मुस्लिम तुष्टीकरण सपा और बसपा के लिए बना मुसीबत

    दिनांक 19-नवंबर-2020   
Total Views |
अखिलेश यादव मतों के ध्रुवीकरण से घबराए हुए हैं और  मुसलमानों के साथ खुलकर नहीं आना चाहते। सीएए, एनआरसी  हो या फिर आजम खान का मुद्दा, वे हर मामले में निश्चित दूरी बनाकर चल रहे हैं। वहीं मायावती मुस्लिम वोट तो हासिल करना चाहती हैं मगर उनके पक्ष में खुलकर सामने नहीं आना चाहतीं

34_1  H x W: 0

वोटों के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण अब मायावती और अखिलेश यादव के लिए मुसीबत बन गया है। उत्तरप्रदेश में मुसलमान वोटर बैंक सपा और बसपा का जनाधार है। दोनों ही दलों के समर्थक यहां पर हैं। दोनों ही राजनीतिक दल मुसलमानों का वोट लेना चाहते हैं मगर मुसलमानों के लिए खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

अब इन दलों के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि मुस्लिम वोट बिखरने न पाए और मुसलमानों के चक्कर में बहुसंख्यक नाराज न हो जाएं। हाल ही में उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सांसद के चुनाव में बसपा के विधायक असलम अली, असलम राईनी, मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, हरिगोविंद भार्गव और सुषमा पटेल, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ चले गए। इसके बाद क्रोधित मायावती ने बागी विधायकों को पार्टी से निष्कासित करते हुए कहा कि ‘‘भाजपा के साथ ही क्यों न जाना पड़े मगर सपा को हर हाल में सबक सिखाना है।’’ इसके बाद समाजवादी पार्टी ने मायावती के इस बयान को जमकर प्रचारित किया। सपा ने माहौल बनाया कि  मायावती , भाजपा के साथ जाने को तैयार हैं। बसपा, भाजपा की ‘बी’ टीम है। इसके बाद मायावती को मुस्लिम वोट बैंक के बिखरने का डर सताने लगा। उन्होंने अगले ही दिन बयान जारी किया  कि ‘राजनीति से संन्यास ले लूंगी मगर भाजपा के साथ कभी नहीं जाऊंगी।’

एक समय था जब समाजवादी पार्टी पर कट्टर मुस्लिम नेता आजम खान का खासा प्रभाव था। वहीं मायावती जब—जब मुख्यमंत्री रहीं, नसीमुद्दीन सिद्दीकी सरकार में बेहद ताकतवर मंत्री रहे। विपक्ष की भूमिका में बैठे दोनों राजनीतिक दल अब दोराहे पर हैं।  दरअसल, अब मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति का दौर खत्म हो चुका है। यही वजह है कि बसपा के विधायकों को अखिलेश यादव ने बसपा से तोड़ लिया मगर उन्हें सपा की सदस्यता नहीं दिलाई। बसपा से बगावत करने वाले विधायकों में 3 विधायक मुस्लिम हैं।

बता दें कि बाबरी ढांचे की सुरक्षा के लिए जब मुलायम सिंह यादव ने गोली चलवाई थी तो उसके बाद से मुस्लिम, मुलायम के साथ आ गए थे। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद यादव और पिछड़ी जातियों का भी समर्थन मुलायम सिंह यादव को प्राप्त हो गया था। मुलायम अक्सर कहा करते थे कि  ‘जब तक मेरे पास मेरा 'माई' (एम और वाई , एम - मुसलमान ,वाई-यादव ) हैं तब तक मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।’ सपा कांग्रेस के खिलाफ लड़ कर अस्तित्व में आई थी। मुलायम ने कांग्रेस और बसपा की खिलाफत की और मुसलमानों का समर्थन हासिल करने में सफल रहे। 2 जून, 1995 को हुए गेस्ट हाउस काण्ड के बाद मायावती से मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक दुश्मनी, निजी शत्रुता में बदल गई। मुलायम के मना करने के बावजूद अखिलेश ने बसपा से समझौता किया। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद सपा-बसपा गठबंधन धराशायी हो गया। मायावती ने गठबंधन तोड़ दिया। उस समय मायावती ने आरोप लगाया कि ‘अखिलेश यादव चाहते थे कि मैं मुसलमानों से दूरी बना कर चलूं। लोकसभा चुनाव में हार के जिम्मेदार अखिलेश यादव ही हैं। अखिलेश ने मुझे ज्यादा मुसलमानों को टिकट देने से मना किया था। अखिलेश यादव ने मुझसे कहा था कि इससे ध्रुवीकरण होगा और इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा।’

मायावती ने लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन तोड़ने में तनिक भी देर नहीं की थी। गठबंधन टूट जाएगा यह कयास तो लगाया जा रहा था मगर इतनी जल्दी टूटेगा, इसका अंदाजा किसी को भी नहीं था। आज के राजनीतिक दौर में बदलाव के कारण मायावती, मुसलमानों से एक निश्चित दूरी बना कर ही चलना चाहती हैं। यही वजह है कि पार्टी से मुस्लिम विधायकों को निष्कासित करते हुए उन्हें तनिक भी हिचकिचाहट नहीं हुई। हां वे परेशान जरूर हुर्इं लेकिन तब जबकि सपा ने उन्हें भाजपा की ‘बी’ टीम घोषित कर दिया, तब वे बेचैन हो उठीं और इस मामले में बयान देकर उन्होंने भरपाई करने की कोशिश जरूर की।

उधर अखिलेश यादव का भी यही हाल है। वे सपा के मूल वोट बैंक ‘मुस्लिम वोटर’ से एक निश्चित दूरी बना कर चल रहे हैं।  पहले मायावती और उसके बाद आजम खान, सपा नेतृत्व को मुस्लिम विरोधी बता चुके हैं। अखिलेश यादव को यह डर सताने लगा है कि अगर उन्होंने मुसलमानों को ज्यादा बढ़ावा दिया तो इससे ध्रुवीकरण होगा और इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। लिहाजा वे मुसलमानों के पक्ष में खुलकर खड़े नहीं हो रहे हैं। गत वर्ष, नागरिकता संशोधन कानून एवं एनआरसी के मुद्दे पर मुसलमानों को इन्तजार था कि अखिलेश यादव खुलकर सामने आएंगे मगर ऐसा नहीं हुआ।

कुछ माह पहले आजम खान के मामले में भी यह उजागर हो गया कि वे आजम खान के मुद्दे को तूल नहीं देना चाहते है। जेल जाने के बाद आजम खान को लग रहा था कि सपा के नेता सड़कों पर आन्दोलन करेंगे मगर ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। कहा जा रहा है कि जेल में बंद आजम खान, सपा नेतृत्व के रवैये से बेहद नाराज हैं। उन्हें लगता है कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और इस मुसीबत के समय में पार्टी भी साथ नहीं दे रही है। आजम खान से जेल में मिलने गए उनके बेहद करीबी रिश्तेदार जमीर अहमद खान ने मीडिया के सामने बकायदा बयान जारी किया कि ‘सांसद आजम खान पार्टी नेतृत्व के रवैये से खफा हैं। जब उत्तर प्रदेश की सरकार ने विभिन्न मामलों में उनके खिलाफ केस दर्ज किए तो समाजवादी पार्टी उनका साथ देने में नाकाम रही है। वह बहुत नाराज दिखे और जेल में मुलाकात करने आ रहे सपा के वरिष्ठ नेताओं से मिलना नहीं चाहते हैं।’

भीम-मीम: एक पीड़ित, एक प्रताड़क

कभी कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने समझौता किया था मगर एक साथ नहीं रह पाए। उसके बाद अखिलेश यादव और मायावती ने समझौता किया मगर गठबंधन टूट गया। ये लोग चाहकर भी साथ नहीं रह सकते। इसकी वजह यह है कि सपा का वोटर, खासतौर पर मुसलमान, दलितों को प्रताड़ित करता है। दलितों की जमीन पर कब्जा कर लेता है। 1995 में भी इसी बात पर विवाद हुआ था। सपा के समर्थकों ने बसपा के समर्थकों को मारा-पीटा था जिसके बाद कांशीराम ने मुलायम सिंह यादव को चेतावनी दी थी।

भाजपा राज में हो रही तत्काल कार्रवाई

34_1  H x W: 0

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ

भाजपा की सरकार में जहां कहीं भी मुसलमानों ने दलितों पर अत्याचार करने का प्रयास किया, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई के आदेश दिए। 

30 जुलाई को प्रतापगढ़ जनपद में मुसलमानों ने दलित युवकों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जून के महीने में जौनपुर, आजमगढ़ एवं गाजीपुर जनपदों में मुस्लिमों ने दलितों पर हमला किया। उनके घर भी जला दिए। मुख्यमंत्री ने इस सभी  घटनाओं का संज्ञान लिया और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी अभियुक्तों के खिलाफ गैंगस्टर एवं रासुका जैसे कानून का इस्तेमाल करते हुए सख्त कार्रवाई की जाए।

प्रतापगढ़ में नाग पंचमी के अवसर पर अखाड़े में कुश्ती हो रही थी। इसी बीच आशिक अली और असगर अली ने कुश्ती प्रतियोगिता में व्यवधान उत्पन्न करना शुरू कर दिया। इसके बाद वहां पर मार-पीट हुई तब आशिक और असगर को मौके से पीछे हटना पड़ा। उसी बात का बदला लेने के लिए 30 जुलाई को असगर अली 8 युवकों के साथ दलितों की बस्ती में पहुंचा। असगर और उसके साथियों ने दलितों को लाठी झ्र डंडों से दौड़ा झ्र दौड़ा कर पीटा। इस हमले में कई दलित युवक घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार गंभीर रूप से घायलों को प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया। मुख्यमंत्री ने इस घटना का संज्ञान लिया। उसके बाद थाना बाघराय की पुलिस ने तत्परता के साथ सभी 9 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ गैंगस्टर लगाने का आदेश दिया।

जौनपुर जनपद में 9 जून को आम तोड़ने का विवाद इतना बढ़ गया कि मुस्लिम पक्ष के लोगों ने दलित बिरादरी के लोगों के घर में घुसकर मारपीट की और उनके घरों में आग लगा दी। इस घटना का भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। उन्होंने मुख्य आरोपी नूर आलम एवं जावेद सिद्दीकी समेत सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एवं राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई के आदेश दिए। जिन पीड़ितों के घरों को जलाया गया था, उनको मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत घर मुहैया कराने के आदेश दिए गए।

आजमगढ़ जनपद में ट्यूबवेल पर पानी भरते समय एक दलित बालिका से आए दिन मुस्लिम युवक छेड़खानी करते थे। 12 जून को छेड़खानी का विरोध करने पर मुस्लिम युवकों ने दलितों को मारपीट कर घायल कर दिया। मुख्यमंत्री ने इस घटना का  संज्ञान लेते हुए अभियुक्तों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश देने के साथ यह भी निर्देश दिया  कि जाति को लेकर अगर किसी भी प्रकार की घटना होती है तो क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे। उस जिले के पुलिस अधीक्षक की जवाबदेही भी तय की जायेगी। इस घटना को बाद पुलिस ने परवेज, फैजान, नूरआलम, सदरे आलम समेत 12 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। सभी अभियुक्तों के खिलाफ रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की गई।
इसी तरह 19 जून को गाजीपुर के गहमर थाना अंतर्गत गोड़सरा गांव में शौकत, अश्लील गाना बजाते हुए ट्रैक्टर चला रहा था। जब वह दलित बस्ती के बगल से गुजर रहा था तभी मनरेगा में काम कर रहे कुछ मजदूरों ने अश्लील गाना बजाने के लिए मना किया। यह सुनते ही मुस्लिम पक्ष हमला करने पर आमादा हो गया। कुछ ही देर में शौकत का पुत्र हैदर अपने साथियों के साथ लाठी एवं डंडों से लैस होकर पहुंचा और हमला कर दिया। इस हमले में दलित बस्ती की महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत 13 लोग घायल हो गए।  इस घटना के मुख्य आरोपी हैदर, तनवीर, मोहम्मद अली सहित 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।