झारखंड की राजनीति में बवाल, बाबूलाल मरांडी ने सोरेन से इस्तीफा मांगा

    दिनांक 21-दिसंबर-2020
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मुंबई की एक मॉडल द्वारा झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर दुष्कर्म का आरोप लगाए जाने के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। भाजपा ने नैतिक आधार पर सोरेन का इस्तीफा मांग लिया है

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर मुंबई की एक मॉडल आरफा (परिवर्तित) ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2013 में होटल की 21वीं मंजिल से फेंकने की धमकी देकर उससे बलात्कार किया था। बताया जा रहा है कि बाद में उसने​ किसी कारण मजिस्ट्रेट के सामने लिखकर दे दिया कि वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती क्योंकि उसकी शादी होने वाली है। इसके बाद मामले को दबा दिया गया।
पाञ्चजन्य के संज्ञान में मामला आने के बाद हमने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। हमने सारे साक्ष्य इस संबंध में दिए और इस पर बड़ी स्टोरी की। पाञ्चजन्य के माध्यम से स्टोरी आने के बाद झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मंराडी ने दुमका में इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिक आधार पर इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी नहीं हैं तो सच का सामना करें और स्थिति स्पष्ट करें लेकिन जब उन पर आरोप है तब तक वह नैतिक आधार पर इस्तीफा दें। दुष्कर्म जैसे अपराध का आरोप होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का नैतिक हक नहीं हैं।
वहीं इस मामले में लड़की अभी तक सामने नहीं आई है। मुंबई पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा है ​कि उन्हें इस संबंध में शिकायत मिली है। ब्रांदा पुलिस स्टेशन को लड़की तरफ से एक शिकायत फिर से मिली है। मुंबई पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
बता दें कि 15 जुलाई, 2013 को हेमंत सोरेन पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे। कुर्सी मिलने का जश्न मनाने के लिए वे मित्रों के साथ मुंबई के पांच सितारा होटल में गए थे। उनके साथ मुंबई निवासी सुरेश नागरे भी थे। वे 'ताज लैंड्स एंड होटल' में रुके थे।
​हेमंत सोरेन पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली आरफा का आरोप है कि हेमंत सोरेन के नजदीकी मित्र रहे सुरेश नागरे उन्हें उन्हें सोरेन से मिलवाया था। 5 सितंबर को नागरे ने उसे फोन कर होटल में मिलने के लिए बुलाया था। वह किसी बहाने से कमरे से बाहर निकल गया इसके बाद सोरेन ने उसका यौन उत्पीड़न किया। जब उसने चिल्लाने का प्रयास किया तो सोरेन ने उसका मुंह दबा दिया और धमकी दी कि यदि वह फिर चिल्लाई तो उसे 21वीं मंजिल से नीचे फेंक दिया जाएगा। डरी, सहमी आरफा चिल्ला तक न सकी। उसे लग रहा था कि कहीं सोरेन उसे वास्तव में मार न डालें। आरफा का कहना है कि थोड़ी देर पहले तक बेहद सभ्य दिखाई दे रहे हेमंत का रवैया सड़क छाप गुंडे की तरह था, जिसने उसके साथ वीभत्स तरीके से दुष्कर्म किया।
सुबह साढ़े तीन बजे तक आरफा वहां कैद रही। साढ़े तीन बजे के करीब एक अन्य लड़की वहां आई। उसने भी उसे कहा कि वह यहां से चली जाए और साथ ही धमकी दी कि यदि उसने इस घटना के बारे में किसी से जिक्र किया तो वह उसके जीवन का अंतिम दिन होगा। हां, यदि वह चुप रही तो सोरेन उसे फिल्मों में काम दिलवाने में मदद करेंगे।
उस दिन के बाद से नागरे ने आरफा का फोन उठाना बंद कर दिया। वह मानसिक तौर पर पूरी तरह टूट चुकी थी। अक्तूबर के पहले सप्ताह में आरफा के पास नागरे का दोबारा फोन आया। उसने 7 अक्तूबर, 2013 को उसे हेमंत सोरेन से मिलने के लिए झारखंड आने के लिए कहा। आरफा समझ गई कि उसके साथ फिर से ऐसा होने वाला है। उसने नागरे का फोन उठाना बंद कर दिया, लेकिन वह लगातार उसे एसएमएस और फोन करके झारखंड आने के लिए दबाव बनाता रहा।
इसके बाद आरफा ने अपनी अंतरआत्मा की आवाज सुनी और फैसला किया कि वह उसके साथ हुए बलात्कार के संबंध में शिकायत देगी। आरफा ने बांद्रा मेट्रोपोलेटियन मजिस्ट्रेट के यहां धारा 376, 365,354,323, 120 बी के तहत शिकायत की। तारीख थी 21 अक्तूबर 2013। यानी आरफा के साथ दुष्कर्म होने के 46वें दिन। आरफा ने अपनी शिकायत में देरी का कारण यह बताया है कि उसने डर के कारण पहले शिकायत नहीं की थी। क्योंकि आरोपी राजनीतिक रसूख वाले और प्रभावी लोग थे। इसके चलते उसने पुलिस से भी सीधे शिकायत नहीं की। उसने अपनी शिकायत में हेमंत सोरेन को मुख्य अभियुक्त और सुरेश नागरे को सहअभियुक्त बनाया।
आश्चर्यजनक तो यह कि उसके बाद अचानक 30 अक्तूबर को आरफा ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट को लिखित में कहा कि उसकी शादी होने वाली है और वह केस को आगे नहीं ले जाना चाहती, क्योंकि उसे आवास बदलना पड़ेगा।
अब जरा इन तारीखों पर गौर करें, आरफा के साथ 5 सितंबर को बलात्कार हुआ, 21 अक्तूबर को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के यहां शिकायत की गई और 22 अक्तूबर को शिकायत मजिस्ट्रेट कोर्ट में पंजीकृत हुई। 25 नवंबर को सुनवाई की तारीख पड़ती उससे पहले अचानक 30 अक्तूबर को 25 दिन पहले ही केस को आगे न चलाए जाने की बात लिखकर मजिस्ट्रेट को दी गई। उधर मजिस्ट्रेट ने इस पर लिखा कि 'कंटेस्टिड केस विड्रान' यानी शिकायतकर्ता मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती, और फाइल बंद हो गई। उधर आरफा भी दृश्य से गायब हो गई।
आरफा का कहना है कि 8 अगस्त 2020 को वह टैक्सी से गुजरात जा रही थी, जो बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसके बाद कुछ अनजान लोग उसकी निगरानी में लगे हैं। आरफा ने 8 दिसंबर, 2020 को मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में मामले की फिर से जांच किए जाने शिकायत की है। जिसमें उसने अपने साथ हुई घटना का पूरा ब्योरा दिया और शिकायत को वापस लेने का कारण बताया है। इस संवाददाता ने इस संबंध में जानकारी लेने के लिए
(https://mumbaisuburban.gov.in/police/) से नंबर लेकर Bandra Police Station Hill Road, Bandra (W), Mumbai – 50 022-26423122, 022-26513716 पर फोन किया। दोनों ही नंबरों पर कई बार फोन करने के बाद फोन नहीं उठा। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट(http://www.mahapolice.gov.in/) से नंबर लेकर पुलिस कंट्रोल रूम के नंबरों 022, 22621855 और 22623054 पर फोन किया और बांद्रा के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर का नंबर मांगा ताकि हम शिकायत के संंबंध में पुष्टि कर सकें। वहां से पुलिस इंस्पेक्टर पदमाकर देवरे का नंबर दिया गया। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर निखिल काप्से का नंबर दिया। जैसे ही हमने उन्हें अपना परिचय दिया, उन्होंने फोन काट दिया और कई बार फोन मिलाने के बाद भी फोन नहीं उठाया।
आरफा ने ताजा शिकायत में कहा है कि मामले को वापस लेने के बाद वह डर के कारण कहीं और रहने चली गई थी। साथ ही उसने कहा है कि जो उसके साथ हुआ, वह उसे भूलने का प्रयास कर रही थी, लेकिन गत चार-पांच महीनों में उसे और उसके परिवार वालों को धमकी भरे कॉल आ रहे हैं और अनजान लोगों द्वारा उस पर और उसके परिवार पर निगरानी रखी जा रही है। इस कारण उसका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है और वह बहुत पीड़ा और भय में जीवन जी रही है। उसने बताया है कि 8 अगस्त, 2020 को वह टैक्सी से गुजरात जा रही थी,जो रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उसे पूरा विश्वास है कि यह हादसा नहीं बल्कि उसकी जान लेने के लिए अभियुक्तों द्वारा किया गया एक प्रयास था। इस घटना के बाद उसने पूरे विषय का विवरण देते हुए माननीय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और गृह सचिव को पत्र भी लिखे हैं। इनमें उसने लिखा है, ‘‘मैं हेमंत सोरेन और सुरेश नागरे के खिलाफ मामले की जांच के साथ कार्रवाई चाहती हूं।’’ उसने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि 2013 में उसने धमकी और दबाव के चलते अपनी शिकायत वापस ले ली थी और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई 'मेरिट' पर नहीं की। उसे और उसके परिवार को जान का खतरा है इसलिए उसे और उसके परिवार को सुरक्षा दी जाए और इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जाए।