इस्लाम अपनाने को मजबूर माकपा की सताई दलित महिला

    दिनांक 02-दिसंबर-2020   
Total Views |
चित्रलेखा नाम की एक दलित महिला आटो-चालक ने एक सनसनीखेज घोषणा करके सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा वंचित समाज के साथ बरते जा रहे भेदभाव की एक बार फिर कलई खोली। चित्रलेखा का माकपा पर उसके साथ जातिगत भेदभाव करने का आरोप
38_1  H x W: 0
चित्रलेखा

गत दिनों के्ररल के कन्नूर जिले में चित्रलेखा नाम की एक दलित महिला आटो-चालक ने एक सनसनीखेज घोषणा करके सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) द्वारा वंचित समाज के साथ बरते जा रहे भेदभाव की एक बार फिर कलई खोल दी। चित्रलेखा ने माकपा सरकार पर उसके साथ जातिगत भेदभाव करने का आरोप लगाया है। राज्य सरकार के बर्ताव से वह इतनी आहत हो चुकी है कि इस्लाम में कन्वर्ट होने का मन बना चुकी है। चित्रलेखा ने यह घोषणा 16 नवंबर को अपनी एक फेसबुक पोस्ट में की थी।

बताते हैं कि चित्रलेखा ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘‘मेरी जाति के कारण मुझे लगातार सत्तारूढ़ माकपा द्वारा निशाना बनाया जा रहा है।’’ उसने लिखा कि उसे अब सरकार या अदालतों से न्याय पाने की उम्मीद नहीं है, इसीलिए वह इस्लाम अपना कर अपनी दलित पहचान से छुटकारा पाने की सोच रही है। उसके अनुसार, वह पिछले 20 साल से माकपा सरकार के जातिगत भेदभाव के खिलाफ अकेले संघर्ष कर रही है और इसे अब और आगे नहीं खींच सकती। उसका कहना है कि वह छद्म सेकुलर पार्टी माकपा के डर के साये में नहीं जीना चाहती’’।

सत्तारूढ़ माकपा ने छीनी आवंटित जमीन

चित्रलेखा ने पहले आरोप लगाया था जातिगत भेदभाव के कारण माकपा कार्यकर्ता उसे काम नहीं करने देते। आरोप है कि माकपा कार्यकर्ताओं ने उसका आटो रिक्शा जला दिया था। बताते हैं कि पूर्र्व संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के कार्यकाल में चित्रलेखा को कन्नमपल्ली, कन्नूर में एक मकान के लिए कुछ जमीन और धन आवंटित किया गया था। किंतु माकपा के नेतृत्व में वाममोर्चे की सरकार बनने के बाद वह भूमि आवंटन रद्द कर दिया गया और उसे मकान बनाने के लिए आवंटित धन देने से मना कर दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में उसने कन्नूर के जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला। इसके अलावा भी अपनी दलित पहचान के कारण चित्रलेखा को माकपा का कोपभाजन होना पड़ा है।