर देशभर में 36 कार्यालय खोले गए थे, जिसमें ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी अभियान’ चलाया गया। तीन महीने में ही लगभग 6 लाख ग्रामीणों ने लगभग 5,000 मीट्रिक टन लोहा दान दिया। अक्तूबर 2014 में लार्सन एंड टुब्रो कंपनी को प्रति निर्माण का ठेका दिया गया और लगभग 44 माह में प्रतिमा बन कर तैयार हुई। यह प्रतिमा एक सामान्य व्यक्ति की ऊंचाई 100 गुना है।  सरदार पटेल की इस प्रतिमा को बनाने में लगभग 3,000 करोड़ रुपये का खर्च आया था। कमाई के मामले में इसने ताजमहल को भी पीछे छोड़ दिया है। स्टैच्यू आॅफ यूनिटी की वार्षिक कमाई जहां 75 करोड़ रुपये है, वहीं ताजमहल की कमाई 56 करोड़ ही है। हालांकि प्रतिमा के रख-रखाव पर प्रतिदिन 12 लाख रुपये खर्च भी होते हैं। 

केवड़िया में प्रधानमंत्री ने शुरू कीं ये परियोजनाएं


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सी-प्लेन: यह जल विमान सेवा केवड़िया-अहमदाबाद के बीच संचालित होगी, जो ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ को साबरमती रिवरफ्रंट से जोड़ेगी। दो इंजन और 18 सीट वाला यह जल विमान प्रति 50 मिनट में 200 किमी की दूरी तय कर सकता है। इसमें दो पायलट और क्रू सदस्य के साथ 14 यात्री बैठ सकेंगे। इसका किराया प्रति यात्री 4 से 5,000 रुपये है। इसमें पायलट और क्रू सदस्य विदेशी हैं, लेकिन छह महीने के बाद भारतीय पायलट और क्रू सदस्य इसके उड़ान की व्यवस्था संभालेंगे। साबरमती रिवरफ्रंट पर फ्लोटिंग जेटी का निर्माण किया गया है, जबकि स्टैच्यू आॅफ यूनिटी पर भी वॉटर एयरोड्रम बनाया जा रहा है। स्पाइस जेट की सहयोगी कंपनी स्पाइस शटल प्रतिदिन दो सी-प्लेन उड़ानों का संचालन करेगी। इसमें एक तरफ का किराया 1,500 रुपये से शुरू होगा और हर उड़ान की अवधि लगभग 30 मिनट होगी। ‘स्टेच्यू आॅफ यूनिटी’ तक के 7 किमी के क्षेत्र तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए तालाब के दोनों छोरों पर नौका संचालन की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है। इस सेवा के शुरुआती दो दिन में ही 3,000 लोगों ने अग्रिम टिकट की खरीददारी की।

जंगल सफारी: ‘स्टेच्यू आॅफ यूनिटी’ से लगभग दो किलोमीटर दूर 5,55,240 वर्ग मीटर में पार्क और सफारी का निर्माण किया गया है। यहां अफ्रीका, आॅस्ट्रेलिया, एशिया और अमेरिका में पाए जाने वाले 170 से अधिक जीव-जंतुओं की प्रजातियों को देखा जा सकेगा। इसके अलावा भी पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां कई चीजें हैं। 375 एकड़ क्षेत्र में फैले जंगल सफारी में 1100 से अधिक पशु-पक्षी हैं और तकरीबन 5 लाख पौधे हैं। जंगल सफारी के अंदर स्थित प्राणी उद्यान में दो अलग-अलग पक्षी अभयारण्य हैं, जिसमें एक घरेलू पक्षियों के लिए है और दूसरा विदेश से आने वाले पक्षियों के लिए। यह दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी उद्यान है।

चिल्ड्रन पार्क: खासतौर से बच्चों के लिए निर्मित यह पोषक पार्क दुनिया का पहला प्रौद्योगिकी आधारित पार्क है, जो 35 हजार वर्ग फीट में फैला हुआ है। पार्क में एक न्यूट्री ट्रेन भी है, जिसके स्टेशन के नाम भी काफी रोचक रखे गए हैं। ये नाम फलशाखा गृहम्, पायोनागिरि, अन्नपूर्णा, पोषण पुराण, स्वस्थ भारत हैं। इस पार्क का उद्देश्य विभिन्न गतिविधियों के जरिए बच्चों में पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता फैलाना है। यहां 3 आईने वाली मेज, 5डी वर्चुअल रियलिटी थिएटर और आॅगमेंटेंड रियल्टी गेम की भी व्यवस्था की गई है।

आरोग्य वन: आरोग्य वन में 15 एकड़ क्षेत्र में औषधीय गुणों वाले पौधे लगाए गए हैं, जिसमें 380 किस्म के पांच लाख पेड़ हैं। आरोग्य वन का विकास योग और आयुर्वेद को ध्यान में रख कर किया गया है। यहां आरोग्य कुटीर भी है।

विश्व वन, भारत वन और एकता नर्सरी: विश्व वन सभी सात खंडों की औषधीय वनस्पति, पौधे और पेड़ हैं, जो वैश्विक परिप्रेक्ष्य में विविधता में एकता के भाव को दर्शाता है। इस वन का निर्माण इस प्रकार से किया गया है कि पर्यटकों को यह प्राकृतिक वन जैसा ही लगे। इसी तरह, 10 हेक्टेयर में फैले भारत वन में 5 लाख से अधिक फूलों की विभिन्न प्रजातियां देखी जा सकती हैं। साथ ही, वन की शोभा बढ़ाने के लिए कई तरह के पौधे भी लगाए गए हैं। एकता नर्सरी स्थापित करने के पीछे प्रधानमंत्री का उद्देश्य यह है कि यहां आने वाले पर्यटक नर्सरी से ‘प्लांट आॅफ यूनिटी’ नाम से एक पौधा अपने साथ अवश्य ले जाएं। शुरुआती चरण में यहां एक लाख पौधे लगाए गए हैं, जिनमें 30 हजार पौधे बेचने के लिए तैयार हो चुके हैं।

बटरफ्लाई गार्डन और कैकटस गार्डन: पर्यटक यहां प्रकृति की सुंदर और रंग-बिरंगी कृति भी देख सकें, इसके लिए इस बगीचे का निर्माण किया गया है। लगभग 6 एकड़ में फैले इस विशाल बगीचे में 45 प्रजातियों की तितलियां उपलब्ध हैं। साथ ही, कैकटस गार्डन में थोर की अलग-अलग प्रजातियां देखने मिलेंगी। थोर आकर्षक और अलग-अलग आकार और कद में उगाए गए हैं। थोर मूल अमेरिका की वनस्पति है, जो पेटागोनिया तथा कनाडा के उत्तर व दक्षिण हिस्से में भी पाई जाती है।

एकता मॉल: इस मॉल में पर्यटकों को हस्तकला और देश के अलग-अलग राज्यों के परंपरागत वस्त्र मिलेंगे। मॉल के निर्माण में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ पुरानी परंपरागत भारतीय हस्तकला का समन्वय दिखता है। पर्यटक यहां एक ही छत के नीचे अलग-अलग राज्यों के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी कर सकते हैं। ‘हथकरघा और हस्तशिल्प में विविधता में एकता’ की अवधारणा पर विकसित यह मॉल 35,000 वर्ग फीट में फैला है। वातानुकूलित दुमंजिला स्टोर में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए 20 अलग-अलग एंपोरियम हैं। इसके केवल 110 दिनों में बनाया गया है।

एकता आॅडिटोरियम: करीब 1700 वर्ग मीटर में फैला यह एक सामुदायिक हॉल है। यहां संगीत, नृत्य, नाटक, कार्यशाला, भोजन आदि सभी सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इस हॉल में 700 लोगों के बैठने की क्षमता है।

एकता क्रूज: एकता क्रूज सेवा के जरिये पर्यटक फेरी बोट से नर्मदा नदी में श्रेष्ठ भारत भवन से लेकर ‘स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ तक छह किमी की दूरी तय कर सकते हैं। 40 मिनट की इस यात्रा में एक नाव पर अधिकतम 200 यात्री सफर कर सकेंगे। फेरी सेवाओं के लिए नया गोरा पुल खास तौर से बनाया गया है।