तनाव नहीं, सकारात्मकता अपनाएं

    दिनांक 22-दिसंबर-2020
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डॉ.रविंद्र धाबाई

चाइनीज वायरस कोरोना ने पूरी दुनिया को एक ऐसे संकट मेें डाल दिया है जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा तक न होगा। वैसे तो इसके कारण सभी तनावग्रस्त हैं, लेकिन युवावर्ग  में लॉकडाउन की अवधि बढ़ते जाने से अवसाद जैसा पैदा होता दिख रहा
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कोरोना वर्तमान समय में एक भयावह चिकित्सकीय चुनौती के रूप में सामने आया है। दिसंबर, 2019 में चीन को घेरने के बाद विश्व के प्रत्येक देश में फैल चुके इस महारोग से लगभग एक करोड़ लोगों संक्रमित हो चुके हैं, जिनमें से लगभग डेढ़ लाख लोग अब तक काल के गाल में समा चुके हैं। इस वैश्विक महामारी ने हमारे पूरे जीवन को बदलकर रख दिया है। इसके पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि सब यूं घरों में बंद हो जाएंंगे। लॉकडाउन और ‘सोशल डिस्टेंसिग’ के चलते स्कूल- कालेज, दफ्तर आदि सब बंद हो जाएंगे। जीवन में एक ठहराव आ जाएगा। आज इस बीमारी का ऐसा भय व्याप्त है कि कोई भी सामान्य रूप से काम नहीं कर पा रहा। आनलाईन कक्षाएं और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसी नई जीवनशैली हमारे लिए एक नया अनुभव है।

ऐसे समय में, जब यह भी नहीं पता कि कल कैसा निकलेगा, अड़ोस-पड़ोस में हर कोई कोरोना से पीड़ित होने लगा है, तो सामान्यजन, विशेषकर युवाओं में मानसिक तनाव, अनिद्र्रा, अवसाद की स्थिति में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। लॉकडाउन काल पर नदिया, प. बंगाल के मेडिकल कालेज द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, 71.8 प्रतिशत लोग चिंताग्रस्त पाए गए, 24.7 प्रतिशत में  अवसाद के लक्षण मिले, 52.1 प्रतिशत में चिड़चिड़ापन देखा गया तो 21.1 प्रतिशत लोग अपनी कोविड जांच कराने को लेकर चिंता में डूबे मिले। बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होने, कामकाज और भविष्य की चिंताओं से ग्रस्त पाये गये। उसके बाद से लेकर अब तक एक अंतहीन अंधेरी गली की तरह हम इसमें फंसा हुआ-सा महसूस कर रहे हैं। विशेष रूप से वह युवावर्ग, जो पढ़ रहा है, किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, अपने भविष्य को लेकर आशंकित है। आज हमारे सामने विषम परिस्थितियां हैं, इनसे बचने का भी कोई उपाय नहीं परंतु अपनी पढ़ाई, व्यवसाय और करियर की चिंताओं से पार पाने के लिए सुदृढ़-स्वस्थ शरीर के साथ-साथ हमें मानसिक दृढ़ता की भी महती आवश्यकता है।

कोरोना के इस काल में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है एकाकीपन,  जो उन्हें अंदर तक खाये जा रही है। उन्हें लगता है, हमारी चिंता करने वाले हमसे दूर  हैं, हमें  ही स्वयं को  संभालना होगा। ऐसे में  व्यवस्थित जीवनशैली और खान-पान शरीर और मन को प्रसन्नचित्त रखता है। खुद को सकारात्मक  रख अपने और दूसरों के जीवन में भी एक उमंग जगाई जा सकती है
 
युवाओं में सबसे बड़ी समस्या है एकाकीपन, जो उन्हें अंदर तक खाये जा रहा है। उन्हें लगता है, हमारी चिंता करने वाले हमसे दूर हैं, हमें स्वयं को ही संभालना होगा। आसन्न संकट के लिए तैयारी भी उतनी ही सुदृढ़ होनी चाहिये। इसके लिए आवश्यक है नियमित जीवनशैली। समय पर उठना, सोना, खाना-पीना और समय पर व्यायाम भी करना। ऐेसे समय में नियमित योग व प्राणायाम एक संजीवनी का काम कर सकता है। इसे निश्चित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

समय का सदुपयोग अपने स्वास्थ्य को सुधारने, अपने शौक का आनंद लेने और नई नई चीजें सीखने में किया जा सकता है। रोज सुबह घूमने और साइकिल चलाने वालों की भीड़ इसका प्रमाण है। खाली समय में आपकी सबसे अच्छी मित्र होती हैं पुस्तकें। टीवी या सोशियल मीडिया पर समय व्यर्थ करने की अपेक्षा हम सत्साहित्य पढ़ सकते हैं, जिससे हमें न केवल जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने बल्कि जीवन जीने की उत्कृष्ट शैली के बारे में भी पता चलता है। जीवन में आध्यात्मिकता आपकी चिंताओं को हल्का करने में सहायक होती है।

जयपुर में कार्यरत मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश जैन के अनुसार अपने आपको परिस्थितियों के भरोसे छोड़ने से आपकी चिंताएं और अवसाद आपको घेर लेगा। सकारात्मक सोच और नियमित जीवनशैली से अपने आपको व्यस्त रखते हुए आप कोरोना के इस आपातकाल को अवसर में बदल सकते हैं। हर रात के बाद आशाओं का सवेरा आना निश्चित है। बस हम सकारात्मक मन से अपने आपको संभालते हुए बढ़ते जाएं, तो चिंताएं और अवसाद छू भी न पाएंगे।     (लेखक जयपुर में वरिष्ठ चिकित्सक हैं)