पहाड़ से निकली सेवा की सरिता

    दिनांक 30-दिसंबर-2020
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जगमोहन ‘आजाद’
उत्तराखंड के पहाड़ों से अनेक नदियां निकलती हैं। अब एक और जलधार वहां से निकली है, जिसे आप ‘सेवा की सरिता’ कह सकते हैं। ‘द हंस फाउंडेशन’ के माध्यम से बह रही यह सरिता गांव-देहात के हजारोें लोगों के जीवन को खुशहाल बना रही
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‘हंस जलधारा परियोजना’ की एक इकाई

उत्तराखंड में ‘द हंस फाउंडेशन’ के कार्यों की बहुत चर्चा होती है। हालांकि यह संगठन अनेक राज्यों में सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, पर ज्यादातर कार्य उत्तराखंड में हैं। इसकी सर्वेसर्वा हैं माता मंगला जी। इस संगठन के माध्यम से वे गरीब, जरूरतमंद और वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं। इसमें उनके पति भोले महाराज का भी सहयोग रहता है।

यह संगठन पिछले 10 वर्ष से 27 राज्यों में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, महिला सशक्तिकरण, दिव्यांगों के कल्याण, पेयजल एवं स्वच्छता, विद्युतीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इस संगठन के माध्यम से भारत में हजारों लोगों के जीवन में बदलाव आया है। टिहरी गढ़वाल के एक साधारण परिवार में जन्मीं मंगला जी आज असाधारण कार्य कर रही हैं। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए उन्होंने ‘पीएम केयर फंड’ में चार करोड़ रु. और ‘सीएम रिलीफ फंड’ में भी डेढ़ करोड़ रु. दान किए। उनके नेतृत्व में ‘आॅपरेशन नमस्ते’ की शुरुआत भी की गई। इसके तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, असम, दार्जिलिंग, कर्नाटक और दिल्ली जैसे कई राज्यों में लगभग 25,00,000 लोगों तक राशन, मास्क और जरूरत की दूसरी चीजें भिजवाई गर्इं। ‘लॉकडाउन’ के दौरान जब उत्तराखंड के लोग वापस लौटने लगे तो ‘द हंस फाउंडेशन’ ने इनके रहने और खाने की हर जरूरत का इंतजाम किया। इसने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ‘आइसोलेशन सेंटर’ बनवाए। इस फाउंडेशन ने उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत योद्धाओं के लिए भी मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर, पीपीई किट आदि उपलब्ध कराए। यही नहीं, उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में यह संगठन अनेक प्रकल्प चला रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जर्जर हो चुके विद्यालयों का कायकल्प कर उनमें बच्चों को आधुनिकतम शिक्षा दी जा रही है। विद्यालयों को नई तकनीक से जोड़ा गया है। और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करीब 100 विद्यालयों का निर्माण भी कराया गया है। 

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हरिद्वार स्थित ‘हंस आई केयर अस्पताल’

बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश की संस्कृति व देश-विदेश में होने वाले महत्वपूर्ण घटनाक्रम से परिचित कराया जा रहा है। ‘हंस फाउंडेशन’ मातृछाया योजना के तहत अनेक विद्यालयों में बालिकाओं की झिझक मिटाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। यह संगठन पौड़ी गढ़वाल के सतपुली में 140 बिस्तर वाले ‘हंस फाउंडेशन जरनल अस्पताल’ एवं हरिद्वार में 80 बिस्तर के ‘हंस आई केयर अस्पताल’ के माध्यम से लाखों लोगों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है और नि:शुल्क सचल चिकित्सा वाहन के जरिए भी दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हंस फाउंडेशन ने पिथौरागढ़ और पौड़ी में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आईसीयू का भी निर्माण किया है। फाउंडेशन ने स्वामी विवेकानंद चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ मिलकर आठ आधुनिक अस्पतालों का भी निर्माण किया है। इनमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम प्रमुख हैं। इन धामों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को इन अस्पतालों के माध्यम से नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। रुद्रप्रयाग जिले में ‘मां’अभियान के माध्यम से महिला स्वास्थ्य एवं सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया जा रहा है। इसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की हर तरह की जांच की जाती है और इसका पूरा विवरण अस्पताल के पास आ जाता है। यानी सभी गर्भवती महिलाओं के बारे में अस्पताल को जानकारी रहती है और और उन्हें हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहती हैं।

फाउंडेशन ने उत्तरकाशी के दुर्गम गांवों में आपदा प्रभावित 560 परिवारों को सौर ऊर्जा चालित ‘हंस पावर पैक’ वितरित किए हैं। इनसे आपदा या विपरीत परिस्थितियों में भी गांव जगमग करते रहते हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तरकाशी में भारी बर्फ-बारिश के चलते जन-जीवन बुरी तहर से प्रभावित हो जाता है। गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है तो जल भराव के चलते बिजली बाधित हो जाती है।

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अपने पति भोले महाराज के साथ माता मंगला जी

बेसहारा विधवा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए राजस्थान में अनेक तरह के उद्योग चलाए जा रहे हैं। कहीं महिलाएं अचार बनाती हैं, तो कहीं कठपुतली। इनके कारण लगभग 200 महिलाएं स्वावलंबी बन चुकी हैं।

फाउंडेशन अब तक लगभग 20,000 गरीब कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहायता प्रदान कर चुका है। यह प्रत्येक माह लगभग 5,000 विधवा महिलाओं, विकलांगों, बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंदों को मासिक पेंशन भी देता है। फाउंडेशन कई खिलाड़ियों को आर्थिक सहयोग भी दे रहा है। दुनिया की सबसे ऊंची सात चोटियों के साथ-साथ उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराने वाली जुड़वां बहनों ताशी-नुंग्शी मलिक, माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली शीतल राज और अमीषा चौहान सहित देश के कई खिलाड़ियों को सहायता दी गई है।

फाउंडेशन उत्तराखंड से पलायन रोकने की दिशा में भी कई काम कर रहा है। बागेश्वर की गरुड़ तहसील के पुरड़ा में ‘हंस जलधारा परियोजना’ शुरू की गई है। इस परियोजना से घर-घर तक स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सकेगा। अन्य जिलों में यह योजना कार्य करने लगी है। उत्तराखंड के 100 गांवों में 83 योजनाएं संचालित की जा रही हंै। इनसे 4,429 घरों के लगभग 22,000 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। पौड़ी जिले के जहरीखाल प्रखंड के 16 गांवों में भी पेयजल योजना का द्वितीय चरण आरंभ हो चुका है। मंगला जी कहती हैं, ‘‘सेवा करने की प्रेरणा अपने पिता स्व. मातबर सिंह सजवाण से मिली है, जो इंडियन एयरलाइंस में थे। अफगानिस्तान में हुए एक आतंकवादी हमले को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाने के लिए भारत सरकार ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया था।’’

इन सेवाओं के लिए मंगला जी को देश-विदेश की कई सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं ने सम्मानित किया है।