निवेश की नई उड़ान

    दिनांक 22-दिसंबर-2020
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उमेश्वर कुमार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में उद्योग को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि महज तीन साल में एक लाख 88 हजार करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतर रहा है। आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में हर दिन औसतन 172 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है
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उत्तर प्रदेश में तेजी से स्थापित हो रही हैं अंतराट्रीय कंपनियां

कोरोना काल में दुनिया का कारोबार बदल रहा है, कारोबारी तरीके बदल रहे हैं, कारोबारी रिश्ते बदल रहे हैं। साथ ही, कारोबार की आड़ में आर्थिक साम्राज्यवाद के काले खेल का खुलासा हो गया है। तकनीक देने अथवा बेचने की आड़ में अपने जासूसी तंत्र की स्थापना के खेल का भी खुलासा हो गया है। और, इन सभी का सिरमौर है चीन। कोरोना काल में दुनियाभर में चीन की जगहंसाई हुई। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने चीन के साथ अपने कारोबारी रिश्तों को नए सिरे से व्याख्यायित किया। कारोबारी सीमारेखाएं खींच ली गर्इं। दुनिया की दिग्गज कंपनियों ने चीन से बाहर निकलने का निर्णय लिया और कई कंपनियां वहां से बाहर आ भी चुकी हैं। भारत ने इन स्थितियों को बड़ी गंभीरता से समझा और विदेशी कंपनियों के भारत आने का रास्ता बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरगामी सोच से इसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा के तहत केंद्र के साथ ही राज्यों में निवेश आकर्षित करने की मुहिम चली और परिणाम शानदार आ रहे हैं। कई राज्य इस दिशा में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश का नाम अग्रणी है। कोरोना की शुरुआत के साथ ही देश में विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने का काम शुरू हो गया था। राजनय के स्तर के साथ ही कारोबारी रिश्तों के धरातल पर भी लगातार अभियान चल रहा था।

क्या चाहते हैं विदेशी निवेशक
किसी भी देश में विदेशी निवेशक सबसे पहले चाहते हैं पारदर्शिता। फिर वे देखते हैं कि क्या यहां उनके माल का बाजार है या उस देश को अपना निर्यात केंद्र बनाया जा सकता है। इसके बाद बारी आती है कारोबारी सुगमता की कि क्या कारोबार को स्थापित करने में अधिक कठिनाइयां तो सामने नहीं आएंगी। जमीन, बिजली, पानी आदि में समस्या तो नहीं होगी। किसी भी तरह की वाद की स्थिति में वहां के कानून के शासन की हालत कैसी है। काम के लिए मनोनुकूल मानव संसाधन हैं क्या। इन सभी के साथ वे यह भी देखते हैं कि वहां का श्रम कानून कैसा है और श्रम की लागत कैसी है। संयोग से भारत में ये सारी चीजें प्रचुर मात्रा में हैं। कुछ चीजों को तैयार करने की जरूरत थी, और सबसे बड़ी जरूरत इन सभी चीजों के समन्वय की थी। समन्वय के साथ ही इनको विदेशी कंपनियों को बताना उतना ही जरूरी था जिससे वे भारत में अपना कारोबार स्थापित कर सकें।

अपने को सशक्त बनाने और चीन की लपेट से बाहर आने के लिए मोदी सरकार ने सशक्त भारत की अवधारणा के तहत इन सभी को समन्वित किया और विदेशी कंपनियों के भारत आने, खासकर उनके चीन से भारत आने का मार्ग प्रशस्त किया गया। कई राज्यों ने भी अपने स्तर पर कोशिशें कीं, फिलहाल उत्तर प्रदेश कीयोगी सरकार की कोशिशें तेजी से रंग लाती दिख रही हैं।

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उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेशकों को हर तरह की कारोबारी सुगमता देने को तत्पर हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  (फाइल चित्र)

देश में उद्योग के प्रसार के लिए सिर्फ विदेशी कंपनियों पर ही ध्यान केन्द्रित नहीं है, बल्कि राज्य सरकारों की कोशिश है कि अपने देश की कंपनियां भी अपने पंख फैलाएं। ऐसी ढेरों कंपनियां है जो अपने काम के बल पर विदेशों में झंडे गाड़ रही हैं। कई तो इतनी छोटी हैं कि उनका आम लोगों को नाम तक नहीं पता। अब कोरोना काल के बाद कंपनियों का भी रुझान देश में ही केंद्रित होकर कारोबार बढ़ाने की ओर गया है। इस मामले में मोदी सरकार की वोकल फॉर लोकल मुहिम को काफी बल मिल रहा है। देश में जिलों के स्तर पर इस बात की खोज शुरू हो गई है कि वहां की खासियत क्या है। उन्हें दुनिया के सामने पेश करवाने की जिम्मेदारी प्रशासन उठाना चाह रहा है। सरकार के इस सोच से उद्यमी भी बढ़-चढ़कर जुड़ने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश ने रचा इतिहास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में उद्योग को आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि महज तीन साल में एक लाख 88 हजार करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतर रहा है। अगर इन आंकड़ों को गणित के हिसाब से देखें तो प्रदेश में हर दिन औसतन 172 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।

सत्ता संभालने के साथ ही मुुख्यमंत्री योगी ने करीब दर्जन भर अलग-अलग विभागों की नीतियां बनवाइं। साथ ही प्रदेश में कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर काम शुरू किया। विभिन्न क्षेत्रों में रिकॉर्ड 186 सुधार लागू किए गए। इसी का परिणाम है कि महज तीन साल में प्रदेश में 156 कंपनियों ने 48,707 करोड़ रुपए का निवेश कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इन कंपनियों में करीब 121,770 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इसके अलावा 53,955 करोड़ रुपए की लागत से 174 कंपनियां ऐसी हैं, जो प्रक्रिया में हैं और जल्द ही उत्पादन शुरू करने वाली हैं। इनमें 2,38119 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। ऐसे ही 86,261 करोड़ रुपए के निवेश से 429 कंपनियों की सारी प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं, निवेशक अपनी परियोजनाएं शुरू करने जा रहे हैं। इनमें 10, 63, 799 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। कुल 759 कंपनियों का 1,88,924 करोड़ रुपए का निवेश प्रक्रिया में है और इनमें 14,23,688 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में 32,544 करोड़ रु. का निवेश
प्रदेश में सबसे ज्यादा निवेश इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन के क्षेत्र में आया है। 10 कंपनियों ने 32,544 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इसमें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने 10,000 करोड़ रुपए, वीवो मोबाइल्स ने 7,429 करोड़ रुपए, ओप्पो मोबाइल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2,000 करोड़ रुपए, होलीटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 1,772 करोड़ रुपए, सनवोडा इलेक्ट्रॉनिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 1,500 करोड़ रुपए, केएचवाई इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 358 करोड़ और लिआनचुआंग (एलसीई) ने 281 करोड़ के निवेश के साथ गौतमबुद्ध नगर में कार्य शुरू कर दिया है। राज्य में दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा निवेश अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में हुआ है। इसमें 18 कंपनियों ने 15,963 करोड़ रुपए का निवेश किया है। मिर्जापुर जिले में ढाई सौ करोड़ रुपए की लागत से एमप्लस एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने काम शुरू भी कर दिया है।  तीसरे नंबर पर टेलीकॉम की दो कंपनियों रिलायंस जीओ इंफोकॉम लिमिटेड ने 10,000 करोड़ रुपए और बीएसएनएल ने 5,000 करोड़ रुपए का निवेश कर कार्य शुरू कर दिया है।

उत्पादन क्षेत्र में 21 कंपनियों ने किया निवेश
संख्या की दृष्टि से सबसे ज्यादा 21 कंपनियों ने 10,913 करोड़ रुपए की लागत से उत्पादन क्षेत्र में निवेश किया है। स्पर्श इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने 600 करोड़ रुपए और रिमझिम इस्पात ने 550 करोड़ का निवेश कानपुर देहात में किया है। केंट आरओ सिस्टम्स लिमिटेड ने 300 करोड़ रु. का निवेश गौतमबुद्ध नगर, पीटीसी इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने लखनऊ में 205 करोड़ का निवेश किया है। इसके अलावा एमएम फॉरजिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने 150 करोड़ का निवेश बाराबंकी में किया है। विशेष बात यह है कि इन सभी कंपनियों ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है।

आईटी सेक्टर ने भी दिखाया दम
आईटी सेक्टर की तीन कंपनियों ने 10,800 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इसमें वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड ने 3,500 करोड़, इंफोसिस लिमिटेड ने 5,000 करोड़ रुपए और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने 2,300 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दिया है और कार्य शुरू करने की स्थिति में हैं।

कानपुर बन रहा टेक्सटाइल का हब
कभी भारत का मैनचेस्टर कहा जाने वाला कानपुर फिर से टेक्सटाइल के नक्शे पर धूम मचाने वाला है। राज्य के स्तर पर उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल के क्षेत्र में नई उड़ान भरने वाला है जिसमें कानपुर केंद्र में होगा। चार कंपनियों ने 6,320 करोड़ का निवेश किया है। कानपुर प्लास्टिपैक लिमिटेड ने कानपुर देहात में 200 करोड़ रु., कानपुर में ही एक और कंपनी आरपी पॉली पैक्स ने 150 करोड़ रुपए का निवेश कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इसके अलावा नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन क्लस्टर गौतमबुद्ध नगर में 5,000 करोड़ रुपए और क्लेस्टो यार्न बलरामपुर में 970 करोड़ के निवेश से उत्पादन शुरू करने की स्थिति में हैं।

खाद्य प्रसंस्करण बन रहा पसंदीदा क्षेत्र
खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आठ कंपनियों ने 4,942 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जिसमें एसएलएमजी बीवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड ने लखनऊ में 300 करोड़ रुपए, बरेली में बीएल एग्रो ने160 करोड़ रुपए और खट्टर एडीबल्स प्राइवेट लिमिटेड ने रामपुर में 150 करोड़ रुपए का निवेश कर उत्पादन शुरू कर दिया है। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड गौतमबुद्धनगर में 2,118 करोड़ रुपए, पेप्सिको मथुरा में 514 करोड़ रुपए, तो हल्दीराम स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड गौतमबुद्धनगर में 490 करोड़ रुपए का निवेश कर रही हैं।

28 विदेशी कंपनियों का 9,357 करोड़ रु. का करार
प्रदेश में सिर्फ कोरोना काल में 28 विदेशी कंपनियों ने 9,357 करोड़ रुपए के निवेश के लिए करार किया है। इसमें एक जूता बनाने वाली कंपनी ऐसी है, जो चीन से शिफ्ट होकर भारत आई है और तीन सौ करोड़ के निवेश से आगरा में उत्पादन शुरू कर दिया है। प्रदेश में निवेश के लिए 1,746 करोड़ के निवेश से कनाडा की दो कंपनियां, तीन सौ करोड़ के निवेश से जर्मनी की चार कंपनियां, एक हजार करोड़ के निवेश से हांगकांग की एक कंपनी, दो हजार करोड़ के निवेश से जापान की सात कंपनियां, 1,600 करोड़ के निवेश से सिंगापुर की दो कंपनी, 1,375 करोड़ के निवेश से इंग्लैंड की तीन कंपनियां, 309 करोड़ के निवेश से यूएसए की पांच कंपनियां, 928 करोड़ के निवेश से कोरिया की चार कंपनियों ने प्रदेश सरकार से करार किया है।


बढ़ रहा विदेशी निवेशकों का रुझान
पिछले पांच महीने में भारत में विदेशी निवेश 13 फीसदी बढ़ा है जो विदेशी निवेशकों के भारत के प्रति विश्वास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक निवेशकों से हाल ही में कहा कि भारत में कर दर काफी कम है, आयकर एसेसमेंट और अपील के लिए एक फेसलेस व्यवस्था बहाल की गई है। साथ ही, श्रम कानूनों में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। मोदी ने वैश्विक निवेशकों से कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र में हाल में किए गए सुधारों की वजह से भारत के किसानों के साथ साझेदारी के लिए नया रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल और सुधार की वजह से विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण सेक्टर सरकार की प्राथमिकता सूची में महत्वपूर्ण है और इस सेक्टर में विकास के लिए सरकार ने 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर निवेश की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस योजना के तहत नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन को मजबूत किया जाएगा और इस बारे में मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले पांच महीने में भारत में विदेशी निवेश 13 प्रतिशत बढ़ा है जो पिछले साल के मुकाबले भारत में विदेशी निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की योजना एक सोची-समझी आर्थिक रणनीति है जिसके तहत भारत की क्षमताओं को विकसित करने की योजना तैयार की गई है।


प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में निवेश का माहौल इस तरह से बन रहा है जिसमें सबकी जीत हो। आज की सबसे बड़ी चुनौती कोरोना और इसका टीका है। दुनियाभर में भारत की भूमिका अग्रणी है। हैदराबाद इसके निमित्त एक केंद्र अथवा क्लस्टर बन कर उभरा है। इसे आसानी से ऐसे समझ सकते हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्लस्टर इलेक्ट्रॉनिक हब है, जबकि हैदराबाद क्लस्टर फार्मा और वैक्सीन के निर्यात का देश में सबसे बड़ा हब है। हैदराबाद क्लस्टर में ही दुनिया की करीब एक तिहाई वैक्सीन बनती हैं। अब इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्लस्टर और फार्मा से जुड़ी कंपनियों को हैदराबाद क्लस्टर में संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

गत 9 दिसंबर को साठ से अधिक देशों के मिशन प्रमुखों को हैदराबाद की बॉयोटेक कंपनियों के दौरे पर ले जाया गया। इस दल ने हैदराबाद की भारत बायोटेक और बायोलॉजिकल ई जैसी अग्रणी बायोटेक कंपनियों का दौरा किया। यह अपनी तरह की पहली यात्रा है और इसके बाद अन्य शहरों में अन्य सेक्टर की सुविधाओं को देखने के लिए दौरे आयोजित किए जाएंगे। ‘जो दिखता है वह बिकता है’ की अवधारणा के तहत देश में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा।

उल्लेखनीय है कि भारत की परंपरागत सोच के अनुरूप प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि भारत की वैक्सीन उत्पादन और वितरण क्षमता का उपयोग इस संकट से लड़ने और पूरी मानवता की मदद करने के लिए किया जाएगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता है। दौरे का असर यह होगा कि कई देश भारत में इस सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षित हो सकेंगे। देश के राज्यों में उद्योग की दृष्टि से कई तरह के क्लस्टर हैं जहां निवेश का आकर्षण बढ़ रहा है। अमदाबाद, वडोदरा (भरुच-अंकलेश्वर क्लस्टर), मुंबई-औरंगाबाद, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नै और तिरुपति-नेल्लोर क्लस्टर भी निवेशकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाले क्लस्टर हैं। पुणे-औरंगाबाद आॅटो और आॅटो पुर्जों का हब है। आधारभूत ढांचे को ठीक करने और निवेशकों को आकर्षित करने की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो जल्द ही भारत का ध्वज दुनिया में शीर्ष पर होगा।     (लेखक वरिष्ठ अर्थविश्लेषक हैं)