रिकार्ड समय में132 करोड़ रूपये की लागत से बना कैलाश मानसरोवर भवन

    दिनांक 14-दिसंबर-2020   
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कैलाश मानसरोवर की यात्रा अत्यंत कठिन और दुर्गम है. यात्रियों को काफी लम्बी यात्रा करनी पड़ती है. इस बात को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने गाज़ियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन बनाने का निर्णय लिया. जहां पर भूमि चिन्हित की गई थी. उस भूमि को विवादित बना कर अड़ंगा लगाया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर मात्र चौबीस घंटे के अन्दर भूमि ढूंढ ली गई, शिलान्यास हुआ. मात्र दो साल के अन्दर भवन  बन कर तैयार हो गया.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार की शाम इंदिरापुरम के शक्ति खंड में 132 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कैलाश मानसरोवर भवन का लोकार्पण किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “मौसम खराब होने के कारण कहा जा रहा था कि आज हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पायेगा.  कैलाश मानसरोवर भवन के लोकार्पण कार्यक्रम के स्थगित होने की बात कही जा रही थी लेकिन मैंने कहा कि मेरी डिक्शनरी में ना शब्द नहीं है. मैं जाऊंगा और लोकार्पण करुंगा. इसके बाद सड़क मार्ग से मैं यहां पहुंचा.  कैलाश मानसरोवर यात्रा भवन के निर्माण में लगातार रोड़े अटकाये गये जबकि हज हाऊस का निर्माण कानून को ताक पर रखकर एवं एनजीटी के नियमों को दरकिनार करके किया गया था. हम कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण में हज हाऊस जैसी स्थिति नहीं होने देना चाहते थे. लोगों को चिढ़ है कि यूपी में सभी काम क्यों हो रहे हैं ? विकास क्यों हो रहा है ? जबकि सदियों से जो काम नहीं हुए उन्हें होता देख कर देश प्रफुल्लित है.

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धमार्थ कार्य विभाग के महानिदेशालय का गठन किया गया है. यह तीर्थों , मंदिरों एवं पर्यटन के लिए कार्य करेगा. हम आस्था के सम्मान के साथ रोजगार के बड़े अवसर भी बनाते हैं. प्रयाग का कुंभ अव्यवस्थाओं के लिए जाना जाता था. मगर 2019 के कुंभ में 24 करोड़ लोग प्रयागराज पहुंचे. पूरे विश्व में इसकी सराहना हुई. भारत आस्था का देश है लेकिन आस्था एवं अखंडता को खंडित करने के लिए दंगे व अराजकता फैलाने वाले एक नये स्वरूप में प्रयास कर रहे हैं. अराजकता, अव्यवस्था एवं देश की अखंडता को खंडित करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती. जो कानून को चुनौती देगा वह कैसी यात्रा पर जाना चाहता है तय कर ले.

 

वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैलाश मानसरोवर भवन का शिलान्यास करते हुए कहा था कि "जहां पर पहले जमीन देखी गई थी. उसे विवादित बना दिया गया. इस इरादे से ताकि कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण कार्य में बाधा आ जाय. इस दौरान  गाजियाबाद के विधायक सुनील शर्मा मुझे लगातार याद दिलाते रहे कि कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कार्य शुरू कराना है. मैंने निश्चय किया था कि कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण इसी जनपद में किया जाएगा. जिस भूमि को विवादित कर दिया गया था. वहीं से थोड़ी दूर पर यह जमीन दिखी. सरकार ने सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है. निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है. दो वर्ष में भवन बन कर तैयार हो जाएगा. इस भवन में कैलाश मानसरोवर के तीर्थ यात्रियों के ठहरने की उत्तम व्यवस्था की जायेगी. कैलाश मानसरोवर भवन, देश में सांस्कृतिक समरसता और प्राचीन परंपराओं को सहजने की मिसाल पेश करेगा.”

 

यहां पर उल्लेखनीय है कि पहले कैलाश मानसरोवर भवन गाजियाबाद जनपद के अर्थला में प्रस्तावित था. मगर भूमि को लेकर विवाद हो गया था. विवाद के बाद कैलाश मानसरोवर भवन को कहीं दूसरी जगह बनाने का निर्णय लिया गया. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक दिन के अंदर ही इंदिरापुरम इलाके में जमीन खोज निकाली. इंदिरापुरम की इस भूमि का भू-उपयोग राजस्व रिकार्ड में क्लब और अस्पताल के लिए दर्ज था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना को देखते हुए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए इसका भू-उपयोग परिवर्तित किया. उसके बाद इस भूमि पर कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सका.

 

कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा किया गया.  कैलाश मानसरोवर एवं अन्य धार्मिक स्थल के श्रद्धालुओं को इस भवन में ठहरने की सुविधा प्राप्त हो सकेगी.   कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण के लिए 50 करोड़ 40 लाख रूपये, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को देकर भूमि खरीदी गई थी. भवन के निर्माण पर 57 करोड़ 99 लाख रूपये की लागत आई. इस प्रकार कुल 110 करोड़ रूपये की लागत से यह भवन श्रद्धालुओं  के लिए बन कर लगभग तैयार है.  बीते 26 दिसंबर 2019 को धर्मार्थ कार्य एवं पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने भवन का निरीक्षण किया था मगर मार्च 2020 में कोरोना के कारण कार्य थोड़ा धीमा पड़ गया था.

 

कैलाश मानसरोवर भवन के दो तलों को शुरू किया गया.  इसमें 280 श्रद्धालू एक साथ ठहर सकेंगे. सभी कमरे पूर्णतः वातानुकूलित हैं. इसके साथ ही योग कक्ष और ध्यान कक्ष भी बनाया गया है.  संगोष्ठी और समारोह के लिए आडिटोरियम बनाया गया है. डायनिंग हाल, वाटिका और पार्किंग भी बनाई गई है. इसी परिसर के भीतर बिजली का सब स्टेशन भी बनेगा. आगे चलकर इसमें  500 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की जायेगी