बढ़ता सलीब और जिहाद का साया

    दिनांक 24-दिसंबर-2020   
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गत कुछ समय से पंजाब में खालिस्तानी, अलगाववादी, नक्सली, मिशनरी और जिहादी तत्वों की गतिविधियां बढ़ गई  हैं। समय रहते इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया तो समस्या विकराल हो सकती है

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जगरांव (पंजाब) का एक चर्च। इस तरह के चर्च राज्य के हर क्षेत्र में बन रहे हैं

पंजाब की धरती पर देश-विरोधी तत्वों की बुरी नजर पड़ चुकी है। इसके लिए कुछ उदाहरण देख सकते हैं। दशहरे के दिन जब पूरा देश बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतलों का दहन कर रहा था, उसी समय अमृतसर के मानावाला कस्बे के पास कुछ युवक भगवान श्रीराम का पुतला जलाने का अपराध कर रहे थे। सिखों के पांच तख्तों में से एक श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह 6 जून को आॅपरेशन ब्ल्यू स्टार की बरसी पर कह चुके हैं, ‘‘अगर केंद्र सरकार खालिस्तान देती है तो सिख इसे अस्वीकार नहीं करेंगे।’’ दूसरी ओर पंजाब में चल रहे कथित किसान आंदोलन के दौरान दिखने वाले नक्सली चेहरे व लगाए जा रहे खालिस्तानी नारे बताते हैं कि राज्य में बह रही बयार किस कदर विषाक्त हो चुकी है। पंजाब अर्थात् पांच नदियों की यह पावन धरती वर्तमान में पांच अपवित्र धाराओं से त्रस्त दिख रही है।
पंजाब की आबोहवा में रह-रह कर खालिस्तानी दुर्गंध फैलना सामान्य-सी बात हो चुकी है। पिछले महीने तरनतारन में शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या कर दी गई। बलविंदर सिंह आतंकवाद के समय अनेक आतंकी हमलों का बहादुरी से मुकाबला कर चुके थे।
अभी ताजा मामले में 15 दिसंबर को पुलिस ने खालिस्तानी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। अमृतसर (ग्रमीण) पुलिस ने विशेष सूचना के आधार पर खालिस्तानी गतिविधियों से संबंधित पाकिस्तान आधारित तस्करों समेत अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के द्वारा सरहद पार से ड्रोन के द्वारा नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी करने वाले एक मॉड्यूल के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान लखबीर सिंह उर्फ लक्खा और बचित्तर सिंह के तौर पर हुई है इससे पहले दिल्ली में बब्बर खालसा व जिहादी संगठनों के पांच आतंंकी गिरफ्तार हो चुके हैं।
इन गतिविधियों के बढ़ने से लगता है कि पाकिस्तान ने अपने के-2 प्लान पर काम करना तेज कर दिया है। पंजाब की सीमा से सटी भारत-पाक सीमा पर आए दिन ड्रोन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ड्रोन से नशा ही नहीं, बल्कि हथियार तक भारत पहुंचाने के प्रयास हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी का क्रम निरंतर जारी है।
किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर क्रॉस वाले सिख धरनार्थियों की फोटो वायरल हो रही है। इसमें कोई संदेह नहीं कि पंजाब ईसाई मिशनरियों से सर्वाधिक पीड़ित है।  सिख संगठन कन्वर्जन में कोई बुराई नहीं देखते और यहां तक कि मिशनरियों से सर्वाधिक पीड़ित जिले गुरदासपुर में तो कई गुरुद्वारों में भी ईसाई पर्व मनाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ईसाई बने सिखों द्वारा अपना नाम व आचार-व्यवहार यथावत रखने से इनकी पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है। अब केवल दलित सिख ही नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के लोग भी कन्वर्जन का शिकार हो रहे हैं। गुरदासपुर, बटाला, जालंधर, अमृतसर, तरनतारन व सीमावर्ती जिलों में निरंतर बन रहे चर्च इस बात के साक्षी हैं कि गुरुओं व ऋषि मुनियों की यह धरती चर्च की छाया में जा रही है।
पंजाब में नक्सलवाद को बीत चुकी समस्या माना जाता रहा है परंतु दिल्ली के आसपास चल रहा किसान आंदोलन व इसमें सक्रिय नक्सली विचारधारा के लोग प्रमाण हैं कि नक्सलवाद ने पुन: अपने पंजे गाड़ दिए हैं। हालांकि, वामपंथियों से पंजाब का नाता कोई नई बात नहीं है। 1967 के नक्सली आंदोलन के समय भी पंजाब में वामपंथियों की सक्रियता देखने को मिली थी। उस समय राज्य सरकार द्वारा नक्सली आंदोलन को बलपूर्वक कुचल दिया था। कुछ नक्सली बच गए थे। बाद में इन्हीं लोगों ने पत्रकारिता, साहित्य आदि के जरिए नक्सली विचारधारा को फैलाया। इनमें से एक थे स्व. हरभजन सिंह हलवारवी, जो बाद में एक पंजाबी दैनिक के कई सालों तक संपादक रहे। इन्हें एक आईपीएस अधिकारी सिमरनजीत सिंह मान ने बचाया था।
बता दें कि 1967 में नक्सली आंदोलन शुरू होने के साथ ही यह पंजाब पहुंच गया था। हालांकि यह छात्रों और कुछ बुद्धिजीवियों के बीच में ही लोकप्रिय हुआ। किसी बड़े जननेता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। माकपा और भाकपा के कुछ समर्थक इसमें शामिल हुए थे। सरकार की सख्ती के बाद ये लोग अंदर-अंदर ही काम करते रहे।  80 के दशक की शुरुआत में आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के उभार के साथ सब कुछ बदल गया। वाम आंदोलन में गिरावट शुरू हुई और आॅपरेशन ब्लूस्टार एक मोड़ साबित हुआ।
इसके बाद वामपंथियों ने किसानों के जरिए अपने को मजबूत करना शुरू किया। उनका ज्यादातर आधार उन सिख किसानों के बीच में है, जिनका वाम विचारधारा से कोई खास लेना-देना नहीं है।
सोनिया-मनमोहन सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान आईबी की एक आंतरिक रपट के अनुसार पंजाब में भी नक्सल शक्तियां तेजी से सिर उठा रही थीं। प्रतिबंधित समूह भाकपा (मार्क्सवादी) को देश भर में 128 संगठनों के जरिए चलाया जा रहा है। ये संगठन पंजाब समेत हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल में मौजूद हैं। 2009 में  वामपंथी नेता जय प्रकाश दुबे को पंजाब से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का कहना था कि दुबे पंजाब में नक्सलवाद को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जनवरी, 2013 में अपनी चिंतन शिविर रैली में कहा था कि पंजाब के सभी 22 जिलों में नक्सलवाद सक्रिय हो गया है।
क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह द्वारा हिंदू समाज के प्रति व्यक्त किए गए विचार इस बात का निकृष्टतम उदाहरण है कि राज्य में अलगाववाद किस कदर हावी है। सोशल मीडिया हिंदू विरोधी विचारों से अटा पड़ा है। हिंदुओं की आस्था की प्रतीक गोमाता व पूजा-पद्धति को लेकर अपमानजनक पंजाबी गीत बन रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता रहे श्री सुखपाल सिंह खैहरा तो अपने राजनीतिक हितों के लिए काली दीवाली मनाने तक का आह्वान कर चुके हैं। राज्य में नित नए या साजिश के तहत खड़े किए जा रहे आंबेडकरवादी संगठन जातिवाद की आग को और भड़का कर दलित समाज में अलगाववाद की भावना भर रहे हैं।
वैसे तो सीमावर्ती राज्य होने के कारण पंजाब विदेशी शक्तियों के षड्यंत्रों का शिकार रहा है, परंतु पंजाबियों ने सदैव सामाजिक एकता व भाईचारे से इन शक्तियों के मनसूबों को नाकाम किया है। आज इसी शक्ति को खत्म करने का प्रयास होता दिख रहा है।

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