हेमंत सोरेन के साथ फंसेगी मुंबई पुलिस

    दिनांक 30-दिसंबर-2020   
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मुंबई की एक मॉडल से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ अब मुंबई पुलिस भी फंसेगी। कानून कहता है कि दुष्कर्म के मामले में शिकायत मिलने के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच की जाए लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ। जिस तरह से मामला राजनीतिक रंग लेकर रहा है ऐसे में बात अब लड़की की सुरक्षा की भी है जिसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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 हेमंत सोरेन का पुतला दहन करती भाजपा युवा मोर्चा की महिलाएंं। (फाइल फोटो)

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर मुंबई की एक मॉडल आरफा (परिवर्तित) ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2013 में होटल की 21वीं मंजिल से फेंकने की धमकी देकर उससे बलात्कार किया था। बताया जा रहा है कि बाद में उसने किसी कारण मजिस्ट्रेट के सामने लिखकर दे दिया कि वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती क्योंकि उसकी शादी होने वाली है। इसके बाद मामले को दबा दिया गया।

पाञ्चजन्य के संज्ञान में मामला आने के बाद हमने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। हमने सारे साक्ष्य इस संबंध में दिए और इस पर बड़ी रपट की। रपट प्रकाशित होने के बाद झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मंराडी ने दुमका में इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिक आधार पर इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी नहीं हैं तो सच का सामना करें और स्थिति स्पष्ट करें लेकिन जब तक उन पर आरोप है तब तक वह नैतिक आधार पर इस्तीफा दें। दुष्कर्म जैसे अपराध का आरोप होने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का नैतिक हक नहीं है।

हमने इस विषय में बाबूलाल मंराडी से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक इस मामले में जितनी जानकारी सामने आई है। उसके हिसाब से इस मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है हमें पता चला कि झारखंड से मुंबई भी कुछ लोग गए हैं जो यह प्रयास कर रहे हैं किसी तरह मामले को दबाया जा सके। दुष्कर्म जैसे मामले में 2013 से अभी तक कोई कार्रवाई न हो, ऐसा कैसे संभव है! हमने इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की है।’’

कहां है आरफा, क्या कह रही है पुलिस
मुंबई की जिस लड़की ने हेमंत सोरेन पर 2013 में दुष्कर्म का आरोप लगाया है उसकी तरफ से इस साल 8 दिसंबर को मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में फिर से शिकायत दी गई है। हमने इस संबंध में मुंबई पुलिस डीसीपी अभिषेक त्रिमुखे से बातचीत की। उन्होंने कहा ‘‘अभी सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि बांद्रा पुलिस स्टेशन को इस मामले में शिकायत मिली थी। हमने शिकायतकर्ता को बुलाया है। पुलिस बयानों को रिकॉर्ड कर उसके आधार पर आगे कार्रवाई करेगी। इससे ज्यादा इस मामले में अभी कुछ नहीं बताया जा सकता।’’

क्या कहता है कानून
सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी लूथरा बताते हैं, ''वर्ष 2012 में दिल्ली में 'निर्भया सामूहिक दुष्कर्म' मामले के बाद  फरवरी 2013 में सरकार ने आईपीसी की धारा 166 में संशोधन कर धारा 166 (ए) तथा धारा 166 (बी) को संसद में पारित कराकर कानून बना दिया है। धारा 166 (ए) में यह प्रावधान है कि कोई भी महिला दुष्कर्म की सूचना स्वयं या किसी अन्य के माध्यम से पुलिस को देती है तो  पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह तुरंत केस दर्ज कर जल्द से जल्द पीड़िता को इंसाफ दिलाए। पुलिस अधिकारी द्वारा केस दर्ज नहीं करने व आनाकानी करने की स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध आईपीसी की धारा 166 (ए) के तहत मुकदमा दर्ज करना पुलिस की कानूनी बाध्यता है। जिसमें दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिस अधिकारी को दो साल तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान किया गया है।