सेवा और संपर्क से समृद्धि

    दिनांक 19-नवंबर-2020   
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दिल्ली के आभूषण निर्यातक सुरेंद्र खंडेलवाल ने कोरोना काल में भी अपने ग्राहकों से संपर्क रखा। इस कारण उन्हें दुबई और कुछ अन्य जगहों से महामारी के दौरान भी काम मिलता रहा। उनका कहना है कि सेवा और संपर्क का फल जरूर मिलता है
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सुरेंद्र खंडेलवाल (53 वर्ष)
कंपनी : खंडेलवाल ग्रुप आफ इंडस्ट्रीज
वार्षिक कारोबार: 50 करोड़ रु.
चुनौती: कंपनी को चलाना
रणनीति: कर्मचारियों को सभी
ग्राहकों से निरंतर संपर्क बनाने की
जिम्मेदारी दी गई। ये लोग ईमेल, मोबाइल और
वाट्सएप के जरिए ग्राहकों का हालचाल लेते रहे।
दिल्ली की ‘खंडेलवाल ग्रुप आफ इंडस्ट्रीज’ ने कोरोना काल का मुकाबला बहुत ही सुंदर तरीके से किया। वैसे तो यह कंपनी कोयला, संपत्ति की खरीद-बिक्री, होटल आदि का भी काम करती है, लेकिन इसका मुख्य कार्य आभूषण का है। यह कंपनी पूरे भारत और दुबई में आभूषण भेजती है। कंपनी ने अपने सभी 170 कर्मचारियों के सहयोग से महामारी की चुनौती को स्वीकार किया और सरकार से थोड़ी-सी छूट मिलते ही अपना काम शुरू कर दिया। 

कंपनी के स्वामी सुरेंद्र खंडेलवाल ने बताया, ‘‘लॉकडाउन के बाद एक महीने तक कोई काम नहीं हुआ, लेकिन अपने हमने कर्मचारियों को अनेक टोलियों में बांट दिया। हर टोली को ग्राहकों से ईमेल, मोबाइल और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने को कहा गया। सब को अलग-अलग ग्राहक दिए गए। इससे हर ग्राहक से संपर्क ही नहीं बना रहा, बल्कि उसे यह बहुत ही अच्छा लगा कि इस महामारी के दौर में भी कोई उसका हाल-चाल पूछ रहा है। इस अपनत्व के भाव ने हमारे और ग्राहकों के बीच के संबंध को और मजबूत किया। इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ दिन बाद ही ग्राहक पूछताछ करने लगे और ईमेल तथा वाट्सएप से आभूषणों के ‘डिजाइन’ भेजने लगे।’’ 

महामारी के दौरान आने वाली चुनौती के बारे में खंडेलवाल ने कहा, ‘‘सबसे बड़ी चुनौती कंपनी के अस्तित्व को बचाने की रही। मैं सब कुछ अचानक होने से स्तब्ध रह गया, लेकिन भगवान पर अगाध श्रद्धा रखने से सब कुछ उन पर ही छोड़ दिया। इसके बाद मैं अपने कुछ साथियों के साथ जरूरतमंदों तक खाना आदि पहुंचाने का काम करने लगा। शायद इसी सेवा से मेवा मिली और ग्राहकों के संदेश आने लगे।’’ सुरेंद्र खंडेलवाल का कहना है कि इस महामारी ने सेवा और सतत संपर्क का सबक सिखाया है। अब कंपनी पहले की तरह ही काम करने लगी है।