पाकिस्तान: भय छिपाने को इमरान खान को नोबेल देने की मांग की गई थी

    दिनांक 03-नवंबर-2020
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पुलवामा हमले के बाद जब भारत ने एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान को बता दिया था​ कि यदि अब हरकत की तो फनाह हो जाओगे। विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने के बाद भय से इमरान खान और उनके सेना प्रमुख की टांगें कांप रही थीं

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भारत के आक्रमण के भय से कांपते पाकिस्तान ने विंग कमांडर अभिनंदन को सौंपने से पहले कम नौटंकी नहीं की थी। इमरान खान को ‘शांति दूत’ बनाकर पेश किया गया। भारतीय वायु सेना का लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर पाकिस्तानी सीमा में उतरे विंग कमांडर अभिनंदन को सौंपने से पहले दुनिया को दिखाया गया कि उन्होंने जेनेवा कन्वेंशन का पालन किया। हिरासत में विंग कमांडर अभिनंदन का सेवा सत्कार किया गया। उन्हें यातना दिए बगैर भारत को सौंप दिया गया।
इससे पहले एक वीडियो जारी किया गया। हालांकि उस वीडियो में दर्जन भर से ज्यादा कट थे। यानी उनका यह वीडियो बनावटी था। इस बीच सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-पाकिस्तान के आईटी सेल ने उन्हें ‘शांति दूत’ साबित करने के लिए अभियान चलाया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी इमरान खान को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने को पाकिस्तानी संसद में प्रस्ताव लेकर आए। अपने मुल्क के सामने ऐसा जाहिर किया , मानो इमरान ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने और शांति बहाली की महत्वपूर्ण पहल की है। इमरान खान को लेकर आनलाइन कैंपेन चलाया गया। इस पर तीन लाख लोगों ने हस्ताक्षर किए।
जाहिर है इमरान सरकार, उनके मंत्री और उनकी पार्टी ने इतनी नौटंकी इसलिए की कि यदि पाकिस्तानी अवाम पर भारत के हमले का भय जाहिर हो जाए तो वे दबाव में न आएं। ऐसा होने पर मुल्क में अफ़रा-तफ़री फैल सकती थी, जिसे संभाल पाना इमरान खान जैसे नौसिखया प्रधानमंत्री के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
उल्लेखनीय है पिछले वर्ष की शुरुआत में पुलवामा पर आतंकी हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। अगले दिन पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। तब भारतीय पायलट अभिनंदन मिग-21 उड़ा रहे थे। उन्होंने पाकिस्तानी विमान एफ-16 को मार गिराया। उसके बाद उनका मिग-21 क्रैश हो गया। उन्हें पैराशूट से पाकिस्तान की सीमा में उतरने को मजबूर होना पड़ा, जहां स्थानीय पाकिस्तानियों ने पकड़ लिया। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत लिया था। करीब 60 घंटे बाद उन्हें रिहा किया गया। इस बीच उनकी रिहाई को लेकर भारत में पुरजोर आवाजें उठ रही थीं। पाकिस्तान को यह अंदाजा था कि उसकी एक गलत हरकत से वह मुश्किल में आ सकता है। भारत हर स्थिति में युद्ध के लिए तैयार था।