2.62 करोड़ एलईडी बल्ब्स की बदौलत यूपी ने बचाए 1,363 करोड़ रूपए

    दिनांक 23-दिसंबर-2020
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उत्तर प्रदेश सरकार ऊर्जा संरक्षण की दिशा में बेहतर प्रयास कर रही है. उजाला योजना में उत्तर प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 62 लाख एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं. इससे वार्षिक 3,407 मिलियन यूनिट बिजली और 1,363 करोड़ रुपये की बचत हो रही है. पीक आर्स में मांग 682 मेगावाट घटी है. 2.76 मिलियन टन कार्बन का उत्सर्जन में भी कमी हुई है. इसके एलईडी स्ट्रीट लाइट, बल्ब, स्टार रेटेड उपकरणों के उयोग से अब तक पीक डिमांड में 3413 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है. पैट योजना के तहत 25 उद्योगों ने ही 8,066 मिलियन यूनिट बिजली की बचत की है.
वर्तमान समय में 12 लाख निजी नलकूप लगे हैं. इन सभी को ‘एनर्जी दक्ष’ पम्पों से बदलने का कार्य किया जा रहा है. इससे करीब 400 करोड़ यूनिट ऊर्जा की बचत होगी. प्रथम चरण में 9000 पम्प बदलने का कार्य प्रगति पर है. वहीं पीएम की कुसुम योजना में अभी तक कुल 25,975 निजी नलकूपों को सौर पम्पों में बदला गया है. पीएम कुसुम योजना में किसान अनुपजाऊ भूमि पर सोलर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट के सोलर प्लांट भी लगा सकेंगे. ऊर्जा खपत को कम करने के लिए 2.82 लाख ऑफग्रिड सोलर स्ट्रीट लाइट्स भी लगाई गई है.
अयोध्या, मथुरा, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर को क्लीन एवं ग्रीन एनर्जी का मॉडल टाउन बनाया जाएगा. चरणबद्ध तरीके से 2024 तक इन शहरों को सौर ऊर्जा उत्पादन में दक्ष बनाकर सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा. इन शहरों में घरों की छतों से 669 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा. तय किए गए लक्ष्य के क्रम में केंद्र सरकार द्वारा 859 करोड़ व राज्य सरकार द्वारा 473 करोड़ रुपये का अनुदान भी उपभोक्ताओं को दिया जाएगा. पूर्व की सरकार में प्रदेश में केवल 36 मेगावाट के सोलर रूफटॉप प्लांट थे. भाजपा की सरकार आने के बाद इसमें 6 गुना की बढ़ोतरी करते हुई. अब इसे बढ़ाकर 200 मेगावाट तक पहुंचाया गया. सभी सरकारी बिल्डिंग्स पर सोलर रूफटॉप लगवाने की योजना पर कार्य हो रहा है.
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि “ अब तक 1657 मेगावाट की 48 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं. इसमें 8,285 करोड़ का निवेश भी हुआ है. 3 हजार करोड़ रूपये की लागत से 600 मेगावाट का मेगा सोलर पार्क भी बनाने की दिशा में काम चल रहा है. अभी हम कुल ऊर्जा खपत का 6% सौर ऊर्जा के माध्यम से उपयोग करते हैं. 2024 तक इसे 15% करने का लक्ष्य रखा गया है. आने वाला समय चुनौतियों वाला है. अभी हम ऊर्जा जरूरतों के लिए पेट्रो रसायनों और कोयले पर निर्भर हैं. आने वाला समय इलेक्ट्रिक व्हीकल का है, पर्यावरण हितैषी साधनों का है, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का है. दुनिया के कई देश 2030 के बाद पेट्रोल व डीजल का उपयोग बंद करने जा रहे हैं. हम भी पर्यावरण संरक्षण की इस अभियान हिस्सा बनें. ऊर्जा संरक्षण को लेकर किये जा रहे प्रयासों को प्रदेश के सभी विद्यालयों तक ले जाया जाएगा. सभी स्कूलों को ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कराई जा रही प्रतियोगिताओं में सम्मिलित किया जाएगा. इस अभियान में सबसे बड़ा योगदान यदि किसी का हो सकता है तो वो स्कूली बच्चे हैं. वे हमारे ऊर्जा संरक्षण के ब्रांड एम्बेसडर हैं."