अमेरिका में अभावग्रस्तों के बीच खाद्य पदार्थों का वितरण

    दिनांक 22-दिसंबर-2020   
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अमेरिका में रहने वाले हिंदू अपने किसी भी पर्व को अनूठे ढंग से मनाने के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इस साल दीपावली से कुछ पहले अमेरिकी हिंदुओं ने तय किया कि 2,94,000 भोजन के पैकेट (सूखा राशन जैसे-ब्रेड, बिस्कुट, चॉकलेट आदि) दान किए जाएंगे। इसके बाद ये लोग समाज से ये पदार्थ इकट्ठे करने लगे।
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जमा की गई खाद्य वस्तुओं के साथ हिंदू स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता।

अमेरिका में रहने वाले हिंदू अपने किसी भी पर्व को अनूठे ढंग से मनाने के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इस साल दीपावली से कुछ पहले अमेरिकी हिंदुओं ने तय किया कि 2,94,000 भोजन के पैकेट (सूखा राशन जैसे-ब्रेड, बिस्कुट, चॉकलेट आदि) दान किए जाएंगे। इसके बाद ये लोग समाज से ये पदार्थ इकट्ठे करने लगे।

लगातार दो महीने तक यह कार्य किया गया और जो पैकेट मिले, उन्हें 199 भोजनालयों आदि को भेंट कर  दिया गया। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में सीधे किसी अभावग्रस्त को भोजन नहीं दिया जाता है। ऐसे लोग निर्धारित स्थान से भोजन का पैकेट प्राप्त करते हैं। इसलिए जो भी इन्हें भोजन देना चाहता वह उस स्थान पर अपना सामान रख जाता है। इस बार अमेरिकी हिंदुओं ने 26 राज्यों के 225 शहरों से भोजन की थैलियां जमा कीं। इसके लिए अनेक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।
 
इस पूरे अभियान को ‘सेवा दीवाली’ का नाम दिया गया था। यह अभियान ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ, यूएसए’ की देखरेख में चला। इस अभियान की सराहना अमेरिका के कई गणमान्य लोगों ने भी की। इनमें कई शहरों के महापौर भी शामिल थे। 
   



शिक्षण संस्थानों में ‘कामधेनु पीठ’ की स्थापना
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राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया

गत दिनों राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने ‘विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कामधेनु पीठ की स्थापना’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। इसकी भूमिका रखते हुए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने कहा कि हमें युवाओं को भारतीय नस्ल की गायों के बारे में शिक्षित करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने देसी गायों एवं पंचगव्य पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। देसी गायों से संबंधित विज्ञान को आगे लाने तथा आधुनिक शिक्षा प्रणाली में गायों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समझने और गायों के बारे में बताए गए लाभों पर शोध करने का प्रयत्न अब आरंभ करना चाहिए।

केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने कामधेनु पीठ की स्थापना की पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि हम समाज में गायों के माध्यम से होने वाले कई लाभों से समृद्ध थे, लेकिन विदेशी शासकों के प्रभाव में हम इसे भुला बैठे।  समय आ गया है कि हम गाय से जुड़े विज्ञान एवं इसके अन्य महत्व को पुन: समझें। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल आत्मनिर्भर गांवों के माध्यम से ही संभव है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने कहा कि कामधेनु पीठ गाय से जुड़ी कई बातों पर साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देगी। एसोसिएशन आॅफ इंडियन यूनिवर्सिटी (एआईयू) के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि गाय के पीछे बहुत बड़ा विज्ञान है और उसे स्थापित करने के लिए कामधेनु पीठ के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का समय आ गया है। वेबिनार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव, कामधेनु विश्वविद्यालय, गुजरात के कुलपति डॉ. नरेश केलावाला, आर.टी.डी. राजस्थान के पूर्व कुलपति श्री कृष्ण मुरारी लाल पाठक सहित अनेक अन्य शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे।