सूचनाओं का पुख्ता तंत्र है कल का मंत्र

    दिनांक 23-दिसंबर-2020
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

ऐसा नहीं लगता कि ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेन्सी का विकास किसी आपराधिक मकसद से हुआ और यह तकनीकी दुनिया में सक्रिय ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो मुक्त की अवधारणा में यकीन रखते हैं-जैसे मुक्त सॉफ्टवेयर, मुक्त कोड, मुक्त सूचनाएं, मुक्त लेन-देन आदि। लेकिन इनके लाभ असाधारण हैं
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दुनिया के लेन-देन तथा सूचना संग्रहण प्रणालियों का भविष्य है ब्लॉकचेन में

ब्लॉकचेन दुनिया भर में फैले लाखों कंप्यूटरों पर सूचनाओं को कूट (एनक्रिप्टेड) संकेतों के रूप में सुरक्षित रखने की प्रणाली है। यह हर क्षेत्र में क्रांति लाने की क्षमता रखती है जिसमें सूचनाओं को सुरक्षित रखने या उनके आदान-प्रदान की जरूरत पड़ती है। बैंकिंग क्षेत्र इनमें से एक है। ब्लॉकचेन तथा क्रिप्टोकरेन्सी में सरकारी प्रमाणन, सरकारी तंत्र, प्रक्रियाओं तथा सरकारी नियंत्रणों की कोई खास गुंजाइश नहीं है। यह लेन-देन का वैकल्पिक तथा स्वतंत्र जरिया है। इसके प्रति सरकारों की भृकुटियां तनी रहती हैं क्योंकि धन का लेन-देन यदि किसी भी तरह के नियंत्रण से मुक्त हो जाए तो फिर उसमें अपराध, धनशोधन तथा धन की तस्करी जैसी आशंकाएं स्वाभाविक रूप से पैदा हो जाती हैं। यही ब्लॉकचेन के साथ हो भी रहा है।

 आपने कई ऐसे साइबर अपराध के बारे में पढ़ा-सुना होगा जिनमें किसी व्यमिुक्त से बिटकॉइन के रूप में फिरौती मांगी जाती है। इसमें एक तो भौतिक रूप से नकदी का लेन-देन नहीं होता, दूसरे एक से दूसरे व्यक्ति तक आभासी मुद्रा के आने-जाने का कहीं किसी सरकारी तंत्र में रिकॉर्ड नहीं होता इसलिए यह अंतरराष्ट्रीय लेन-देन का भी आसान माध्यम बन गया है। हवाला जैसी चीजें इसके सामने पानी भरती हैं।

हालांकि ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेन्सी का विकास किसी आपराधिक मकसद से हुआ, ऐसा नहीं जान पड़ता और तकनीकी दुनिया में सक्रिय ऐसे लोगों के दिमाग की उपज है जो मुक्त की अवधारणा में यकीन रखते हैं-जैसे मुक्त सॉफ्टवेयर, मुक्त कोड, मुक्त सूचनाएं, मुक्त लेन-देन आदि। किंतु इसकी मजबूतियां कहिए या कमजोरियां कि यह गलत तत्वों के बीच आसानी से लोकप्रिय हो गई है।

हालांकि हैकरों द्वारा क्रिप्टोकरेन्सी का काफी इस्तेमाल हो रहा है लेकिन खुद क्रिप्टोकरेन्सी या ब्लॉकचेन साइबर चुनौतियों से काफी हद तक सुरक्षित है। ब्लॉकचेन दुनियाभर में फैले कंप्यूटरों में सूचनाओं को सुरक्षित रखने वाले लाखों ब्लॉकों की श्रृंखला है जो एक तरह की खाताबही या लेजर के रूप में काम करती है। इन सभी में लेनदेन की एक समान सूचनाएं दर्ज होती हैं। अगर कोई हैकर इस लेजर को हैक करके यह प्रविष्टि करना चाहे कि कुछ लोगों ने उसके खाते में दस हजार डॉलर की रकम स्थानांतरित की है तो उसके लिए ऐसा करना मुश्किल होगा, क्योंकि वह इस तरह के अनगिनत ब्लॉकों की श्रृंखला पैदा नहीं कर सकता यानी लाखों कंप्यूटरों में प्रविष्टि नहीं कर सकता।
ब्लॉकचेन की बहुत सी विशेषताएं हैं, जैसे-
  •  विकेंद्रीकृत प्रणाली, किसी के द्वारा नियंत्रित नहीं
  •  किसी प्रकार की सेंसरशिप और प्रशासनिक दबावों से मुक्त
  •  किसी एक क्षेत्र या देश की परिस्थितियों से अप्रभावित
  •  सूचनाएं कूट संकेतों में होने के कारण पूरी तरह सुरक्षित
  • अनेक प्रतियां मौजूद होने के कारण हैकिंग असंभव
  •  इसी कारण से सूचनाएं पूरी तरह पारदर्शी
  •  सभी को इसका इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता
  •  भरोसेमंद प्रणाली
  •  प्रविष्टियां स्थायी रूप से दर्ज, बदलाव करना संभव नहीं
  •  लोगों के बीच सहयोग पर आधारित किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं
  •  न्यूनतम खर्च पर संचालित
माना जा रहा है कि अगर सब कुछ सुरक्षित ढंग से होने लगे या किसी तरह से सरकारी नियमों तथा नियंत्रणों को लागू किया जा सके तो, दुनिया की लेन-देन तथा सूचना संग्रहण प्रणालियों का भविष्य ब्लॉकचेन में निहित है। जैसे इन्हें देखिए-
  1.  फर्जी डिग्रियों की समस्या: कल्पना कीजिए कि बहुत सारे विश्वविद्यालय मिलकर एक तंत्र बना लें जिसमें उनके सभी छात्रों की डिग्रियों का ब्योरा तमाम दूसरी सूचनाओं के साथ ब्लॉकचेन डेटाबेस में सहेजा जाएगा। चूंकि हर डिग्री का विवरण सैंकड़ों स्थानों पर मौजूद होगा इसलिए फर्जी डिग्री की जांच बेहद आसान हो जाएगी। कोई हैकिंग भी करेगा तो आखिरकार कितने स्थानों पर कर सकेगा और किस-किस जगह के रिकॉर्ड में हेरफेर कर सकेगा? प्राकृतिक आपदाओं से लेकर दुर्घटनाओं तक में डिग्रियों के नष्ट हो जाने की स्थिति में यह कितना कारगर उपाय सिद्ध हो सकेगा? अनेक बार अपने देश में प्रताड़ित लोग दूसरे देशों में शरण लेते हैं। वे अपनी पढ़ाई-लिखाई का रिकॉर्ड साथ लेकर नहीं जा पाते। ब्लॉकचेन व्यवस्था लागू हुई तो यह समस्या नहीं रह जाएगी। रोजगार पाने की स्थिति में कंपनियों के लिए डिग्रियों की पुष्टि करना बेहद आसान हो जाएगा।

  2.  भुगतान की समस्या: फिलहाल ज्यादातर शैक्षणिक संस्थानों में फीस का भुगतान चेक, नकद, नेटबैंकिंग या प्लास्टिक मुद्रा के जरिए किया जाता है। यह खर्चीला भी है और भुगतान के रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ भी हो सकती है। अगर यही काम ब्लॉकचेन के जरिए किया गया तो खर्च नाम-मात्र का ही रह जाएगा और भुगतान की प्रामाणिकता भी असंदिग्ध रहेगी। कोई शक है तो तुरंत पुष्टि कर लीजिए। अगर संभावना बनी तो यहां पर बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल भी हो सकता है। आज नहीं तो भविष्य में कभी।

  3.  नकली पहचान पत्रों की समस्या: ज्यादातर महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों के लिए छात्रों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली फर्जी आईडी (पहचान पत्र) एक बड़ी समस्या है। शैक्षणिक संस्थान का पहचान पत्र रखने के कई फायदे हैं, जैसे बस या ट्रेन आदि के किरायों में छूट, सॉफ्टवेयरों की कीमतों में रियायत और अनेक संस्थानों में नि:शुल्क या रियायती दरों पर सदस्यता लेने की सुविधा। दूसरी तरफ कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर और ग्राफिक्स सॉफ्टवेयरों की सुलभता के मौजूदा दौर में नकली आईडी बनाना बेहद आसान काम हो गया है। अगर पहचान पत्रों का रिकॉर्ड ब्लॉकचेन के जरिए रखा जाने लगा तो इस समस्या का असरदार समाधान हो जाएगा। जरा भी शक हुआ तो तुरंत पुष्टि करके देखिए कि पहचान पत्र असली है या नकली।

  4.  नकली दवाओं की रोकथाम: नकली दवाओं की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है और वे गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। धन की बर्बादी हो रही है सो अलग है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि दवाएं ऐसे स्रोतों से आती हैं जिनकी पुष्टि करना संभव नहीं हो पाता, जैसे कि विदेशी निर्माताओं के जरिए या छोटे निर्माताओं के जरिए। अगर दवाओं का निर्माण करने वाली लाइसेंसशुदा कंपनियों, दवाओं की सप्लाई की श्रृंखला आदि का ब्योरा ब्लॉकचेन में सुरक्षित है, तो दवाओं की प्रामाणिकता की पुष्टि करना आसान हो जाएगा।

  5.  मरीजों की सूचनाएं: ब्लॉकचेन मरीजों की सेहत का डेटा सहेजने और सुरक्षित रखने में मदद कर सकेगी। मान लीजिए कि भारत में ऐसा एक समग्र ब्लॉकचेन डेटाबेस निर्मित किया जाता है जिसमें हमारे प्रत्येक नागरिक की सेहत का ब्योरा मौजूद रहेगा तो फिर चिकित्सा की प्रक्रिया को ज्यादा कारगर बनाने में मदद मिलेगी। तपेदिक जैसी बीमारियों की दवाओं का लंबे समय तक नियमित रूप से लिया जाना जरूरी है लेकिन यही इन बीमारियों की रोकथाम के रास्ते में बहुत बड़ी चुनौती है। लापरवाह रोगियों पर निगाह रखने और उनका डेटा सहेजने में भी ब्लॉकचेन की भूमिका हो सकती है। फर्जी डॉक्टरों से निपटने का भी यह कारगर साधन सिद्ध हो सकती है।

  6. स्वास्थ्य बीमा: स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसकी और भी कई उपयोगिताएं हो सकती हैं, जैसे कि स्वास्थ्य बीमा। ऐसे बीमा के फर्जी मामलों को रोकना संभव हो सकेगा क्योंकि मरीज की सेहत से संबंधित प्रामाणिक सूचनाओं को एक्सेस करना आसान हो जाएगा। दूसरी तरफ बीमा कंपनियों द्वारा किसी का दावा गलत ढंग से ठुकरा दिए जाने के मामलों में भी कार्रवाई हो सकेगी। सरकार को नागरिकों के स्वास्थ्य पर नजर रखने, बीमारियों की मौजूदा स्थिति को जानने, नए संक्रमणों के प्रति सतर्क रहने और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के सामने मौजूद खतरों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी। डेटा का विश्लेषण करना भी आसान हो जाएगा और ऐहतियाती रणनीतियां तैयार करना भी।

  7.  फेक न्यूज: फर्जी खबरों की समस्या का समाधान करने के जो कुछ रास्ते सामने आए हैं, उनमें जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक है वहीं ब्लॉकचेन को भी दूसरा रास्ता माना जा रहा है। आमतौर पर किसी असली खबर को संपादित करके या उसमें कुछ काटकर या कुछ जोड़कर फेक न्यूज के रूप में पेश किया जाता है। अगर प्रामाणिक खबरों को ब्लॉकचेन डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाए तो उनके साथ छेड़छाड़ करना मुश्किल होगा, क्योंकि किसी भी नकली खबर की पुष्टि बहुत आसानी से की जा सकेगी। इतना ही नहीं, खबरें बनाने वाले पत्रकारों, रिपोर्टरों, संपादकों आदि का भी ब्योरा रखा जा सकेगा जिससे हर खबर की तह तक जाना संभव हो सकेगा।
     (लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)