संजय की ‘दिव्यदृष्टि’

    दिनांक 19-नवंबर-2020   
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लक्ष्मीपति साड़ी’ के मालिक संजय सरावगी को मानो ‘दिव्यदृष्टि’ मिली और उन्होंने ऐसी रणनीति अपनाई कि महामारी के दौरान भी उनकी फैक्ट्री चलती रही। अब तो वे ‘लॉकडाउन’ से पहले वाली स्थिति में पहुंचने वाले हैं
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संजय सरावगी (50 वर्ष)
कंपनी: लक्ष्मीपति साड़ी
वार्षिक कारोबार: 600 करोड़ रु.
चुनौती: कामगारों का हित और बैंक कर्ज चुकाना।  
रणनीति: हालत की गंभीरता को देखते हुए नियमित कार्य बंद कर पीपीई किट
का निर्माण शुरू किया। इससे फैक्ट्री चलती रही और कामगारों को भी काम मिलता रहा। 

भारत के साड़ी उद्योग जगत में ‘लक्ष्मीपति साड़ी’ का बहुत बड़ा नाम है। यह कंपनी देश में सबसे अधिक साड़ियों का निर्माण करती है। इसका उत्पादन संयंत्र सूरत में है। ‘लॉकडाउन’ से पहले तक इस कंपनी में 6,500 कारीगर और मजदूर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम करते थे और प्रतिदिन 2,00,000 मीटर कपड़े से साड़ियां बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी। अचानक सब कुछ बंद हो जाने के बाद कंपनी के मालिक संजय सरावगी के सामने तीन बड़ी समस्याएं थीं— पहली, कामगारों को संभालना। दूसरी, बैंक का कर्ज चुकाना। तीसरी, मशीनों को चालू रखना, क्योंकि इन्हें दुबारा चलाना बहुत ही महंगा पड़ता है। उस समय देश में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई किट) बहुत ही कम बन रही थीं।


इसे उन्होंने अपने लिए अवसर माना और एक हफ्ते के अंदर कुछ विशेषज्ञों की देखरेख में पीपीई किट का उत्पादन शुरू कर दिया। देखते ही देखते उनकी फैक्ट्री में प्रतिदिन 5,000 से अधिक पीपीई किट तैयार होने लगीं। पर जितनी पीपीई किट बनती थीं उससे ज्यादा मांग आ रही थी। इसलिए अतिरिक्त कामगारों को लगाकर दिन-रात काम शुरू किया गया। इसके साथ ही उन्होंने ‘बॉडी कवर’ का उत्पादन भी शुरू किया। इसका उपयोग महामारी के कारण मरने वाले लोगों के शवों को ढकने के लिए किया जाता है। इस ‘कवर’ के अंदर रहे शव से विषाणु के फैलने का डर नहीं रहता। संजय सरावगी कहते हैं, ‘‘पीपीई किट बनाने के दो उद्देश्य थे—एक, उस समय देश को इसकी बहुत जरूरत थी। इसलिए मन में आया कि देश के लिए कुछ करना चाहिए।

दूसरा, अपने कामगारों को काम देना। फैक्ट्री बंद होने की अवस्था में 6,500 लोगों को वेतन देना आसान नहीं था। पीपीई किट और ‘बॉडी कवर’ बनाने से मशीनें बंद नहीं हुर्इं और कामगार भी बेरोजगार नहीं हुए।’’

संजय को पूरा भरोसा है कि उनकी कंपनी जल्दी ही मार्च से पहले वाली स्थिति में पहुंच जाएगी।