यहां क्रेता और विक्रेता दोनों फायदे में!

    दिनांक 02-दिसंबर-2020
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

क्लाउड कम्प्यूटिंग एक ऐसी व्यवस्था है, जहां उपभोक्ता को ढांचागत खर्च करने की जरूरत नहीं होती, वहीं क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियों की भी नियमित कमाई होती है। खास बात यह है कि जरूरत के अनुसार इस सेवा का उपयोग किया जा सकता है।  इसके अलावा, क्लाउड पर रखे जाने वाले डाटा भी निजी स्तर पर रखे जाने वाले डाटा के मुकाबले अधिक सुरक्षित होते हैं
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ऐसे कम क्षेत्र होते हैं, जहां ग्राहक भी लाभ की स्थिति में हो और विक्रेता भी। क्लाउड कंप्यूटिंग में ऐसा ही है। मान लीजिए कि आपकी कंपनी एक-दो महीने के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का काम करना चाहती है तो आपको माइक्रोसॉफ्ट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए। हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटाबेस, एपीआई, डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म आदि पर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप ‘माइक्रोसॉफ्ट एज्योर’ नामक क्लाउड सेवा पर जाकर ‘प्लेटफॉर्म एज ए सर्विस’ (पीएएएस) को सबस्क्राइब कर सकते हैं और मासिक आधार पर भुगतान कर सकते हैं। आवश्यकता समाप्त होते ही आप इसे बंद कर दीजिए। बहुत संभव है कि आपका काम 10-15 प्रतिशत खर्च में ही बन जाए। दूसरी तरफ, माइक्रोसॉफ्ट को नए ग्राहक मिलते हैं और उसकी नियमित कमाई होती रहती है। आपको पता होगा कि क्लाउड कंप्यूटिंग से आशय इंटरनेट के जरिए उपलब्ध कराई जाने वाली कंप्यूटिंग सेवाओं से है, जैसे कि कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, प्लेटफॉर्म आदि जिन्हें आप दूरस्थ आधार पर (रिमोटली) इस्तेमाल कर सकते हैं।
अमेजॉन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेफ बेजोस ने चंद शब्दों में इस बदलाव का मर्म समझा दिया है। उन्होंने कहा है कि बिजली का इस्तेमाल करने के लिए आपको अपना बिजलीघर लगाने की जरूरत नहीं है। फिर कंप्यूटिंग के लिए कंप्यूटर संसाधन खरीदने की जरूरत क्यों होनी चाहिए? बिजली के लिए आप उतनी ही अवधि का बिल देते हैं, जितनी अवधि के लिए आपने उसका प्रयोग किया। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन और गूगल के क्लाउड पर सेवाओं का इस्तेमाल प्रति सेकंड की दर से भी किया जा सकता है। आप इच्छानुसार उन्हें स्विच आॅन या स्विच आॅफ कर सकते हैं।

क्लाउड सबके लिए फायदेमंद 
क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं के जरिए आप हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, कर्मचारियों आदि पर खर्च को काफी सीमित कर सकते हैं, खासकर शुरुआती दौर में। शुरुआत में धन के साथ समय, श्रम और मानव संसाधन की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर, क्लाउड सेवाएं लेने के साथ ही उनका प्रयोग शुरू किया जा सकता है। यानी आपको सॉफ्टवेयर अपडेट इन्स्टॉल करने, बेकार की फाइलों को हटाने, कम्प्यूटर के स्वास्थ्य की स्थिति जांचने आदि की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि ऐसे सभी काम क्लाउड पर स्वत: हो रहे होते हैं। कारोबार के प्रारंभ में यदि आपकी आवश्यकताएं सीमित हैं तो संसाधनों का भी सीमित प्रयोग करें। जब आपकी आवश्यकताएं बढ़ जाएं तो अपनी मर्जी के अनुसार संसाधन भी बढ़ा लें। अगर मांग या जरूरत घट गई, तो अपने क्लाउड संसाधनों को फिर से सीमित कर लें। चाभी तो आपके हाथ में ही है। आवश्यकतानुसार उपयोग के आधार पर अधिकांश क्लाउड सेवाओं का भुगतान किया जा सकता है। इसके कई मॉडल हो सकते हैं। इनमें एक मॉडल समय आधारित है यानी आपने उस सेवा का उपयोग कितने घंटे के लिए किया। दूसरा मॉडल खपत पर आधारित है, जैसे कि आपने कितने गीगाबाइट डाटा का आदान-प्रदान किया।
क्लाउड पर मौजूद डाटा आपके अपने संस्थान में मौजूद डाटा के मुकाबले अधिक सुरक्षित है। इसकी वजह स्पष्ट है। क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियों के सिस्टम हमेशा अपडेट होंगे और ताजातरीन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम होंगे, क्योंकि वे चौबीसों घंटे चल रहे हैं व अधिक कुशल पेशेवरों की निगरानी तथा देखभाल में हैं। स्थानीय कम्प्यूटर प्रणाली में सहेजे जाने पर आपकी सामग्री साइबर हमलों के साथ-साथ आग लगने, चोरी होने, यांत्रिक खराबी जैसी आशंकाओं से मुक्त नहीं होती है, लेकिन अगर वही सामग्री क्लाउड पर रखी गई है तो ऐसी चुनौतियां नहीं के बराबर होती हैं। दरअसल, क्लाउड पर बहुधा आपके डाटा का बैकअप अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है।
रैपिड स्केल नामक संस्था के सर्वे के अनुसार 94 प्रतिशत कारोबारी संस्थानों का मानना है कि क्लाउड का उपयोग करने के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ गई। सामान्यत: आप अपने कार्यालय के सर्वर, हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का प्रयोग वहां जाने के बाद ही कर सकते हैं। लेकिन क्लाउड आधारित संसाधनों का किसी भी स्थान पर इस्तेमाल करना सिद्धांतत: संभव है। इतना ही नहीं, किसी भी समय पर (आॅन डिमांड) और किसी भी उपकरण (डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल) के जरिए आप उनका इस्तेमाल तथा उन्हें प्रबंधित कर सकते हैं। जब आप अपने मोबाइल फोन के जरिए अपने संस्थान के सारे सिस्टम को नियंत्रित करने की स्थिति में आ जाएं तो खुद ही सोचिए कि आपके पास कितनी बड़ी शक्ति आ गई होगी।
चूंकि आपका अधिकांश आधारभूत कप्यूटिंग ढांचा एक केंद्रीय स्थान से संचालित हो रहा है, इसलिए इसमें जटिलता भी कम है। आप अपने क्लाउड सेवा प्रदाता के पोर्टल पर जाते हैं और वहां आसान वेब इंटरफेस का प्रयोग करते हुए अपनी सेवाओं का प्रबंधन कर लेते हैं। किसे हटाना है, किसे बढ़ाना है, किसकी कितनी खपत हो रही है, कहां कौन-सी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां हैं, कौन-सी नई सेवा जोड़ने की जरूरत है; सब कुछ एक ही इंटरफेस से संभव है। क्लाउड के जरिए दी जाने वाली सेवाओं में डाटा भी पैदा होता है और उसका विश्लेषण भी किया जा सकता है। किन संसाधनों का कितना प्रयोग हो रहा है, किस विभाग की कार्यकुशलता कैसी है, कौन से कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं, कहां पर उत्पादकता का स्तर कैसा है आदि आदि। इस विश्लेषण के आधार पर आवश्यक रणनीतियां बनाई जा सकती हैं।
कल्पना कीजिए कि आपके दफ्तर में आग लग जाए, चोरी हो जाए या कोई बड़ा रैंसमवेयर हमला हो जाए तो सारा कामकाज सामान्य स्थिति में लाने में कितने दिन, सप्ताह या महीने लग जाएंगे? लेकिन अगर आप क्लाउड पर हैं तो ऐसी किसी भी आपदा से चंद घंटों के भीतर उबरना संभव है। यहां तक कि अगर क्लाउड सेवा में भी कोई आपदा आ गई है तो उससे भी बाहर निकलने में प्राय: चार-पांच घंटे का समय पर्याप्त होगा। कई बार आपने गूगल या फेसबुक की सेवाओं के आउटेज (ठप होने) के बारे में सुना होगा, लेकिन यह भी देखा होगा कि कुछ ही घंटों में वे फिर से शुरू हो गई हैं।

बात नकारात्मक पहलुओं की
अल्पकालिक क्लाउड सेवाएं सस्ती होती हैं, पर दीर्घकालिक अवधि के लिए लेने पर यह महंगी हो सकती हैं। अनेक समस्याओं के समाधान के लिए आप दूसरी कंपनी पर निर्भर होते हैं जो आपकी दुविधा बढ़ा सकती हंै। अगर आप एक से दूसरे क्लाउड सेवा प्रदाता के पास जाना चाहें तो अपनी सामग्री का परिवहन जटिल और दुष्कर हो सकता है। अगर क्लाउड सेवा प्रदाता अचानक ही किसी सेवा या उत्पाद को बंद करने का फैसला कर ले तो आपके लिए समस्या हो सकती है। इंटरनेट संयोजकता की सीमा भी एक अनिवार्यता है। हालांकि आज के समय में इंटरनेट संयोजकता का उपलब्ध न होना असंभव सी कल्पना बन गई है और अधिकांश कारोबार एकाधिक इंटरनेट संयोजकता का प्रयोग करते हैं।
क्लाउड के संदर्भ में आजकल एक मुद्दा काफी उठता है और वह है अपने डाटा को विदेशों में स्थित डाटा केंद्रों (क्लाउड का ढांचा) में सहेजे जाने का मुद्दा। कुछ साल पहले अमेरिका में इंटरनेट सेवाओं पर रखे गए निजी डाटा तक वहां की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पहुंच स्थापित करने का मामला सामने आया था। तब से सरकारें तथा संस्थान इस बारे में सतर्क हैं कि उनका डाटा उनके ही देश में मौजूद डाटा केंद्रों में सहेजा जाए ताकि वह दूसरे देशों की सरकारों की पहुंच से मुक्त रहे। इन चिंताओं के मद्देनजर अब लगभग सभी प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाता कंपनियां भारत में भी अपने डाटा केंद्र रखती हैं। ‘मेघराज’ नाम से भारत सरकार का अपना राष्ट्रीय क्लाउड है, जिसका प्रबंधन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र करता है।
क्लाउड का ढांचा मूलत: तीन तरह का होता है- पब्लिक, प्राइवेट और हाइब्रिड। पब्लिक क्लाउड के तहत एक ही क्लाउड में मौजूद संसाधनों का प्रयोग अनेक ग्राहक करते हैं। जैसे गूगल क्लाउड, माइक्रोसॉफ्ट एज्योर या अमेजॉन वेब सर्विसेज के एक ही सर्वर का इस्तेमाल दर्जनों ग्राहक कर सकते हैं। प्राइवेट क्लाउड वह होगा, जब उस सर्वर को किसी खास ग्राहक के लिए सुरक्षित कर दिया जाए। तब आपको बेहतर कार्यकुशलता और बेहतर सुरक्षा प्राप्त हो सकेगी। हाइब्रिड से तात्पर्य यह कि आप इन दोनों ही किस्म के क्लाउड की सेवाओं का प्रयोग अपनी आवश्यकतानुसार करते हैं। प्राइवेट क्लाउड सेवाएं महंगी, जबकि पब्लिक क्लाउड सेवाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं। हाइब्रिड मॉडल में आप अपने बजट के आधार पर सेवाओं का चयन कर सकते हैं।
(लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)