वार्षिकी-2020/कूटनीति : कद बढ़ा, रुतबा जमा

    दिनांक 31-दिसंबर-2020
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अंशु जोशी

आज भारत की छवि एक सहज, मिलनसार किन्तु शक्तिशाली राष्ट्र की बनी है। भारत ने वैश्विक राजनयिकों के साथ मित्रता के नए सोपान गढ़े, तो पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के समक्ष एक कठोर छवि प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट सन्देश दिए कि सुरक्षा पर किसी प्रकार का प्रहार सहन नहीं होगा
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आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  (फाइल चित्र)
यह साल निस्संदेह चुनौतीपूर्ण रहा। कोविड-19 सहित समस्त चुनौतियों के बीच भी भारत एक बड़ी शक्ति के रूप में विश्व राजनीति के पटल पर उभर कर सामने आया है। और यह समझना भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक-कूटनीतिक जगत में यह स्थान कैसे अर्जित किया।

 किसी भी राष्ट्र के साथ सम्बन्ध किस दिशा में ले जाने हैं, अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपने राष्ट्र की छवि निर्माण के कौन-से मुद्दे रखने हैं, द्वि-पक्षीय तथा बहु-पक्षीय संबंधों को कैसी दिशा देनी है, यह सब नेता या राजनैतिक प्रतिनिधि से ही निश्चित होता है। वैश्विक पटल पर भारतीय नेतृत्व के हिसाब से देखें तो 2014 के बाद का समय भारत को शक्ति की नयी ऊंचाइयों पर ले जाता स्पष्ट दिखाई देता है।

भारत की कई कूटनीतिक उपलब्धियां रही हैं। हाल ही में जी-20 के 2023 में होने वाले सम्मलेन की मेजबानी का जिम्मा भारत को मिला है। सऊदी अरब में हुई जी-20 की बैठक में भारत की ओर से प्रधानमंत्री मोदी ने प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत न केवल अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा कर रहा है, बल्कि आगे भी बढ़ रहा है। इसी सम्मलेन में  ‘सेफगार्डिंग द प्लैनेट-द सर्कुलर कार्बन इकोनॉमिक अप्रोच’ कार्यक्रम में उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने स्वच्छ जलवायु के लिए ठोस कार्रवाई की है। साथ ही उन्होंने सभी के लिए कोविड-19 के निदान, उपचार और टीके किफायती और समान तरीके से उपलब्ध कराने के लिए हो रहे वैश्विक प्रयासों को और मजबूत करने की बात की।

कोविड और चीन की हरकतों से सुरक्षा और शांति के लिए उपजीं चुनौतियों से निबटने के लिए क्वाड यानी ‘क्वाड्रीलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग’ के माध्यम से भारत ने चीन के विस्तारवादी षड्यंत्रों को नाकाम करने का सफल प्रयास किया है। क्वाड के सदस्यों-भारत, आॅस्ट्रेलिया, जापान तथा अमेरिका-ने हाल में हुई बैठक में न सिर्फ चीन के आक्रामक तथा कब्जा करने के रवैये की भर्त्सना की, साथ ही स्वतंत्र और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सामूहिक दृष्टि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। भारत ने चीन तथा पाकिस्तान जैसे देशों को यह स्पष्ट सन्देश दिया कि भारत के साथ आज अन्य शक्तिशाली राष्ट्र खड़े हैं।

आज भारत की छवि वैश्विक पटल पर एक तेजी से विकसित होते देश के रूप में बनी है। पहली बार सरकार बनाते ही मोदी ने विश्व राजनीति में भारत की छवि मजबूत करने और अपनी बातें विश्व मंच पर रखने हेतु एक गतिशील पहल की। वे फ्रÞांस गए और सामरिक मुद्दों पर भारत और फ्रÞांस के बीच नए मजबूत संबंधों की नींव रखी। ब्राजील गए तो वहां के लोगों और राष्ट्रपति के साथ ऐसे सहज होकर मिले कि वर्षों से सुस्त पड़े संबंधों ने नयी करवट ली। आज ब्राजील और भारत ऊर्जा से लेकर कई अन्य क्षेत्रों में साथ काम करना प्रारम्भ कर चुके हैं। कोविड 19 से जूझते ब्राजील की जिस तरह से भारत ने सहायता की, उसके लिए राष्ट्रपति बोलसनारो ने मोदी को न सिर्फ पत्र लिख धन्यवाद दिया, बल्कि हनुमान जी द्वारा संजीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाने के प्रसंग से जोड़ इसका उल्लेख अपने पत्र में किया। लातीनी अमेरिका में भारत के साथ अन्य लातीनी अमेरिकी देशों के साथ भी मोदी के माध्यम से संबंध बेहतर होते दिखे हैं। उन्होंने आॅस्ट्रेलिया के साथ भी संबंधों में न सिर्फ एक नया सकारात्मक अध्याय जोड़ा, बल्कि इस वर्ष एक वर्चुअल द्वि-पक्षीय वार्ता के बाद भारत और आॅस्ट्रेलिया ने सात महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं जिनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता सैन्य लॉजिस्टिक्स सहायता हेतु किया गया है।


2020
भारत की कूटनीतिक समझ 
का लोहा मानतेहुए इसे मिला

2023 के जी- 20 सम्मेलन की

मेजबानी का दायित्व


इसी प्रकार अमेरिका से भी मोदी के चलते सकारात्मक संबंधों का एक नया युग प्रारम्भ होता दिखाई पड़ता है। चाहे भारतीय योग हो, व्यंजन, सिनेमा या उच्च शिक्षित प्रवासी भारतीयों का समुदाय, अमेरिका में भारत का प्रभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है। हम अपने को गुट निरपेक्ष कहते हुए भी कहीं न कहीं रूस के खेमे से जुड़े रहे थे। किन्तु मोदी ने न सिर्फ अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत किया, बल्कि रूस के साथ चले आ रहे सशक्त संबंधों पर इसका कोई प्रभाव पड़ने नहीं दिया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। फरवरी 2020 में जब राष्ट्रपति ट्रम्प भारत आये, पूरे विश्व ने देखा कि किस प्रकार दो मित्रों ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए संबंधों को एक नयी दिशा दी। दोनों देशों ने कई आर्थिक और सामरिक समझौतों पर हस्ताक्षर किये। आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में तो दोनों देश एक साथ काम कर ही रहे हैं।  सबसे महत्वपूर्ण यह देखना रहा कि मोदी और ट्रम्प के आपसी सम्बन्ध दो मित्रों के हैं, इससे निचित ही भारत की छवि पर असर पड़ा। पहले विश्व के शक्तिशाली राष्ट्रों के सामने भारत की छवि एक ‘स्माल ब्रदर’ की रहती थी पर यहां ‘बिग ब्रदर’ और ‘स्माल ब्रदर’ की भावना थी ही नहीं।   जापान और कोरिया जैसे देशों के साथ भी भारत ने संबंधों को नयी गति प्रदान करने का प्रयास किया है। सुदूर पूर्व हो या पश्चिम, खाड़ी देश हों या लातीनी अमेरिका, आॅस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड, मोदी ने भारत के साथ विभिन्न देशों के सम्बन्ध सशक्त करने के प्रयास किये हैं। आज पूरे विश्व में भारत की सॉफ्ट पावर का सकारात्मक असर स्पष्ट दिखाई पड़ता है और इसका श्रेय मोदी को जाता है। अमेरिका, फ्रÞांस, ब्रिटेन, रूस, जापान और कनाडा जैसे देशों के साथ मधुर संबंधों का प्रभाव चीन और पाकिस्तान जैसे शत्रुता का भाव रखने वाले देशों की हरकतों को रोकने में निश्चित ही महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

आज भारत की छवि एक सहज, मिलनसार किन्तु शक्तिशाली राष्ट्र की बनी है। भारत ने विभिन्न वैश्विक राजनयिकों के साथ मित्रता के नए सोपान गढ़े, पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के समक्ष एक कठोर छवि प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट सन्देश दिए कि भारत की सुरक्षा पर किसी प्रकार का प्रहार

सहन नहीं किया जाएगा। सर्जिकल स्ट्राइक के माध्यम से पाकिस्तान जैसे देशों को यह स्पष्ट सन्देश दे दिया गया कि भारत न अब किसी के दबाव में आकर आतंकवाद बर्दाश्त करेगा, न पीछे हटेगा।

आज जिस आत्मनिर्भर भारत की बात प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं उसका उद्देश्य भारत को भारत तक सीमित करना नहीं है। उसका उद्देश्य वैश्विक रहते हुए अपने स्थानीयत्व को बढ़ावा देना है ताकि भारत आर्थिक उन्नति के साथ-साथ सामाजिक प्रगति भी कर सके। वैश्विक स्तर पर बेहतर छवि और संबंधों के साथ निश्चित ही हम तात्कालिक और दूरगामी उद्देश्यों की पूर्ति कर पाने में सक्षम होंगे, और इसके लिए निरंतर प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।     (लेखिका जेएनयू में सहायक प्रोेफेसर हैं)