अर्णब की गिरफ्तारी पर बोले अमित शाह, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया

    दिनांक 04-नवंबर-2020
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‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक एवं एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके गठबंधन साथियों ने एक बार फिर से लोकतंत्र को शर्मसार किया है

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‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक एवं एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके गठबंधन साथियों ने एक बार फिर से लोकतंत्र को शर्मसार किया है।
उन्होंने इस घटना पर एक ट्वीट करते हुए लिखा कि 'कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया है। रिपब्लिक टीवी और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ राज्य की शक्तियों का प्रयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। इससे हमें इमरजेंसी के दिनों की याद आती है। आजाद प्रेस पर इस हमले का विरोध होना चाहिए और होगा।'
इसके पहले केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इसका विरोध किया था। उन्होंने एक ट्वीट कर कहा, 'हम महाराष्ट्र में प्रेस की स्वतंत्रता पर हुए इस हमले की आलोचना करते हैं। प्रेस के साथ बर्ताव करने का यह कोई तरीका नहीं है। इससे हमें इमरजेंसी के दिनों की याद आ रही है, जब प्रेस से ऐसा बर्ताव किया जाता था।'
बता दें कि अर्णब की गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस ने बताया कि रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने की मेरे साथ अभद्रता
पुलिस बैन में बैठते समय अर्णब गोस्वामी ने अपने रिपोर्टर को बताया कि न केवल पुलिस ने उनके साथ मारपीट की बल्कि दुर्व्यवहार किया। इस दौरान पुलिस ने उनके बेटे को भी पीटा। मुंबई पुलिस ने उन्हें उनके परिवार तक से नहीं मिलने दिया। उन्हें उनके सास-ससुर से भी बात नहीं करने दी गई। चैनल का कहना है कि अर्णब के घर पहुंची पुलिस टीम के पास कोई समन, दस्तावेज या कोर्ट के पेपर तक नहीं थे।
चारों तरफ हो रही महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की आलोचना
एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी की चौतरफा निंदा हो रही है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन को निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रजातंत्र में इससे खराब दिन कुछ नहीं हो सकता। वरिष्ठ पत्रकार से ऐसा अमानवीय व्यवहार करने की कड़ी से कड़ी भाषा में निंदा करना भी कम है। ये राजनीतिक उद्देश्य से किया गया काम है, हम इसकी निंदा करते हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर कहा, 'स्वतंत्र प्रेस के लोग अगर आज अर्णब के समर्थन में खड़े नहीं होते हैं, तो आप रणनीतिक रूप से फासीवाद के समर्थन में हैं। आप भले ही उन्हें पसंद नहीं करते हों, आप उनको चाहे मान्यता नहीं देते हों, भले ही आप उनकी उपस्थिति को नजर अंदाज करते हों लेकिन अगर आप चुप रहे तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगर अगले शिकार आप होंगे, तो फिर कौन बोलेगा ?'
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी उद्धव सरकार पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने महाराष्ट्र की सरकार को ‘सोनिया सेना’ करार देते हुए कहा कि उनसे पहले तो कितने ही बलिदानियों के गले काटे गए और उन्हें लटका दिया गया, सिर्फ फ्री स्पीच के लिए। उन्होंने कहा, “एक आवाज़ बंद करेंगे तो कई आवाज़ें उठ जाएंगी। कितनी आवाजों को बंद करेंगे आप ?” कंगना ने पूछा कि आपको कोई पेंगुइन, पप्पू सेना या सोनिया सेना कहता है तो गुस्सा क्यों आता है ? आप ये सब हो, तभी कोई कहता है।
तो वहीं इस मसले पर दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि यह मीडिया की आज़ादी कुचलने की कोशिश है। इसलिए ‘लोकतंत्र की हत्या’ के खिलाफ किसी को भी चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने इसे मीडिया का गला दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि पुलिस एक पत्रकार के घर में घुसकर उनके घर को गाड़ियों से घेर कर दिखाना क्या चाहती है ? उन्होंने पूछा कि अर्णब गोस्वामी की गलती क्या है, सवाल उठाना गलती है या फिर सच्चाई दिखाना गलती ?
जानें क्या था मामला
दरअसल मामला 2018 का है, जब एक 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक ने मई, 2018 में अलीबाग में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद
एक सुसाइड नोट मिला था, जो कथित तौर पर अन्वय द्वारा लिखा गया था। इस सुसाइड नोट में उन्होंने कहा था कि अर्णब गोस्वामी और दो अन्य ने उन्हें 5.40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया, जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा।