फिल्म : चमका ओटीटी

    दिनांक 31-दिसंबर-2020
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विशाल ठाकुर

 कोरोना के कारण फिल्म उद्योग को 2020 में भले ही बड़ा नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन रुपहले पर्दे और ओटीटी मंचों पर एक के बाद एक फिल्में और शृंखलाएं आती गई
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इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना महामारी के कारण 2020 मनोरंजन की दुनिया के लिए भी बहुत संकटभरा साबित हुआ, लेकिन फिल्म बिरादरी को दाद देनी होगी कि उसने जूझना नहीं छोड़ा। ‘लॉकडाउन’ के कारण बेशक सात महीने तक सिनेमाघर बंद रहे, पर ओटीटी (ओवर द टॉप) मंचों द्वारा मनोरंजन की सामग्री बराबर पहुंचती रही। टिकट खिड़की सूनी थी, लेकिन डिजिटल मंचों पर चकाचौंध की दुनिया दनादन जारी रही। सिनेमाघरों तक आने वाले दर्शक अब मासिक ग्राहक बनकर चलते-फिरते, कहीं भी और किसी भी समय फिल्मों और वेब सीरीज का लुत्फ लेने लगे। लाखों टिकटों की बिक्री से 200-300 करोड़ रु. तक होने वाली कमाई का आधार करोड़ों दर्शकों में तब्दील होता दिखा। और देखते ही देखते मनोरंजन की दुनिया की एक नई परिभाषा सामने आई, जिससे एकाधिकार और वर्चस्व जैसी बातें पीछे छूटने लगीं।

संकट के इस दौर में फिल्मों का कलेवर बदलता दिखा। चलताऊ नुस्खों की बजाए सच्ची और आदर्शवादी कहानियां अपनी जगह बनाती दिखीं, तो दूसरी तरफ ओटीटी मंचों पर नई प्रतिभाएं चौंका रही थीं। हालांकि कई ओटीटी मंच अपनी सामग्री के कारण चिर-परिचित अंदाज में विवादास्पद भी बने रहे। कोरोना और कुछ अन्य कारणों के चलते फिल्म उद्योग घोर संकटों का सामना कर रहा था। एक तरफ मायानगरी हजारों करोड़ रु. का नुकसान झेल रही थी, तो दूसरी ओर तालाबंदी से कुछ छूट मिलते ही लोग अपने काम पर लग गए।

2020
50 करोड़ तक पहुंची ओटीटी के ग्राहकों की संख्या
3.6 लाख करोड़ रु. का हो
जाएगा 2023 तक ओटीटी का बाजार

कड़े सुरक्षा इंतजामों के साथ कैमरा फिर से अपने काम पर आ गया और लगे हाथ अक्षय कुमार अपनी पूरी टीम के साथ जाकर विदेश में अपनी एक फिल्म की शूटिंग भी पूरी कर आए, तो इधर आयुष्मान खुराना ने भी मास्क और दस्ताने पहने रिकॉर्ड गति से चंडीगढ़ में अपनी एक फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली। हालांकि बीते वर्षों जैसी मजेदारी तो नहीं रही, लेकिन जोश और उत्साह बना रहा।

साल 2020 की शुरुआत अजय देवगन की फिल्म ‘तानाजी : दि अनसंग वारियर’ की शानदार कामयाबी से हुई और साल खत्म होने तक यह सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी रही। हालांकि अमूमन बड़ी फिल्मों के प्रदर्शन के लिहाज से साल का पहला महीना कुछ खास नहीं माना जाता, लेकिन बीते कुछ वर्षों से इस चलन में बदलाव देखा गया है। खासतौर से जनवरी के पहले सप्ताह में नामचीन सितारों की बड़े बजट वाली फिल्मों को प्रदर्शित करने से परहेज किया जाता रहा है, लेकिन 2019 में ‘उरी: दि सर्जिकल स्ट्राइक’ की कामयाबी से मानो सब कुछ बदल गया था। वैसे भी इस साल जनवरी की सफल शुरुआत में अक्षय कुमार की फिल्म ‘गुड न्यूज’, सलमान खान की ‘दबंग 3’ और रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी’ का भी खासा योगदान रहा। क्योंकि दिसंबर, 2019 के अंतिम तीन हफ्तों में प्रदर्शित हुई इन फिल्मों ने कमाई के मामले में उत्साहजनक उपस्थिति दर्ज कराई थी। इन फिल्मों ने क्रमश: 201 करोड़, 150 करोड़ और 47 करोड़ रु. बटोरे थे। और फिर तुरंत बाद ‘तानाजी : दि अनसंग वरियर’ ने 279 करोड़ रु. का कारोबार कर डाला। करीब 125 करोड़ रु. में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 367 करोड़ रु. बटोरे।

कोरोना की आहट से पहले छोटी-बड़ी मिलाकर करीब एक दर्जन फिल्में प्रदर्शित हुर्इं, जिनमें से कुछ औसत रहीं तो कुछ ठीक-ठाक कमाई कर गर्इं। ‘तानाजी’ के अलावा टाइगर श्राफ की ‘बागी’ 3 (97 करोड़ रु.) और वरुण धवन की ‘स्ट्रीट’ डांसर 3डी (75 करोड़ रु.) जैसी फिल्में ही 100 करोड़ के निकट तक पहुंच पार्इं। इरफान खान की फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ ‘लॉकडाउन’ से पहले प्रदर्शित होने वाली बड़ी फिल्मों में थी, जो कमोबेश उनकी अंतिम फिल्म साबित हुई। अचानक लगे ‘लॉकडाउन’ से इस फिल्म को खासा झटका लगा और यह केवल 10-11 करोड़ रु. ही बटोर पाई।

जनवरी-फरवरी में अच्छी-खासी कमाई कर रहा बॉक्स आॅफिस ठंडा पड़ चुका था। अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, रणवीर सिंह, वरुण धवन सहित कई बड़े सितारों की महंगी फिल्में संकट में पड़ गर्इं, क्योंकि कई फिल्में पहली छमाही में प्रदर्शित होनी थीं। इस बीच आयुष्मान खुराना, अभिताभ बच्चन की फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ को ओटीटी मंच अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रदर्शित करने की खबर आई, जिससे बाकी फिल्मकारों का भी हौसला बढ़ा। फिर सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘दिल बेचारा’ और संजय दत्त की ‘सड़क 2’ जैसी फिल्में भी ओटीटी मंचों पर प्रदर्शित हुर्इं।

यही नहीं, 15 अक्तूबर को सिनेमाघरों के फिर से खोले जाने के बाद भी बड़ी-छोटी फिल्में ओटीटी पर ही प्रदर्शित होती रहीं। क्योंकि एक तरफ तो लोग आसानी से सिनेमाघरों का रुख नहीं कर रहे थे, तो दूसरी तरफ फिल्मकार भी बड़ी और बहुचर्चित फिल्मों को ऐसे माहौल में प्रदर्शित करने के जोखिम से बच रहे थे। हालांकि सिनेमा मालिकों, वितरकों और दर्शकों के बीच भी कई बातों को लेकर विवाद थे, जिसकी वजह से सिनेमाघर साल के अंत तक सूने ही दिखे। इस बीच ओटीटी मंचों से ही उम्मीदें बंधी रहीं।

बड़े मौकों पर खाता खाली

दीपावली, होली, स्वतंत्रता दिवस, 2 अक्तूबर जैसे बड़े मौकों पर 200 से 400 करोड़ रु. तक बटोरने वाली फिल्मों का खाता इस साल खाली ही रहा। न कोई बड़ा धमाका, न कोई चटख रंग। सब योजनाएं धरी रह गर्इं। ले-देकर किसी तरह दीपावली पर अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी’ ओटीटी पर प्रदर्शित की गई। तो सिनेमाघरों में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘सूरज पे मंगल भारी’ प्रदर्शित हुई। ‘लक्ष्मी’ की कामयाबी का पैमाना, उसे देखने वाले लोगों की संख्या से तय हुआ, जबकि ‘सूरज पे मंगल भारी’ 2-3 करोड़ रु. बटोरकर ही सिमट गई। और काफी इंतजार करने के बाद भी जब हालात सामान्य नहीं हुए तो भूमि पेडणेकर की फिल्म ‘दुर्गामति’ और संजय दत्त की फिल्म ‘टोरबाज’ को भी ओटीटी पर प्रदर्शित कर दिया गया। पर कियारा आडवाणी की फिल्म ‘इंदु की जवानी’ सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। लेकिन ये सभी फिल्में न तो दर्शकों के दिलों में जगह बना पार्इं और न ही टिकट खिड़की पर सफल होती दिखीं।

फिर वरुण धवन की फिल्म ‘कुली नंबर 1’ भी ओटीटी पर प्रदर्शित कर दी गई। मोटे तौर पर साल के अंत तक ज्यादातर निर्माता सिनेमाघरों में फिल्में प्रदर्शित करने को लेकर आशांकित नजर आए, जबकि हॉलीवुड फिल्में इस मामले में अलग नजरिए के साथ प्रदर्शित की गर्इं। अमेरिकी फिल्मकार क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘टेनट’ को लगभग 1,000 स्क्रीन्स पर प्रदर्शित किया गया और दांव सही साबित हुआ। जैसी कि उम्मीद की जा रही थी, हिन्दी-अंग्रेजी सहित चार भाषाओं में प्रदर्शित हुई यह फिल्म 10 दिन में 10 करोड़ रु. से अधिक रु. बटोर ले गई। जाते हुए साल में यह एक अच्छी खबर थी, लेकिन इससे भारतीय फिल्मकारों को फिर भी हिम्मत नहीं मिली। इससे इतर एक बार फिर हॉलीवुड ने हिम्मत दिखाई और बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वांडर वुमन’ को आंशिक रूप से 23 दिसंबर तथा पूर्ण रूप से 25 दिसंबर को प्रदर्शित किया गया।

चमका आशाओं का सूरज
कई मायनों में बॉलीवुड के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा। युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध आत्महत्या की खबरों से पूरे देश और मीडिया जगत कई महीनों पर गूंजता रहा। कई फिल्म सितारों पर नशीले पदार्थों के सेवन के आरोप लगते रहे। इस बीच बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद भी खुलकर सामने आए। सितारों की आपसी नोंक-झोंक ‘तू-तू मैं-मैं’ में बदलने लगी। आरोप-प्रत्यारोप के दौर में कई सितारे अपनी सीमा लांघ गए और देखते ही देखते मायानगरी अपने सबसे बुरे दौर का सामना करने लगी।

लेकिन इसी बीच कुछ लोग शांति से अपना काम करते दिखे। अक्षय कुमार दुनिया के पहले ऐसे अभिनेता बने जिन्होंने कोरोना महामारी के बीच अपनी फिल्म भी की और उसकी शूटिंग भी पूरी कर डाली। कोरोना से दो-दो हाथ करते हुए कई अन्य सितारे भी अपनी-अपनी फिल्मों की शूटिंग पूरी करते रहे।