मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से लौटी गन्ने की मिठास

    दिनांक 03-दिसंबर-2020   
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फर्जी बांड गन्ना माफियाओं का सबसे प्रभावी हथियार था। सरकार ने दो लाख से अधिक फर्जी बांड रद्द कर इन माफियाओं की कमर तोड़ दी। पारदर्शिता के लिए गन्ना किसानों का पंजीकरण शुरू किया गया। गन्ना एप लांच किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है कि जब तक खेत में किसानों का गन्ना है, तब तक उस क्षेत्र की मिल को
चलना चाहिए।

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फर्जी बांड गन्ना माफियाओं का सबसे प्रभावी हथियार था। सरकार ने दो लाख से अधिक फर्जी बांड रद्द कर इन माफियाओं की कमर तोड़ दी। पारदर्शिता के लिए गन्ना किसानों का पंजीकरण शुरू किया गया। गन्ना एप लांच किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है कि जब तक खेत में किसानों का गन्ना है, तब तक उस क्षेत्र की मिल को चलना चाहिए। पेराई और भुगतान के साथ सरकार ने चीनी की रिकवरी के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड बनाया। गन्ने की ढुलाई का मानक प्रति किलोमीटर के बजाय प्रति कुंतल करने से भी किसानों को लाभ हुआ। पहले सरकार 8.75 रुपये प्रति किमी की दर से भुगतान करती थी, इसे बदलकर 42 पैसे प्रति कुंतल कर दिया गया।


पिछली सरकारों ने गन्‍ने को कड़वा बना दिया था। योगी सरकार के प्रयासों से अब गन्ने की मिठास लौट आई है। अत्याधुनिक नई मिलें, पुरानी मिलों की बढ़ी क्षमता, खांडसारी ईकाइयां और एथनाल इसमें और मददगार साबित होने जा रही हैं। मार्च-2017 में योगी सरकार के आने के पहले बकाया बड़ा मुद्दा था। तीन वर्षों के दौरान योगी सरकार अब तक 1 लाख 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। 11 मिलों की क्षमता बढ़ायी गई और गोरखपुर के पिपराइच, बस्ती के मुंडेरा और बागपत के रमाला में अत्याधुनिक मिलें लगाई गईं। बसपा और सपा शासन काल में 2007 से 2017 के दौरान बंद होने वाली 29 मिलों को देखते हुए नई मिलों को खोलना और पुरानी मिलों का आधुनिकीकरण किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

 
25 साल बाद पहली बार किसी सरकार ने 100 घंटे के अंदर खांडसारी ईकाइयों को ऑनलाइन लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार मौजूदा समय में 105 ईकाइयों को लाइसेंस निर्गत किया जा चुका है। इससे पेराई क्षमता में 27,850 टीडीएस की वृद्धि हुई है। मुजफ्फरनगर में गुड़ महोत्सव का आयोजन किया। प्रसंस्करण के जरिए गुड़ को और उपयोगी बनाया जाए इसके लिए सरकार ने गुड़ को मुजफ्फरनगर और अयोध्या का एक जिला, एक उत्पाद घोषित कर रखा है।

मिल मालिकों को चीनी का अधिक दाम मिले इसके लिए कुछ मिलों में सल्फरमुक्त चीनी बनाने का काम भी शुरू हुआ है। मिलें ऊर्जा के मामले में आत्म निर्भर बनें इसके लिए उनमें को-जेनरेशन प्लांट भी लगाये जा रहे हैं। करीब छह दर्जन मिलों के को-जेनरेशन प्लांट से 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यूपी सरकार एथनॉल के जरिए गन्ने को ग्रीन गोल्ड बनाने का प्रयास कर रही है। अब यूपी में देश का सर्वाधिक (126.10 करोड़ लीटर वार्षिक) आपूर्ति करने वाला राज्य बन चुका है।