संघ ने किया आत्मनिर्भरता एवं स्वालंबन का आह्वान

    दिनांक 19-नवंबर-2020
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गाजियाबाद में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र की बैठक में पर्यावरण संरक्षण व वैश्विक महामारी कोरोना के कारण बदलते परिवेश में स्वयंसेवकों को और अधिक गंभीरता व जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया गया

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बैठक में सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए स्वरोजगार, आत्मनिर्भता और स्वावलंबन को कार्य का आधार बनाने और पर्यावरण संरक्षण के संबंध में चर्चा की गई। पानी को पैदा नहीं कर सकते लेकिन बचा सकते हैं, वृक्षों को लगाया जा सकता है, इसलिए अधिकाधिक वृक्षारोपण करने और प्लास्टिक के उपयोग से बचने पर जोर दिया गया।
बैठक में संघ कार्य की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के साथ आगामी कार्यक्रमों पर विचार किया गया। स्वदेशी, कुंटुंबप्रबोधन जैसे सामाजिक सरोकार के विषयों पर चिंतन किया गया। उल्लेखनीय है कि स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर, नेहरू नगर में सघ की दो दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी व सरकार्यवाह भैया जी जोशी, सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, डॉ. कृष्ण गोपाल, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंद जी, तीन प्रांतों के 20 प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि कोरोना के कारण सामाजिक परिवेश में परिवर्तन आया है। इस बदलते परिवेश में स्वयंसेवकों को अपनी कार्य भूमिका बदलने की आवश्यकता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि कोरोना के कारण आनलाइन व परिवार शाखाओं को अब अपने पूर्व स्वरूप में आना चाहिए। शाखाओं को कोरोना संबंधी सावधानियों के साथ शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए खुले मैदानों में लगाने की बात की गई। राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार की भावना मजबूत करने के लिए साप्ताहिक कुटुंब बैठकें प्रारंभ करने का आह्वान किया गया। भारत की प्राचीन कुटुंब परंपरा में परस्पर स्नेह व सामंजस्य विशेषता रही है।
सरकार्यवाह सुरेश जोशी के अनुसार पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जब पर्यावरण संरक्षण का विषय आता है तो जल प्रबंधन, जल के दुरुपयोग की रोकथाम, प्लास्टिक उपयोग पर रोक जैसे जागरूक अभियान चलाने होंगे। समाज में अधिक से अधिक वृक्षारोपण की अलख जगानी होगी। सभी प्रांतों ने अपने यहां चल रहे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों व वृक्षारोपण अभियानों की जानकारी बैठक में दी।
बैठक में स्वदेशी निर्मित समान के उपयोग से भारत को आर्थिक रूप से सशक्त करने की अवधारणा को साकार किया जा सकता है। इसलिए छोटे उद्योग, ग्रामीण कुटीर उद्योग का सहयोग करने की बात कही गई। इस बैठक के माध्यम से दिया गया पर्यावरण बचाओ का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में प्लास्टिक मुक्त संपूर्ण व्यवस्था थी। प्रांगण की सज्जा पारंपरिक तरीके से तैयार रंगों से की गई।
कोरोना काल में किए गए सेवाकार्य
मेरठ प्रांत
कोरोना संकट के समय मेरठ प्रांत में संघ के स्वयंसेवकों द्वारा 1,12,943 राशन किट और 19,74,381 भोजन पैकेट का वितरण किया गया।
लाकडाउन में 1,28,652 मास्क 10,100 पैकेट काढ़ा और 48,665 लीटर सेनेटाइजन का वितरण संघ द्वारा किया गया।
4,132 घुमंतू जातियों के परिवारों को भी संघ के स्वयंसेवकों ने सहायता पहुंचाई।
663 यूनिट रक्तदान भी संघ के स्वयंसेवकों ने किया।
​दिल्ली से आए 2,24,310 प्रवासी मजदूरों को स्वयंसेवकों ने सहायता पहुंचाई।
इस पूरे सेवाकार्य में 6,703 स्वयंसेवक लगे।
कोरोना काल में बहुत सारे लोगों ने नौकरी काम-धंधे बंद हो जाने के कारणब हुत आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ा है। ऐसे कठिन समय में उनको इस कष्ट से बाहर निकालने के लिए स्वरोजगार हेतु कौशल विकास का एक प्रयास किया गया।
ब्रज प्रांत
आगरा में 08 नवंबर को रोजगार प्रोत्साहन मेले का आयोजन किया गया।
यह मेला युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से लगाया गया था। मेले में बड़ी संख्या में उद्यमी, स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाली इकाइयां, बैंक के अधिकारी व अपना उद्यम शुरू करने के इच्छुक युवक आये थे।
मेले का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक सूर्य प्रकाश टोंक ने किया। इस मौके पर प्रांत प्रचारक हरीश जी व क्षेत्र सेवा प्रमुख गंगाराम जी और रोजगार भारती संरक्षक पूरन डाबर उपस्थित रहे। रोजगार प्रोत्साहन मेले में रोजगार के इच्छुक 1200 से अधिक युवक युवतियों ने पंजीकरण कराया।
इस दौरान 15 वर्षीय बालिका गार्गी का सम्मान किया गया। गार्गी ने मोम के दीपक बनाना प्रारंभ किया। एक सप्ताह में 30 हजार से अधिक दीपक बिक गए। गार्गी अपने काम में 20 महिलाओं को रोजगार दे रही है।
कार्यक्रम में 40 से अधिक महिला उद्यमियों का सम्मान किया गया।
उत्तरांचल प्रांत :
उत्तराखंड में संघ द्वारा 11,67,555 भोजन के पैकेट और 68,055 परिवारों को राशन किट का वितरण किया गया।
कोरोना से बचाव के लिए 1,09,252 मास्क वितरण ओर 15,466 लीटर सेनेटाइजर का छिड़काव किया गया।
उत्तराखंड के स्वयंसेवकों ने 422 यूनिट रक्तदान किया।
संपूर्ण सहायता कार्य में 4,226 स्वयंसेवक लगे।
जानकारी हो कि प्रतिवर्ष होने वाली कार्यकारी मंडल की बैठक इस बार राष्ट्रीय स्तर पर न होकर क्षेत्र स्तर पर हो रही है।