वेब सीरीज : बेलगाम ओटीटी मंचों पर नकेल

    दिनांक 22-दिसंबर-2020
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विशाल ठाकुर

नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम, हॉटस्टार जैसे ओटीटी मंचों और दूसरे डिजिटल माध्यमों पर परोसी जाने वाली फिल्मों और वेब धारावाहिकों के जरिए लगातार सामाजिक आस्था और संवैधानिक व्यवस्था पर चोट की जा रही है। इस पर नकेल कसने के लिए केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर हाल ही में एक अध्यादेश जारी किया
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‘अ सूटेबल ब्वॉय’ वेब धारावाहिक के एक दृश्य में कबीर दुर्रानी और लता
ओटीटी मंचों पर प्रदर्शित फिल्मों, वेब सीरीज या अन्य मनोरंजक सामग्री को लेकर विवाद नया तो नहीं है, पर कुछ समय से ऐसे मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। विभिन्न ओटीटी मंचों पर परोसी जा रही अधिकांश सामग्री में अश्लील दृश्य, हिंसा और गालियों की भरमार होती है। कई बार किसी पात्र के नाम या रीति-रिवाज या हिन्दू देवी-देवताओं और भारतीय संस्कृति का भी अपमान किया जाता है। मनोरंजन और रचनात्मकता की चाशनी में लिपटी ऐसी सामग्री अक्सर आतंकवाद, इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों और लव जिहाद को बढ़ावा देती प्रतीत होती हैं। भारतीय समाज और युवा पीढ़ी के लिए ऐसी सामग्री धीमे जहर की तरह है, जो युवाओं को धीरे-धीरे अपने धर्म-संस्कार, परंपरा, परिवार और देश से दूर ले जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण नेटफ्लिक्स पर प्रसारित मीरा नायर निर्देशित वेब सीरीज ‘अ सूटेबल बॉय’ है, जिसमें मंदिर परिसर में एक मुस्लिम युवक को हिन्दू युवती का चुंबन लेते दिखाया गया है। विवादास्पद सामग्री प्रसारण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर हाल ही में केंद्र सरकार ने ओटीटी मंचों तथा अन्य आनलाइन डिजिटल माध्यमों पर परोसी जा रही आपत्तिजनक सामग्री की निगरानी के लिए एक अध्यादेश जारी किया है।

ओटीटी तथा आॅनलाइन डिजिटल मीडिया मंचों पर परोसी जाने वाली विवादित और आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाने व इनके नियमन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। खासकर बीते 2-3 वर्ष में जिस प्रकार धड़ल्ले से वेब सीरीज या फिल्मों में विवादास्पद सामग्री परोसने के मामले बढ़े हैं, उन्हें सरकार ने गंभीरता से लिया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ओटीटी मंच सिनेमैटोग्राफी अधिनियम के तहत नहीं आते, जिसके कारण इन पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती। साथ ही, इन पर दिखाई जाने वाली सामग्री पर नियंत्रण के लिए भी कोई कानून नहीं होने के कारण इनकी मनमानी बढ़ रही थी। लेकिन हाल में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया है, जिसके तहत नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, अमेजॉन प्राइम सरीखे अन्य ओटीटी मंचों तथा आॅनलाइन डिजिटल माध्यमों पर दिखाई जाने वाली सामग्री को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाया गया है।

चुंबन की आड़ में लव जिहाद तो नहीं?

देश में लव जिहाद को लेकर बहस गर्म है। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश और हरियाणा भी इस संबंध में एक कानून लाने की तैयारी में हैं। इसी बीच, नेटफ्लिक्स पर प्रसारित वेब सीरीज ‘अ सुटेबल ब्वॉय’ चर्चा में है। इसमें एक मुस्लिम युवक द्वारा मंदिर में हिन्दू लड़की के चुंबन वाले दृश्य के अलावा, कई आपत्तिजनक दृश्यों के विरुद्ध भाजपा के राष्ट्रीय सचिव गौरव तिवारी की शिकायत पर रीवा (मध्य प्रदेश) में नेटफ्लिक्स के दो अधिकारियों, नेटफ्लिक्स की उपाध्यक्ष (सामग्री) मोनिका शेरगिल तथा निदेशक (जन नीति) अंबिका खुराना के विरुद्ध भादंसं की धारा 295 (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गौरव का आरोप है कि फिल्मों में ऐसे दृश्यों से लव जिहाद को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने वेब सीरीज से आपत्तिजनक दृश्यों को तत्काल हटाने, इसका प्रसारण बंद करने तथा नेटफ्लिक्स से इस कृत्य के लिए माफी मांगने की मांग की है। उनका आरोप है कि ये दृश्य महेश्वर घाट स्थित शिव मंदिर के प्रांगण में फिल्माए गए हैं। मंदिर में ऐसे दृश्य का फिल्मांकन महज संयोग नहीं है, बल्कि हिन्दू भावनाओं को आहत करने तथा लव जिहाद को बढ़ावा देने का प्रयास है। होल्कर राजवंश और महारानी अहिल्याबाई द्वारा निर्मित महेश्वर घाट पर ऐसे दृश्य फिल्माना सरासर शिवभक्तों का अपमान है। यह एक सोची-समझी साजिश है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि अधिकारियों की जांच में पाया गया कि ‘अ सुटेबल ब्वॉय’ के विवादित दृश्य इसी मंदिर में फिल्माए गए हैं।

विक्रम सेठ के उपन्यास पर वेब सीरीज
1993 में विक्रम सेठ लिखित 1500 पन्नों का उपन्यास ‘अ सुटेबल ब्वॉय’ भारत में रहने वाले चार परिवारों की कहानी पर आधारित है। साहित्य जगत में यह उपन्यास काफी चर्चित हुआ। यथार्थवाद, भव्यता और विस्तृत श्रेणी के चलते इसकी तुलना लियो तोलस्तॉय के ‘वार एंड पीस’ उपन्यास तक से की गई। इसकी की गिनती दुनिया के सबसे लंबे उपन्यासों में होती है। कहा जाता है कि चर्चित होने के कारण लोगों ने उपन्यास खरीद तो लिया, पर अधिकतर लोग इसे पूरा पढ़ नहीं सके। उपन्यास में 19 अध्याय हैं, जिनमें सैकड़ों किरदार समाहित हैं। इसे बेस्टसेलर का खिताब हासिल है, दुनियाभर में जिसकी 30 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। ‘अ सूटेबल ब्वॉय’ एक हिन्दू लड़की लता की कहानी है, जिसके लिए उसकी मां एक सुयोग्य वर की तलाश में है। कहानी की पृष्ठभूमि आजादी के बाद देश में पहले आम चुनाव से पहले (1950) की है। लता के जीवन के 18 महीनों के सफर के चित्रण के साथ इस उपन्यास में उस दौर के उच्च वर्ग परिवारों की रईसी के किस्से हैं तो कुलीन वर्ग के घरों की अंदरूनी विकृतियां भी हैं। इसमें निचले तबके का संघर्ष, आजादी के साथ मिली घोर गरीबी, हिन्दू-मुस्लिम तनाव और नई करवट ले रहे भारतीय समाज का ताना-बाना प्रस्तुत किया गया है। बता दें कि विक्रम सेठ की मां लीला सेठ भारत के उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला थीं। 1952 में कलकत्ता में जन्मे विक्रम के पिता प्रेम नाथ सेठ बाटा शूज में एग्जीक्यूटिव थे। विक्रम सेठ को पद्मश्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार के साथ ‘आॅर्डर आफ द ब्रिटिश एम्पायर’ जैसे सम्मान से नवाजा जा चुका है। लेकिन विक्रम जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के विरोध का समर्थन कर विवादों में भी रह चुके हैं। वे समलैंगिकता के समर्थक हैं। कहा जाता है कि सेठ खुद भी समलैंगिक हैं। इसके अलावा, वे 2009 में जयपुर में आयोजित एक साहित्य समारोह में मेहमानों के साथ चर्चा के दौरान शराब पीने के कारण भी विवादों में घिर चुके हैं।

सलाम बॉम्बे, कामसूत्र, मानसून वेडिंग, द नेमसेक जैसी फिल्में बनाने वाली मीरा नायर ने इस उपन्यास पर छह किस्तों की एक वेब सीरीज बनाई है। इसकी पटकथा एंड्रूज डेविस ने लिखी है। मुख्य रूप से बीबीसी टेलीविजन पर प्रसारित यह वेब सीरीज अब नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। इसमें लता की भूमिका तान्या मनिकलता ने, जबकि मुस्लिम युवक कबीर दुर्रानी का किरदार अभिनेता दानिश रिजवी ने निभाया है। लता को कबीर पसंद है, पर उसकी मां रूपा (माहिरा कक्कड़) उसे पसंद नहीं करती। बाद में लता की जिंदगी में दो और लड़के आते हैं, जिनमें से एक से उसका विवाह होता है। इसमें तब्बू एक तवायफ की भूमिका में हैं, जिसका नाम सईदा बेगम है। माड़ के महाराजा (मनोज पाहवा) सईदा की हवेली में आते-जाते हैं और उसका उत्पीड़न करते हैं। वहीं, मान कपूर (इशान खट्टर) एक राजनेता महेश कपूर (राम कपूर) का बेटा है, जो सईदा बाई से प्रेम करता है। इसमें दोनों के बीच कई अंतरंग दृश्य भी हैं। अगर मंदिर के प्रांगण में चुंबन और तब्बू-इशान के बीच अनावश्यक अंतरंग दृश्य नहीं होते तो यह वेब सीरीज लोगों के दिलों में अपनी जगह बना सकती थी। मूल रूप से अंग्रेजी में निर्मित यह सीरीज हिन्दी में डब की गई है, जिससे लगता है कि इसे केवल पश्चिमी देशों के दर्शकों को लुभाने के लिए ही बनाया गया है। इसके अलावा भी कई बातें हैरान करती हैं। जैसे-उस जमाने में कॉलेज के छात्र-छात्राओं का बेधड़क एक-दूसरे से मिलना, बाजार में, घाट पर, अकेले नाव की सवारी जैसे दृश्य गले से नहीं उतरते। वैसे तो उपन्यास ऐसे किसी ऐतिहासिक घटनाक्रम और माहौल को लेकर कोई दावा नहीं करता, पर एक पाठक से इतर जब एक दर्शक के रूप में हम ऐसी चीजें देखते हैं जो आसानी से गले से नहीं उतरतीं, तब लगता है कि बार-बार जान-बूझकर तो ऐसा नहीं किया जाता है?
20_1  H x W: 0 वेब सीरीज ‘लैला’ के एक दृश्य में आरिफ जकारिया

थम नहीं रहा सिलसिला
इन दिनों शायद ही कोई ऐसा महीना हो, जब ओटीटी मंचों पर दिखाई जाने वाली वेब सीरीज या फिल्म में किसी विवादित दृश्य पर हंगामा न मचे। हिंसा, गाली-गलौज, फूहड़ कॉमेडी, अश्लीलता, हिन्दुत्व विरोधी और किसी महान व्यक्ति की छवि को धूमिल करने से लेकर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करना आम बात हो गया है। साथ ही, ऐसे मंचों पर भारतीय सेना को बदनाम करने या धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली सामग्री भी परोसी जा रही है। मस्तराम, चरित्रहीन, गंदी बात, कविता भाभी, वर्जिन भास्कर, लस्ट स्टोरीज जैसी वेब सीरीज और फिल्मों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि दर्शकों को किस मंशा से लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि ओटीटी मंचों पर सेना-पुलिस की जांबाजी, देशप्रेम, स्वस्थ सामाजिक, रोमांस और कॉमेडी फिल्में भी होती हैं। लेकिन मोटे तौर पर कहें तो आम भारतीय दर्शक इन मंचों पर उपलब्ध सामग्री को परिवार के साथ नहीं देख सकता।

आश्रम : मात्र तीन महीने के अंतराल पर प्रदर्शित वेब सीरीज आश्रम-2 में भी वही सब दिखाया गया, जिसे लेकर पूर्व में विरोध हो चुका है। एमएक्स प्लेयर पर प्रदर्शित इस सीरीज के निर्देशक प्रकाश झा हैं। मुख्य भूमिका में बॉबी देओल हैं। इसकी कहानी काल्पनिक किरदार बाबा निराला काशीपुर वाला पर आधारित है, जिस पर लोगों का अटूट विश्वास है। इसमें बाबा निराला को बाहरी तौर पर आध्यात्मिक प्रवृत्ति का, जबकि भीतरखाने छल-प्रपंच से भरा दिखाया गया है। बाबा के आश्रम में महिलाएं सेवा करती हैं, जहां राजनेताओं का भी आना-जाना है। दरअसल, ये कुछ ऐसे फॉर्मूले हैं, जिसके जरिए फिल्मकार मनमानी करते हैं। सेवादार महिलाओं के यौन उत्पीड़न के साथ फिल्मकार यह दिखाने से बाज नहीं आते कि बाबा के संबंध राजनेताओं से हैं, इसलिए उनके द्वारा धन-संपत्ति अनैतिक तरीकों से ही अर्जित की गई होगी। आश्रम सीरीज भी इसी मानसिकता को लेकर बनाई गई है, जिसमें संत समाज और उनकी गतिविधियों पर सवाल खड़े किए गए हैं।

लैला: नेटफ्लिक्स पर वेब सीरीज ‘लैला’ में भी कथित ‘धार्मिक कट्टरता’ को चरम पर दिखाया गया है। दीपा मेहता, पवन शंकर और शंकर रामन द्वारा संयुक्त रूप से निर्देशित इस सीरीज में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकर हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा की आड़ में अन्य मजहब-पंथों पर अत्याचार, महिलाओं और बच्चियों का शोषण किया जा रहा है। इसी नाम से प्रयाग अकबर की पुस्तक पर आधारित इस वेब सीरीज में दिखाया गया है कि इधर हिन्दुत्व का बोलबाला है, जिसकी वास्तविकता बहुत भयानक है। इस वेब सीरीज पर भी तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।

पाताल लोक: अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की फिल्म निर्माण कंपनी द्वारा निर्मित इस वेब सीरीज पर आरोप है कि इसमें हिन्दू, सिख और गोरखा समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ साम्प्रदायिक और जातीय सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की गई है। इसे लेकर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि इसमें उत्तर प्रदेश के एक भाजपा विधायक की फोटो के साथ छेड़छाड़ की गई थी।

सेक्रेड गेम्स: नेटफ्लिक्स पर ही प्रसारित एक अन्य सीरीज सेके्रड गेम्स (भाग 1-2) को लेकर भी विवाद हो चुका है। यह वेब सीरीज विक्रम चंद्रा द्वारा इसी नाम से लिखित उपन्यास पर आधारित है। इसमें शुरू से अंत तक हिन्दू-मुस्लिमों के बीच विवाद और तनाव बढ़ाने वाले घटनाक्रमों को दिखाया गया है। साथ ही, हिन्दुओं और सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली तमाम बातें शामिल हैं। इस सीरीज में अभिनेत्री राधिका आप्टे ने कई अश्लील दृश्य दिए थे। इस पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एवं शिरोमणि अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे बंद करने की मांग की थी।
 
ट्रिपल एक्स सीजन-2 : निर्माता एकता कपूर पर भी कई बार आरोप लग चुके हैं कि वे अपने प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले फूहड़ता और अश्लीला परोसती हैं। उनके ओटीटी मंच आल्टबालाजी पर ऐसी अश्लील सामग्री की भरमार है। ‘गंदी बात’ और ‘ट्रिपल एक्स’ जैसे कार्यक्रम इसके उदाहरण हैं। ‘ट्रिपल एक्स’ में उन्होंने भारतीय सेना की वर्दी को आपत्तिजनक ढंग से प्रस्तुत करने के साथ राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों का भी अपमान किया है। इसे लेकर दो स्थानीय लोगों की शिकायत पर इंदौर में उनके खिलाफ भादंसं की धारा 294 (अश्लीलता फैलाने) तथा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने) का मामला दर्ज किया गया था। पिछले दिनों एकता ने इस मामले को रद्द करने को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में गुहार भी लगाई थी, जिसे अदालत ने रद्द कर दिया।

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‘पाताल लोक’ में हिन्दुओं को साम्प्रदायिक दिखाने का प्रयास किया गया है

सरकार का शिकंजा

ओटीटी मंचों और इसके ग्राहकों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। खासकर लॉकडाउन के दौरान जब सिनेमाघर बंद थे, तो ओटीटी मंच ही लोगों के मनोरंजन का सहारा थे। एक अनुमान के अनुसार, 2023 तक ओटीटी मंचों का बाजार 3़60 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा,जो 2018 तक महज 35,000 करोड़ रुपये था। लगभग 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे इस बाजार को सस्ते इंटरनेट और तेज स्पीड की वजह से अत्यधिक प्रोत्साहन मिला है। ओटीटी तथा अन्य आॅनलाइन डिजिटल मंचों पर परोसे जाने वाली आपत्तिजनक सामग्री के नियमन और नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की मांग काफी समय से की जा रही थी।

इसे देखते हुए सरकार ने नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम, हॉटस्टार सरीखे ओटीटी मंचों तथा आॅनलाइन डिजिटल माध्यमों दिखाई जाने वाली सामग्री को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाने का फैसला किया है। इस संबंध में एक अधिसूचना जारी करने के साथ इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-77 के उपबंध-3 के अंतर्गत यह अध्यादेश जारी किया है। इसके लिए सरकार ने व्यवसाय का आवंटन अधिनियम, 1961 में संशोधन किया है। इस अध्यादेश के जरिए इन मंचों पर प्रसारित की जा जाने वाली सामग्री पर निगाह रखी जाएगी। यानी अब निर्माताओं को सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।