असम के सांसद बदरुद्दीन अजमल के बालगृहों में आतंकी संगठन अलकायदा करता है फंडिंग, 302 बच्चे भी लापता

    दिनांक 29-दिसंबर-2020
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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि असम और मणिपुर में सांसद बदरुद्दीन अजमल के द्वारा संचालित बालगृहों में फंड का गलत इस्तेमाल हो रहा है। यहां से 302 बच्चे भी गायब हैं। इनका आतंकी संगठन अलकायदा से भी लिंक बताया जा रहा है

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बदरुद्दीन अजमल (बाएं), गोलपारा का बाल संरक्षण गृह (दाएं)
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक जांच में पाया है कि उसे असम और मणिपुर में छह बाल गृहों की ओर से धन का दुरुपयोग किए जाने की जानकारी मिली है। ‘मरकजुल मारिफ’ नाम संस्था के तत्वाधान में चल रहे एक बाल गृह को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय एनजीओ से पैसे मिले हैं, जिसकी जांच आतंकवादी संगठन अल-कायदा से कथित संबंधों को लेकर हो रही है।
आयोग कि टीम ने 25 दिसंबर को यहां दौरा किया था। इस समय इन 6 बाल संरक्षण गृहों में 778 बच्चे रह रहे हैं।
असम के विवादित सांसद बदरुद्दीन अजमल ने इन बाल संरक्षण गृहों की स्थापना की है। इस बारे में लोकसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध उनके बायो में बताया गया है कि इनमें 1010 बच्चे रह रहे हैं। मरकाजुल मारीफ की वेबसाइट पर इनमें 1080 बच्चों के होने की बात बताई गई है। इस तरह से संस्था द्वारा दी गई जानकारी और अन्य आँकड़े अलग-अलग हैं। आयोग का कहना है कि बाकी के 300 बच्चों के बारे में पता करना आवश्यक है।
इन बालगृहों को आईएचएच नाम के अंतरराष्ट्रीय एनजीओ से पैसा मिल रहा है। तुर्की के इस एनजीओ से तुर्की में ही पूछताछ चल रही है, क्योंकि उसके अलकायदा से जुड़ने होने की बात सामने आई है। आयोग ने अभी तक उन बच्चों के डिटेल्स को लेकर कुछ नहीं बताया है, जिन्हें इस एनजीओ से फंडिंग मुहैया कराई है।
आयोग का कहना है कि इन गृहों में 302 बच्चे ऐसे हो सकते हैं, जिनका पंजीकरण नहीं कराया गया है। इन बच्चों के बारे में पता करने का प्रयास किया जा रहा है। दौरा करने गई आयोग की टीम का कहना है कि इस मामल में एनआईए को जांच करके तथ्यों का पूरा पता लगाना चाहिए। साथ ही आयोग ने यह भी कहा है कि इन बाल संरक्षण गृहों में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 सहित कई नियमों का उल्लंघन किया गया है।
रिपोर्ट में यहां के गंदे शौचालयों, लड़कियों के असुरक्ष और बांस के डंडे से पिटाई करने सहित कई ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में रिपोर्ट के बताया गया है। कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं। नियमानुसार बाल संरक्षण गृहों में बच्चों की सुरक्षा का लेकर सीसीटीवी कैमरों का लगाया जाना बेहद जरूरी है। वहां के कर्मचारियों ने भी स्वीकार किया है कि बच्चों को शारीरिक रूप से दंड दिया जाता है।
आयोग की जांच टीम से एक बच्चे ने पिटाई किए जाने की शिकायत भी की है। टीम ने जिन बाल संरक्षण गृहों की जांच की है इनमें से 5 बाल संरक्षण गृह असम के धुबरी, गोलबरा और नगांव, जबकि एक मणिपुर के थौबल में स्थित है। इन सभी का नाम ‘मरकज दारुल यातमा’ रखा गया है। बता दें कि इसी महीने में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा संचालित ‘अजमल फाउंडेशन’ के खिलाफ असम के दिसपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। गुवाहाटी के सीपी एम एस गुप्ता ने बताया था कि यह मामला सत्य रंजन बोराह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद दायर किया गया था, जिसने एनजीओ पर विदेशी फंड प्राप्त करने और संदिग्ध गतिविधियों में इसका इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।