किसान आन्दोलन के बहाने कांग्रेस के नेता पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर माहौल भड़काने की कर रहे कोशिश

    दिनांक 27-नवंबर-2020   
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किसानों के बहाने कांग्रेस अपनी राजनीति करने में लग गई है। एक ओर जहां यूथ कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से 2018 की तस्वीरें हाल के प्रदर्शन से जोड़कर शेयर की गई हैं तो वहीं कई कांग्रेस के नेता पुरानी तस्वीरों की आड़ लेकर माहौल भड़काने की कोशिश कर रहे
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नए कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ पंजाब-हरियाणा के किसान ‘दिल्ली मार्च’ निकाल रहे हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन के लिए हजारों की संख्या में किसान पंजाब और हरियाणा से निकल चुके हैं। इस सबको देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से कहा कि सरकार मतभेदों को सुलझाने के लिए किसानों से वार्ता के लिए तैयार है और यह वार्ता तीन दिसंबर को होगी। उन्होंने कहा कि संसद में पारित नए कृषि कानून समय की जरूरत थे और आने वाले समय में ये क्रान्तिकारी बदलाव लाएंगे। छोटे किसानों के लाभ और उनकी आय बढ़ाने के लिए 10 हजार नए किसान उत्पादन संघों की स्थापना की जा रही है।

सीमाओं पर तैनात पुलिस बल
कोरोना संक्रमण को देखते हुए किसानों को दिल्ली बॉर्डर पर ही रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है तो वहीं कई जगहों पर सीआरपीएफ की भी तैनाती की गई है। साथ ही हरियाणा—दिल्ली बॉर्डर पर कड़ी जांच चल रही है। लेकिन इस बीच किसान आंदोलन के बहाने कांग्रेस पार्टी और उनके नेता सोशल मीडिया पर पुराने प्रदर्शन की तस्वीरें पोस्ट करके माहौल भड़काने की कोशिश में जुट गए हैं।
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पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर बिगाड़ रहे माहौल
किसानों के बहाने कांग्रेस अपनी राजनीति करने में लग गई है। इसी क्रम में यूथ कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से 2018 की तस्वीरें हाल के प्रदर्शन से जोड़कर शेयर की गई हैं। वहीं कांग्रेस नेता और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने भी ट्विटर पर पुराने प्रदर्शन की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा है, “ये मेरे प्यारे देश की तस्वीर नहीं है, हरियाणा की सरहद है, ये कश्मीर नहीं है। रोकेगा भला कौन किसानों को आने से, दिल्ली किसी के बाप की जागीर नहीं है।” इमरान प्रतापगढ़ी के ट्विट से साफ होता है कि वह अपने सियासी फायदे के लिए पुरानी तस्वीर शेयर करके प्रदर्शन को और भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी तरह कांग्रेस नेता अर्चना डालमिया ने भी फर्जी तस्वीरें शेयर करते हुये लिखा है, “क्या किसान/ अन्नदाता की उपज पर सारा देश निर्भर नहीं ? सरकार गरीब किसान की आवाज़ दबाना चाहती है, इस गंदे कोविड के माहौल में किसान दिल्ली चलो, मत सताओ किसान को। ये एक किसान आंदोलन की शुरुआत है। इतना ही नहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी फर्जी तस्वीर शेयर करते हुये माहौल को भड़काने की कोशिश की है। एक अन्य कांग्रेस के नेता सरल पटेल ने भी फर्जी तस्वीरें शेयर की हैं। मजे की बात यह है कि सरल पटेल खुद कांग्रेस के सोशल मीडिया टीम का हिस्सा हैं। लेकिन उसके बावजूद भ्रामक तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।
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पड़ताल में पाया तस्वीरें है फर्जी
जिन तस्वीरों को शेयर किया गया है उनमें पीले रंग के बैरिकेड से रास्ता रोककर किसानों पर वॉटर कैनन की पानी की बौछार मारे जाने की तस्वीरें साल, 2018 में हुए किसान प्रदर्शन की है। करीब 1 दर्जन से ज्यादा कांग्रेसी नेताओं ने इस पुरानी फोटो को शेयर किया है। 2 अक्टूबर,2018 को एक अंग्रेजी समाचार पत्र के आर्टिकल में बताया गया कि उत्तर प्रदेश-दिल्ली सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसी तरह एक प्रमुख समाचार चैनल ने भी 2 अक्टूबर, 2018 के अपने लेख में किसानों पर पुलिस द्वारा वॉटर कैनन के इस्तेमाल की इस तस्वीर को लगाया था और इसे दिल्ली में हुए किसान क्रांति पदयात्रा का बताया था।