अफजाल ने सोनू बनकर हिन्दू लड़की को घर से भगाया

    दिनांक 16-दिसंबर-2020   
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उत्तर प्रदेश  के बिजनौर जनपद में 'लव जिहाद' के मामले में एफआईआर दर्ज की गई.  अफजाल ने हिन्दू लड़की को अपना नाम सोनू बताया था. वह चंडीगढ़ में उससे मिला था. उसके बाद उसने प्रेम जाल में फंसा लिया.
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उत्तर प्रदेश  के बिजनौर जनपद में 'लव जिहाद' के मामले में एफआईआर दर्ज की गई.  अफजाल ने हिन्दू लड़की को अपना नाम सोनू बताया था. वह चंडीगढ़ में उससे मिला था. उसके बाद उसने प्रेम जाल में फंसा लिया. हिन्दू लड़की का परिवार गत दस वर्षों से चंडीगढ़ में रहकर मेहनत- मजदूरी का काम करता है. गत 7 नवंबर को जब लड़की का परिवार एक शादी में शामिल होने के लिए बिजनौर आया था तब अफज़ल भी बिजनौर पहुंच गया और लड़की को भगा ले गया. एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस अफजाल की तलाश कर रही है.  उल्लेखनीय है कि ‘लव जिहाद’ के मामले आये दिन घटित हो रहे है.  गत 5 दिसंबर को थाना वजीरगंज में पीड़िता ने सैजी अब्बास, उसके पिता मोहम्मद अशफाक एवं अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. सैजी अब्बास ने पहले अपना नाम मनोज बताया था.

कुछ दिन बाद उसने बताया कि उसका नाम अर्जुन है. सैजी अब्बास ने खुद को हिन्दू बताकर पीड़िता को अपने प्रेम जाल में फंसाया. काफी दिनों तक वह अर्जुन नाम बताकर ही मिलता था. जब उसे कोई फोन करता तो उधर से ‘सलाम’ करता था. पीड़िता ने जब उससे पूछा कि लोग सलाम क्यों करते हैं तब उसने कहा कि टेंट के व्यवसाय में हर तरह के लोग फोन करते हैं. इन सब बात पर ध्यान मत दिया करो. मगर बाद में पीड़िता को पता चला कि अर्जुन नाम बता कर शादी करने वाला व्यक्ति मुसलमान है. इसी बीच सैजी ने दूसरा निकाह भी कर लिया. जब पीड़िता ने उसके घर वालों को फोन किया तो उन लोगों ने कहा कि दोबारा फोन मत करना. पीड़िता सीतापुर जनपद की रहने वाली है. उसके पति की मृत्यु हो चुकी है. वह अपने 8 साल के बेटे को लेकर किराए के मकान में रहती है और अपने जीवन यापन के लिए आसपास के घरों में काम करती है. वर्ष 2014 में वजीरगंज के गोलागंज में सैजी अब्बास से उसका संपर्क हुआ. सैजी अब्बास ने कई दिन तक उसका पीछा किया. जान – पहचान बढ़ा लेने के बाद उसने शादी कर ली। इस दौरान पीड़िता दो बार गर्भवती भी हुई मगर उसने गर्भपात करवा दिया.


उत्तर प्रदेश में यह कृत्य गैर कानूनी है. उत्तर प्रदेश सरकार में लव जिहाद के खिलाफ कानून लागू होने के बाद किसी कपटपूर्ण माध्यम द्वारा एक धर्म से दूसरे मजहब में ‘कन्वर्जन’ कराए जाने को एक संज्ञेय अपराध माना गया है. यह अपराध गैर जमानती प्रकृति का है. अध्यादेश के अनुसार धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर विहित प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को 2 माह पूर्व सूचना देनी होगी. इसका उल्लंघन किये जाने पर 6 माह से 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माने की राशि 10,000 रुपए होगी. अभियोग दर्ज होने पर प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचारणीय होगा. उपबन्धों का उल्लंघन करने हेतु कम से कम 01 वर्ष अधिकतम 05 वर्ष की सजा जुर्माने की राशि 15,000 रुपए से कम नहीं होगी. अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के सम्बन्ध में धारा-3 के उल्लंघन पर कारावास कम से कम 3 वर्ष अधिकतम 10 वर्ष तक का होगा और जुर्माने की राशि 25,000 रुपए से कम नहीं होगी। सामूहिक धर्म परिवर्तन के सम्बन्ध में कारावास न्यूनतम 3 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक हो सकेगा और जुर्माने की राशि 50,000 रुपए से कम नहीं होगी.

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