पाकिस्तान : सिंध के हिंदुओं को पहले बाढ़ ने तबाह किया, अब डेंगू आया बनकर आफत

    दिनांक 09-नवंबर-2020   
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पाकिस्तान के हिंदू जनसंख्या वाले प्रदेश सिंध में बाढ़ के बाद अब डेंगू ने कोहराम मचा रखा है। बाढ़ नियंत्रण में सरकारी कोताहियों से जहां अरबों रुपये की फसलें बर्बाद हो गईं, वहीं डेंगू प्रांत के लोगों की जान के लिए आफत बनकर आया। इसमें सर्वाधिक प्रभावित सिंध के हिंदू हैं

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पाकिस्तान के हिंदू जनसंख्या वाले प्रदेश सिंध में बाढ़ के बाद अब डेंगू ने कोहराम मचा रखा है। बाढ़ नियंत्रण में सरकारी कोताहियों से जहां अरबों रुपये की फसलें बर्बाद हो गईं, वहीं डेंगू प्रांत के लोगों की जान के लिए आफत बनकर आया। इसे सर्वाधिक प्रभावित सिंध के हिंदू हैं
सिंध वासियों के लिए ये समस्याएं कोई नई नहीं। प्रत्येक वर्ष सूबे में बाढ़ आती है और अरबों रुपये की फसलें बहा ले जाती है। साथ छोड़ जाती है जीवन को खतरा पहुंचाने वाले हालात। पाकिस्तान में बाढ़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की दशा इतनी खराब है कि नदियों के बेकाबू जल पर काबू पाना तो दूर, जल निकासी का भी माकूल प्रबंध नहीं। परिणाम स्वरूप सिंध में प्रत्येक बाढ़ में भारी मात्रा में फसलें बर्बाद होती हैं और बड़ी संख्या में लोग जलजनित बीमारियों का शिकार होते हैं। उनमें से कई को जान भी गंवानी पड़ती है।
सिंध में बसे अधिकांश हिंदू खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं। मगर प्रत्येक वर्ष साल भर इकट्ठा उनकी जमा-पूंजी बाढ़ से तबाह हो जाती है। जो हिंदू बाढ़ में तबाह नहीं होते, उन्हें सूखा झेलना पड़ता है। थारपारकर, घोटकी जैसे जिलों में यह दृश्य आम है।
पाकिस्तान का सिंध इलाक़ा काॅटन एवं मिर्च की खेती के लिए जाना जाता है। इस दफा भी बाढ़ के कारण दोनों फसलें बर्बाद हो गईं। सिंध में 2009-10 में 4.2 मिलियन रुपये मूल्य का काॅटन का उत्पादन हुआ था। बाढ़ में तबाही के चलते तब से इसकी पैदावार में नियमित गिरावट आ रही है। पाकिस्तान सरकार के आंकड़े के अनुसार, पिछले एक दशक में 40 फीसदी से अधिक की काॅटन के उत्पादन में गिरावट आई है। 2020-21 में पांच मिलियन रुपये के काॅटन उत्पादन को नुकसान पहुंचने का अनुमान है। इस बार बाढ़ ने 1.128 मिलियन एकड़ में तबाही मचाई।
यह था बाढ़ के कारण सिंध के लोगों को पहुंचने वाले आर्थिक नुकसान का हाल। प्रत्येक वर्ष इस प्राकृतिक आफत से सिंध वासियों के जान पर भी खतरा बढ़ जाता है। बाढ़ ने इस बार 151 लोगों को लील लिया, जिसमें 49 महिलाएं व 23 बच्चे हैं। यही नहीं जल निकासी का ठोस प्रबंध नहीं होने के कारण पिछले आठ महीने में 733 लोग डेंगू की चपेट में आए। बाकी अन्य रोगों की चपेट में आने वालों के आंकड़े अलग हैं। एक आंकड़े के अनुसार 2005 से 2020 तक यानी पिछले 15 वर्षों में केवल सिंध में डेंगू के 49,322 मामले दर्ज किए, जिनमें से 275 लोगों की मौत हो गई। केवल 2019 में 46 लोगों की मृत्यु डेंगू से हुई। इस साल अब तक सिंध के सबसे बड़े शहर कराची में 677 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। पाकिस्तान के सिंध में मलेरिया एवं पोलियो की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। इस प्रांत का 81 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है।