पहली ही कैबिनेट में किसानों का कर्जा माफ़ किया था, उत्तर प्रदेश के किसान गुमराह होने वाले नहीं- योगी आदित्यनाथ

    दिनांक 21-दिसंबर-2020   
Total Views |
 
उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्‍यनाथ ने पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज माफ करने का फैसला किया था. खेत से खलिहान और बीज से खाद तक को एक चेन से जोड़ा गया था. रिकार्ड उत्‍पादन कर खाद्यान्न आत्‍मनिर्भरता लाई गई. कृषि विश्‍वविद्यालय के सहयोग से 20 कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किये गए.
u_1  H x W: 0 x

गत दिनों मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘कांट्रेक्‍ट खेती’ को लेकर विपक्ष किसानों को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रहा है. किसान कभी गुमराह नहीं होंगे. कांट्रेक्ट खेती दो लोगों के बीच आपसी समझौता है. ‘कांट्रेक्‍ट खेती’ से किसानों की फसल पर कब्‍जा जैसी बात पूरी तरह से भ्रामक है. सरकार गारंटी ले रही है कि ‘कांट्रेक्‍ट खेती’ शुरू होने पर किसानों के हित का पूरा ख्‍याल रखा जाएगा.

इससे किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी. विपक्ष भ्रामक प्रचार कर रहा है कि कृषि कानून लागू होने के बाद न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) समाप्‍त हो जाएगा और मंडियां बंद हो जाएंगी, ऐसा बिल्‍कुल नहीं है. कृषि कानून लागू होने के बाद किसान अपनी फसल कहीं पर भी अच्‍छी कीमत पर बेच सकता है.

चीनी एक्‍सपोर्ट करने वाले किसान भाईयों को एक्‍सपोर्ट सब्सि‍डी जारी की जा रही है. सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने के प्रयास में है.विपक्ष ने स्‍वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को दबाए रखा लेकि‍न प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने किसानों को एमएसपी देने की गारंटी दी. फरवरी, 2019 में प्रधानमंत्री ने किसान निधि सम्‍मान को लागू किया. अब 25 दिसम्‍बर को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी किसान निधि सम्‍मान के जरिए बड़ी सौगात देने जा रहे हैं. यूपी के 2 करोड़ 30 लाख किसानों समेत देश के 9 करोड़ किसानों को किसान निधि सम्‍मान का 18 हजार करोड़ रुपए सीधे उनके खाते में भेजे जाएंगे.


किसानों की फसल बेचने में अभी बिचौलिये और दलाल हावी रहते थे, लेकिन कृषि कानून लागू से होने से किसान अपनी फसल सीधे बेच सकेंगे. कोरोना काल में चीनी मिलें बंद नहीं हुई, बल्कि सरकार ने गन्ने को मिलों तक पहुंचाने का काम किया. गेहूं व धान का क्रय पूरी ईमानदारी से किया गया. प्रदेश सरकार ने 26 लाख मिट्रिक टन गेहूं और 52 लाख मिट्रिक टन धान क्रय किया है.

कृषि विश्‍वविद्यालय के सहयोग से किसानों को तकनीकी जानकारी देने के लिए तीन सालों में 20 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों को स्‍थापित किया गया है. इनमें से कुछ केन्‍द्रों को 'सेंटर ऑफ एक्‍सीलेंस' बनाए जाने की तैयारी है। जहां पर वैज्ञानिक तरीके से फसल उगाने की जानकारी किसानों को दी जाएगी. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी, साथ ही कृषि से जुड़ी जानकारियों में बढ़ोतरी होगी. किसान तकनीकी जानकारी हासिल करके दूसरों के लिए प्ररेणा बन सकेंगे। तकनीक के जरिए किसानों के जीवन में परिवर्तन आएगा.