लंबी छलांग की तैयारी

    दिनांक 31-दिसंबर-2020
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प्रवीण सिन्हा

साल 2020 में 15 निशानेबाज, 9 मुक्केबाज, 4 पहलवान, 4 तीरंदाज, महिला व पुरुष हॉकी टीमें ओलंपिक के लिए चयनित हो चुकी हैं। इन प्रतिभावान खिलाड़ियों से भारत को काफी उम्मीदें है

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23 जुलाई से 8 अगस्त, 2021 तक आयोजित होने वाले टोक्यो ओलंपिक में निशानेबाज मनु भाकर से काफी उम्मीदें हैं

अपने दूसरे कार्यकाल में भी नरेंद्र मोदी सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। देश के कोने-कोने में राज्य सरकारों के सहयोग से ‘खेलो इंडिया’ अभियान चला चलाया जा रहा है। इसके अलावा, ‘फिट इंडिया’ कार्यक्रम भी बहुत मजबूती से चल रहा है। मार्च से दिसंबर, 2020 तक देश में अधिकांश खेल गतिविधियां थमी रहीं। हालांकि इस दौरान क्रिकेट में कुछ उल्लेखनीय गतिविधियां हुर्इं, जबकि फुटबॉल, हॉकी, एथलेटिक्स की थोड़ी-बहुत स्पर्धाएं पटरी पर लौटती दिखीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं के बिना वे अधूरी ही रहीं। भारतीय खेल जगत की शुरुआत कुछ हद तक उत्साहवर्धक रही। मुक्केबाजी, कुश्ती, निशानेबाजी, एथलेटिक्स, तीरंदाजी सहित महिला व पुरुष हॉकी टीमों ने टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करके उम्मीद की किरणें जगाई हैं। विभिन्न स्पर्धाओं में क्वालीफाई कर चुके खिलाड़ी ओलंपिक की तैयारी में जी-जान से जुटे हुए थे, जबकि कई स्पर्धाओं के खिलाड़ी ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने की दिशा में अग्रसर थे। लेकिन इसी बीच कोरोना महामारी फैली और सब कुछ ठप पड़ गया। 

इस साल भाला फेंक स्पर्धा के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, शिवपाल सिंह सहित मोहम्मद अनस और के.टी. इरफान जैसे प्रतिभाशाली एथलीटों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर के उम्मीदें बढ़ा दी हैं। वहीं, तीरंदाजी में तरुणदीप राय, अतानु दास, प्रवीण जाधव, दीपिका कुमारी, एथलेटिक्स में अविनाश साबले, मोहम्मद अनस, विस्मया, कृष्णा मैथ्यू, नोह निर्मल, भावना जट तथा निशानेबाजी में अंजुम मौदगिल, अपूर्वी चंदेला, दिव्यांश सिंह पंवार, दीपक कुमार, तेजस्विनी सावंत, संजीव राजपूत, ऐश्वर्या प्रताप सिंह तोमर, मनु भाकर, यशस्विनी सिंह देसवाल, सौरभ चौधरी, अभिषेक वर्मा, राही सर्नोबत, चिंकी यादव, अंगद वीर सिंह बाजवा, मिराज अहमद खान, ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर क्वालीफाई कर चुके हैं। इसी तरह पहलवानी में विनेश फोगाट, बजरंग पुनिया, रवि कुमार दहिया, दीपक पुनिया जबकि मुक्केबाजी में विकास कृष्ण, लवलीना बोरगोहेन, आशीष कुमार, पूजा रानी, सतीश, अमित पंघाल, एम.सी. मैरी कॉम, सिमरनजीत कौर, मनीष कौशिक तथा घुड़सवारी में फुआदा मिर्जा ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं। लेकिन खेल गतिविधियों के थमने के बाद अपनी लय हासिल करने के लिए इन्हें फिर से जोर लगाना पड़ेगा। 

ओलंपिक की तैयारी
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू कहते हैं कि पिछले एक साल में हमने खेल के क्षेत्र में वह मुकाम हासिल किया है जो पहले नहीं कर पाए। हम टोक्यो ओलंपिक्स के लिए तैयार थे, लेकिन कोरोना के चलते यह एक साल के लिए टल गया, वरना हमारी तैयारी अच्छी चल रही थी। खेल के मैदान में भले ही कोई स्पर्धा आयोजित नहीं हुई, पर लॉकडाउन में हमने अपने सारे कार्यक्रमों को जारी रखा, चाहे रोप स्किपिंग हो, फिटनेस हो, घर बैठे स्वास्थ्य जांच, आॅनलाइन कोचिंग, प्रशिक्षण तथा एथलीटों से लगातार संपर्क रखना, सब आॅनलाइन जारी रहा। उनका कहना है कि 2028 तक खेल के क्षेत्र में भारत शीर्ष 10 देशों में शामिल हो जाएगा। हमारी प्राथमिकता ओलंपिक खेल हैं, क्योंकि यह चार साल बाद आते हैं। हमारा सपना है कि 8 साल बाद 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक में भारत कम से कम शीर्ष 10 में रहे। यह हमारे देश की प्रतिष्ठा का सवाल है। हमारा देश खेल महाशक्ति बने, इस दिशा में हम लगातार बढ़ रहे हैं। इसमें राज्य सरकारों का सहयोग बहुत जरूरी है। 

क्रिकेट में लिया भाग
एकदिवसीय और टेस्ट मैचों में भारत की एक तरह से बादशाहत है। लेकिन 2020 में प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। 2020 में टीम इंडिया मात्र तीन टेस्ट मैच खेल पाई और तीनों में ही उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा। साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड से टेस्ट शृंखला में 2-0 से मिली हार, फिर आॅस्ट्रेलिया से चार टेस्ट मैचों की शृंखला हारने के बाद क्रिकेट प्रेमियों में थोड़ी निराशा है, लेकिन यह अधिक दिन नहीं रहेगी।

2020
59 चीनी एप पर पाबंदी का भी पड़ा असर

8 वर्ष के बाद खेल में शीर्ष 10 देशों में शामिल होने का लक्ष्य


अनुभवी ओपनर शिखर धवन और रोहित शर्मा की अनुपस्थिति में खेले गए तीनों टेस्ट मैचों में युवा मयंक अग्रवाल और पृथ्वी शॉ को पारी की शुरुआत का जिम्मा सौंपा गया। लेकिन छह पारियों में मयंक अग्रवाल कुल 128, जबकि पृथ्वी शॉ 102 रन ही बना सके। इन युवा बल्लेबाजों के अलावा अनुभवी विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे भी पूरी तरह से असफल साबित हुए। इन शीर्ष पांच बल्लेबाजों में अजिंक्य रहाणे ने छह पारियों में सबसे ज्यादा 133 रन बनाए, जबकि कप्तान विराट कोहली महज 116 और चेतेश्वर पुजारा 93 रनों का ही योगदान दे सके। दरअसल, क्रिकेट में अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। मुख्य प्रशिक्षक रवि शास्त्री और विराट कोहली के अति आत्मविश्वासी व आक्रामक रवैये का नुकसान भारतीय टीम पिछले वर्ष विश्व कप की प्रबल दावेदार होने के बावजूद सेमीफाइनल में हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई थी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सकारात्मक प्रयास के बल पर खिलाड़ियों को लगभग खाली स्टेडियम में ही सही, पर यूएई में आईपीएल खेलने का मौका मिला। आईपीएल के बाद टीम प्रबंधन ने अपने अधिकतर अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा किया और एक भारी-भरकम भारतीय दल यूएई से सीधे आॅस्ट्रेलिया रवाना हो गया। टी-20, एकदिवसीय व टेस्ट शृंखला के लिए टीम में अलग-अलग विशेषज्ञ खिलाड़ियों को शामिल किया गया। तीन एकदिवसीय मैचों की शृंखला हारने के बाद भारतीय टीम ने जबरदस्त वापसी की और टी-20 में उसकी धरती पर मात देकर कड़ा मुकाबला करने का संकेत दिया। लेकिन टेस्ट में कुछ अप्रत्याशित चयन या रोहित शर्मा और ईशांत शर्मा जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को चोटिल मानकर बाहर रखने के कारण सही टीम संयोजन नहींं बन सका। नतीजतन रवि शास्त्री का बड़बोलापन काम न आया और भारतीय टीम पहले टेस्ट की दूसरी पारी में मात्र 36 रनों पर लुढ़क गई। 

चीनी प्रायोजकों का बहिष्कार
वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान चीन की तमाम हरकतों पर नकेल कसने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा दिया जिसका भारतीय खेल जगत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। 59 चीनी एप को प्रतिबंधित करने के बाद सरकार ने भारतवासियों से चीनी समान का बहिष्कार करने की अपील की जिसका असर चारों ओर दिखा। चीन से प्रायोजन राशि के रूप में अकूत धन अर्जित कर रहे भारतीय खेल जगत विशेषकर बीसीसीआई और कुछ क्रिकेटरों ने उनसे अनुबंध तोड़कर भारत सरकार का खुलकर साथ दिया।