कुशासन के दलदल में दिल्ली

    दिनांक 21-दिसंबर-2020   
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दिल्ली नगर निगम के शिक्षक रहे नितिन तंवर को चार महीने से वेतन नहीं मिला था। इसके बावजूद वह दिल्ली सरकार के निर्देश के अनुसार, घर-घर  कोरोना के मरीजों का सर्वे कर रहे थे। उन्हें इस काम का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था। कोविड संक्रमण के बाद 13 दिसम्बर को वह अस्पताल में भर्ती हुए ,14 दिसम्बर को उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना उस कुशासन की बानगी भर है जो ‘केजरीवाल राज’ में दिल्ली झेल रही है
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दिल्ली सरकार की तरफ से उनके अविभावकों को वेतन न दिये जाने से नाराज  दिल्ली नगर निगम के स्कूली शिक्षकों के बच्चे प्रदर्शन करते हुए।         (फाइल फोटो)

 शिक्षक दिवस बीते तीन माह गुजर चुके हैं। दिल्ली वाले भूले नहीं होंगे जब दिल्ली नगर निगम के शिक्षकों के बच्चों के पोस्टर उस दिन सोशल मीडिया पर वायरल थे जिनमें वे वेतन न मिलने से हो रही समस्याओं के पोस्टर लेकर खड़े थे। पोस्टरों पर लिखा था— ‘‘मेरे पापा को सैलरी दो, उनका हक दो।’’ एक छोटी-सी बच्ची एक पोस्टर में चेहरे पर मास्क लगाए खड़ी और उसके हाथ में पोस्टर था— ‘‘मेरे पापा को सैलरी कब मिलेगी?’’

‘शिक्षक दिवस पर शिक्षक दुखी’ ट्वीटर पर हैश टैग ‘वारयल’ था। इस बात को तीन महीने गुजर गए लेकिन हालात नहीं बदले। नगर निगम के शिक्षकों का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री पंजाब से आकर दिल्ली की सरहद पर इकट्ठे हुए लोगों के बीच  तो नजर आ रहे हैं लेकिन दिल्ली वालों के लिए उनके पास बिल्कुल समय नहीं है। यदि उनके पास दिल्ली वालों के लिए समय होता तो दिल्ली नगर निगम के लिए काम करने वाले हजारों कर्मचारी आज दर—दर की ठोकर न खा रहे होते।

नगर निगम शिक्षक संघ के महासचिव रामनिवास सोलंकी के अनुसार— ‘‘जो शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है, उसका खुद का भविष्य इस समय अंधकारमय है। शिक्षकों का घर उधार पर चल रहा है। यही हाल निगम के अन्य कर्मचारियों का भी है। दुकानदार आगे बिना पैसा लिए राशन देने से मना कर रहे हैं। लोगों को  किराए के मकान में घर से निकाल दिए जाने के नोटिस मिल रहे हैं। उसके बावजूद दिल्ली की सरकार के कान पर जू नहीं रेंग रही है। दिल्ली सरकार जब निगम का पैसा देगी तभी शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन मिल पाएगा।

कर्मचारियों को महीनों से नहीं मिला वेतन
दिल्ली के अंदर इस समय तीन नगर निगम हंै। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अन्तर्गत ही 55,000 कर्मचारी काम करते हैं जिन्हें महीनों से वेतन नहीं मिला। ऐसा पहली बार नहीं हैं। पिछले दिनों निगम के अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टर हड़ताल पर थे उन्हें जून से अक्टूबर तक का वेतन नहीं मिला था। बाद में जब डॉक्टर हड़ताल पर गए और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गर्इं तब जाकर उन्हें वेतन जारी किया गया था।

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इन दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री पंजाब और उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी के विस्तार की योजनाओं में व्यस्त हैं और दिल्ली की जनता मुफ्त पानी और बिजली की खातिर केजरीवाल के चयन पर खुद को कोस रही है।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जय प्रकाश के अनुसार—  ‘‘समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत जितने भी शिक्षक आते हैं, उन सबका अनुबंध तत्काल प्रभाव से लागू हो। इसके लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्री से बात भी हो गई लेकिन इस दिशा में जो सबसे बड़ी समस्या है वह दिल्ली सरकार की तरफ से है क्योंकि समग्र शिक्षा अभियान में 50 प्रतिशत राशि भारत सरकार देती है और शेष 50 प्रतिशत दिल्ली सरकार देती है। पर दिल्ली सरकार अपना हिस्सा देने को तैयार नहीं है।’’

जय प्रकाश आम आदमी पार्टी (आआपा) के उस वादे की याद दिलाते हैं, जिसमें दिल्ली के निगम शिक्षकों को स्थाई करने का वादा किया गया था। जय प्रकाश कहते हैं— ‘‘दिल्ली सरकार जो यह कह कर सत्ता में आई थी कि दिल्ली निगम के जो अनुबंध वाले शिक्षक हैं, उन्हें हम पक्का करेंगे। उन्हें पक्का करना तो दूर, वह उनके अनुबंध भी आगे नहीं बढ़ा रही है। दिल्ली सरकार ने जो अपने अनुबंधित शिक्षक हैं, उन्हें भी बाहर कर रखा है। लेकिन ऐसा चलने वाला नहीं है। अभी स्कूल खुले नहीं हैं।  स्कूल खुल जाने के बाद अनुबंधित शिक्षकों की जरूरत पड़नी ही है क्योंकि जैसा उनका अनुभव है, विषय पर जैसी उनकी पकड़ है, उनकी मदद से हमें स्कूल चलाने में आसानी
होती है।’’

जय प्रकाश भी इस बात को मानते हैं कि दिल्ली की जनता से बड़ी गलती हुई है। अब अगले चार साल तक इस दिल्ली सरकार को झेलना ही होगा।  केजरीवाल सरकार में बरसात जाने के बाद जल भराव की समस्या खत्म करने का अभियान शुरू होता है, जून में डेंगू निकल जाएगा फिर सितम्बर में उनका विज्ञापन आएगा कि गमला खाली कर दिया। दिल्ली वाले भी इस बात को अब जान गए हैं कि दिल्ली सरकार झूठ की सरकार है, भ्रमित करने वाली सरकार है, विज्ञापन से चलने वाली सरकार है।

जब यह रपट लिखी जा रही थी, तीनों निगमों के मेयर दिल्ली के मुख्यमंत्री के दरवाजे पर निगम कर्मचारियों की मांगों के साथ धरना दिए बैठे थे।

उधार लेकर घर चलाने को मजबूर हैं कर्मचारी
उत्तरी नगर निगम के शिक्षक और कर्मचारी आज पैसे—पैसे को मोहताज कर दिया गया है। उन्हें महीनों से सैलरी नहीं दी जा रही है। बोनस रुका हुआ है। शिक्षक संगठनों की मान्यता खत्म कर दी गई है। वेतन ही नहीं, पूर्व कर्मचारियों की पेंशन तक रुकी हुई है। उधार लेकर घर चलाने पर मजबूर कर्मचारियों और शिक्षकों को बैंक तक से कर्ज नहीं मिल रहा। कहा जा रहा है कि आपका क्रेडिट स्कोर खराब है।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दिल्ली की शिक्षा पर वीडियो बनाकर पार्टी के आईटी सेल और पार्टी के पत्रकारों के माध्यम से चर्चा बटोरते रहे हैं। आआपा सरकार से पत्रकारिता से जुड़े कई बड़े संस्थान लाखों रुपए का विज्ञापन ले ही रहे हैं। इसलिए सिसोदिया से कोई यह प्रश्न नहीं पूछता कि दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दिल्ली सरकार की कोई जिम्मेवारी बनती है या नहीं? या दिल्ली की सरकार नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दिल्ली वाला ही मानती नहीं? सिसोदिया को इसका जवाब देना चाहिए कि यदि वे नगर निगम के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के प्रति अपने सरकार की कोई जिम्मेवारी मानते हैं तो उनकी सरकार ने स्कूलों में आॅन लाइन क्लास की योजना बनाते समय वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए मोबाइल और उस मोबाइल के लिए पर्याप्त डाटा के लिए बजट का प्रावधान क्यों नहीं किया?

कोरोना योद्धा के परिवार को कब मिलेगा एक करोड़ का चेक

43 वर्षीय  निगम शिक्षक नितिन तंवर की कोरोना की वजह से मृत्यु हो गई। वे दिल्ली सरकार के निर्देशों पर घर-घर जाकर कोरोना सर्वेक्षण कर रहे थे। वे कोरोना योद्धा थे। अब निगम के उनके साथी उनके लिए एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। एसडीएम पीयूष अरुण रोहनकर के आदेश पर नितिन घर—घर जाकर कोविड—19 मरीजों का डाटा इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जारी पत्र में 20 नवम्बर, 2020 से 11 दिसम्बर, 2020 तक के लिए वे टीम इंचार्ज थे। नितिन के बड़े भाई मनीष के अनुसार — ‘पहले भी नितिन को कुछ समय के लिए ऐसी ड्यूटी पर लगाया गया और जैसे ही उनकी ड्यूटी अवधि पूरी होती तो फिर उन्हें नया काम दे दिया जाता।’

कोरोना मरीजों के बीच जाने को नहीं मिला था प्रशिक्षण
नितिन को कोरोना के मरीजों के बीच जाने के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया था। 11 दिसम्बर को उन्होंने एसडीएम द्वारा सौंपा गया सर्वे का अपना काम पूरा किया। 13 दिसम्बर को अस्पताल में भर्ती हुए और 14 दिसम्बर को उनकी मृत्यु हो गई। नितिन की नौ साल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एक बेटी है। पर अब उसकी देखभाल के लिए नितिन जीवित नहीं हैं।

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दिल्ली  सरकार से नगर निगम के बकाया पैसों की मांग पर धरना देते हुए निगम के कर्मचारी

केजरीवाल सरकार कोरोना योद्धाओं को एक करोड़ का चेक दे रही है। 20 जून को संविदा पर तैनात 42 वर्षीय डॉ. जावेद अली की कोरोना के चलते मृत्यु हो गई। केजरीवाल ने जावेद अली के परिवार को 30 जुलाई को एक करोड़ का चेक सौंपा। चेक सौंपने के बाद केजरीवाल ने ट्वीट पर लिखा, ‘‘कोरोना काल में हमारे डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन- रात मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ऐसे ही एक कोरोना योद्धा डॉक्टर जावेद अली का हाल ही में कोरोना से निधन हो गया था। आज उनके परिवार से मिल कर एक करोड़ रुपये की सहायता राशि दी। भविष्य में भी उनके परिवार का ख्याल रखेंगे।’’ मुख्यमंत्री केजरीवाल ने तब कहा था कि ‘‘पूरे देश में केवल दिल्ली सरकार ही है, जो कोरोना योद्धाओं को इस तरह आर्थिक मदद कर रही है।’’

उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने दिल्ली के कोरोना योद्धाओं की जिम्मेवारी लेते हुए कहा था— ‘‘हम अपने कोरोना योद्धाओं की जिम्मेवारी लेते हैं और दिल्ली का हर नागरिक उनके साथ खड़ा है। हमने अपने कोरोना योद्धाओं के अथक परिश्रम के कारण ही अब दिल्ली में कोविड 19 की स्थिति को नियंत्रित किया है।’’ नगर निगम शिक्षक संघ दिल्ली के ट्विटर हैंडल से 14 दिसम्बर, 2020 को ट्वीट किया गया— ‘‘उतरी निगम के करोलबाग जोन के एच ब्लॉक, नारायणा स्कूल के अध्यापक नितिन तंवर की सर्वे में ड्यूटी से संक्रमित होने पर आज अस्पताल में मृत्यु हो गई है।  विभाग से निवेदन है कि इसकी एक करोड़ बीमा राशि की फाइल बनाकर जल्दी से दिल्ली सरकार को भेजी जाए।’’

इस ट्वीट पर निगम के एक शिक्षक मुकेश पांडेय ने लिखा —  ‘‘जिनसे आप फरियाद कर रहे हैं, उनके सीने में पत्थर का दिल है। वरना अपनी तनख्वाह के लिए यूं इतना लंबा आंदोलन न करना पड़ता।’’

इससे साफ है कि दिल्ली सरकार पर दिल्ली वालों का विश्वास जम नहीं पा रहा। वे केजरीवाल के वादे पर यकीन नहीं कर पा रहे। दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों को लग रहा है कि जिस तरह 13,000 करोड़ रुपए के बकाए पर केजरीवाल ने चुप्पी साध रखी है, उसी तरह कोरोना योद्धा नितिन तंवर की मौत को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। नितिन तंवर एसडीएम के आदेश पर कोविड 19 मरीजों के बीच गए थे और अपनी ड्यूटी के दौरान ही कोविड 19 से संक्रमित हुए थे। अब उनकी मृत्यु हो चुकी है। वे कोरोना योद्धा थे। केजरीवाल सरकार से अपेक्षा है कि वह कोरोना योद्धा जावेद अली और कोरोना योद्धा नितिन तंवर में फर्क नहीं करेगी और उनके परिवार को एक करोड़ का चेक दिल्ली सरकार की तरफ से जल्दी ही जारी कर दिया जाएगा।