चुभते सवालों के सटीक जवाब

    दिनांक 31-दिसंबर-2020
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ज्ञानेन्द्र बरतरिया

2020 का साल भारत में अनेक मुद्दों का साक्षी बना। लॉकडाउन में श्रमिकों का पलायन, सीएए, गलवान में चीनी सैनिकों को करारे जवाब से लेकर उत्तर प्रदेश में लव जिहाद विरोधी कानून तक रहा चर्चा में
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गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प के बाद, अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाने लद्दाख गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (फाइल चित्र)

कोरोना वायरस से लेकर चक्रवात तक भारत की सीमाओं पर तनाव और आर्थिक व्यवधानों सहित, 2020 में विश्व में ऐसे परिवर्तन हुए हैं, जिन्होंने सारे प्रतिमानों को परिवर्तित कर दिया है। लेकिन भारत में महामारी और राजनीतिक प्रतिरोधोें के बावजूद चुनौतियों से पार पाया गया।


  • कृषि कानून: सितंबर 2020 में, संसद के दोनों सदनों ने विपक्षी दलों के विरोध के बीच कृषि विधेयकों को पारित किया। राज्यसभा में विधेयकों को ध्वनि मत से पारित किया गया, लेकिन राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने विधेयक फाड़ दिया। सरकार का कहना था, ये कानून किसानों को अपनी उपज सीधे बड़े खरीदारों को बेचना आसान बना देंगे। 24 सितम्बर को इन विधेयकों को राष्ट्रपति की सहमति मिल गई और वे कानून बन गए। लेकिन साथ ही, राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया।

  • कोरोना वायरस और लॉकडाउन:  संभवत: पूरे दशक की सबसे विवादास्पद घटना है लॉकडाउन के दौरान लाखों श्रमिकों का पलायन। लॉकडाउन पद्धति विश्व के तमाम देशों में आज भी अपनायी जा रही है। भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सीमाएं बंद की गई थीं, कर्फ्यू और लॉकडाउन लागू किया गया था। एक युद्ध जैसा परिवेश बना हुआ था, लेकिन भारत इस युद्ध में विजय पाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा था। आपदा के इसी मोड़ पर कुछ लोगों ने राजनीतिक अवसर खोजने की कोशिश की। बहुत सुनियोजित ढंग से अफवाहें और कहानियां प्रचारित की गईं, श्रमिकों को अपने गांव लौटने के लिए उकसाया गया। इससे श्रमिकों के पलायन का दौर चला। इसका लक्ष्य था लॉकडाउन को ध्वस्त करना, कोरोना का प्रसार देश के ग्रामीण इलाकों तक करना, और देश के ही मजदूरों को देश की सरकार के खिलाफ ला देना। जिन राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं, वहां सरकारों ने उल्टे इस पलायन को भड़काने की कोशिश की। दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल पर हजारों प्रवासी श्रमिक अपने घर लौटने के लिए साधन की प्रतीक्षा में आकर खड़े हो गए क्योंकि दिल्ली सरकार से जुड़े लोग प्रचार कर रहे थे कि वहां से उत्तरप्रदेश और बिहार के लिए बसें जा रही हैं।

श्रमिकों को कई कठिनाइयों में डालने के बाद विपक्षी दलों ने यह कहना शुरू किया कि केंद्र सरकार महामारी से निपटने में विफल रही है। तरह-तरह की मांगों को उठाकर राजनीतिक वितंडा पैदा करने की कोशिश की गई। सरकार ने राजनीतिक चतुराई से काम लिया और किसी भी वर्ग के प्रतिरोध में उठ खड़े होने के पहले ही उनकी मदद के उपाय किए और जब यह स्पष्ट हो गया कि इस श्रमिकों को समझा सकना अब कठिन है, तो सरकार ने उनके लिए परिवहन की व्यवस्था भी कर दी।

  • सीएए विरोधी उपद्रव: 2019 के अंत से शुरू होकर 2020 के कुछ महीनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी प्रदर्शन हुए। जबकि किसी भी भारतीय नागरिक से अथवा उसकी नागरिकता से इस अधिनियम का कोई संबंध नहीं है, लेकिन इसके विरोध में फरवरी 2020 में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के कई स्थानों पर चार दिन दंगे हुए, जिसमें 53 लोगों की जान चली गई और लगभग 600 लोग घायल हो गए। इस हिंसा का राजनीतिकरण हुआ, सोनिया गांधी ने इन दंगों को ‘षड्यंत्र’ करार दिया,दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कई सहयोगी भी इन दंगों में संलिप्त पाए गए।

पद्मश्री से सम्मानित अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ कोई आपत्तिजनक ट्वीट किया गया और मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने इस अपमानजनक ट्वीट को ‘लाइक’ कर दिया। रनौत इससे डरने के बजाए उल्टे भड़क गईं और उन्होंने ट्विटर पर स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए, जिसमें मुंबई के पुलिस आयुक्त ने उक्त ट्वीट को ‘लाइक’ किया था, कंगना ने लिखा: ‘सार्वजनिक रूप से चिढ़ाने और धमकाने की निंदा करने के बजाए सुशांत के हत्यारों के खिलाफ लड़ रहे लोगों के बारे में अपमानजनक ट्वीट को सी.पी.मुंबई पुलिस प्रोत्साहित कर रहे हैं, @मुंबईपुलिस अपने पतन के एक और चरम पर पहुंच गई है...शर्मनाक!!’

2020
28 नवम्बर को उ. प्र. में बना लव जिहाद पर कानून

10 साल तक की कड़ी सजा का है इस अधिनियम
 के तहत प्रावधान



इसके बाद कंगना रनौत ने ट्वीट किया-‘शिवसेना नेता संजय राउत ने मुझे खुली धमकी दी है, कहा है कि मुझे मुंबई वापस नहीं आना चाहिए। मुंबई की सड़कों की दीवारों पर आजादी के चित्र बनाने और अब खुली धमकियों के बाद, मुंबई पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर जैसा क्यों महसूस कर रही है?’ कंगना से बदले जैसी कार्रवाई की शिवसेना के नियंत्रण वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने, जिसने उनके मुंबई कार्यालय को ध्वस्त कर दिया।

  • लद्दाख में टकराव: 15 जून को देर रात भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर गलवान में झड़प हुई, जो तीखे संघर्ष में बदल गई। इस टकराव में 20 भारतीय सैनिक मारे गए और 76 घायल हुए। चीनी पक्ष में हताहत हुए सैनिकों की संख्या बीजिंग ने घोषित नहीं की।

  • राम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में भूमिपूजन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा आज का दिन रामजन्मभूमि को ‘विनाश और पुनरुत्थान’ की श्रृंखला से स्वतंत्र कराने के लिए याद रखा जाएगा। हालांकि विपक्षी दलों ने इसकी भी कड़ी आलोचना की।
  • हाथरस बलात्कार प्रकरण: हाथरस की बलात्कार पीड़िता का उसके गांव में रात में अंतिम संस्कार किया गया। कहा गया कि सितम्बर में घटी इस घटना में कथित रूप से चार सवर्णों द्वारा कथित सामूहिक बलात्कार किया गया था। भारी राजनीतिक विरोध के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है।
  • लव जिहाद पर कानून: जौनपुर में एक रैली में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘लव जिहाद’ करने वालों को चेतावनी दी कि वे अपने तरीकों में सुधार करें, या अपनी अंतिम यात्रा के लिए तैयार रहें। उत्तर प्रदेश में कन्वर्जन विरोधी कानून 28 नवम्बर को अध्यादेश के रूप में लागू कर दिया गया, जिसमें लव जिहाद से संबंधित अपराधों के लिए अधिकतम 10 साल की सजा का प्रस्ताव है।
  • पालघर मॉब लिंचिंग: मुंबई से लगभग 125 किलोमीटर दूर, महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक छोटे से गांव में 16 अप्रैल को भीड़ द्वारा दो साधुओं की हत्या कर दी गई। इन साधुओं सहित तीन लोगों के खिलाफ अफवाह उड़ाई गई कि वे बच्चों का अपहरण कर रहे थे, ताकि उनकी किडनी बेची जा सकें। इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया।
  • आनलाइन स्ट्रीमिंग सर्विसेज: डिजिटल और आॅनलाइन मीडिया अब सूचना और प्रसारण के नियामक ढांचे का हिस्सा है। नवम्बर में सरकार ने फिल्मों और समाचार सामग्री सहित आॅनलाइन मीडिया को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने का आदेश जारी किया। आॅनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाएं जैसे नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, हॉटस्टार और अन्य को अब केंद्र द्वारा विनियमित किया जाएगा।     (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)