अब मशीनें भी इंटरनेट पर!

    दिनांक 07-दिसंबर-2020
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बालेन्दु शर्मा दाधीच

‘इंटरनेट आफ थिंग्स’ के आने से हम एक और क्रांतिकारी दौर में आ गए हैं जब जीवन के तमाम क्षेत्रों में इंटेलिजेंट उपकरण अपनी जगह बनाते जा रहे हैं। ये उपकरण हमारे जीवन को बेहतर और ज्यादा सुविधाजनक बनाने वाले हैं। वे हमारे लिए बेहतर इलाज, बेहतर सुरक्षा और बेहतर परिवहन आदि का भी रास्ता खोलेंगे
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अभासी सहायकों, स्मार्ट शहरों और स्वचालित कारों के दौर में जिस प्रौद्योगिकी की खूब चर्चा हो रही है, उनमें से एक है-इंटरनेट आफ थिंग्स। सवाल उठेगा कि क्या ऐसा भी कोई इंटरनेट हो सकता है-इंटरनेट आफ थिंग्स (चीजों का इंटरनेट या चीजों के लिए इंटरनेट)? आम भाषा में हम इंटरनेट को कंप्यूटरों के वैश्विक नेटवर्क के रूप में जानते हैं। उस पर इनसानों के भी अनगिनत नेटवर्क संचालित हो रहे हैं, यह भी हम जानते हैं। लेकिन वस्तुओं या चीजों का इंटरनेट! यह एक आम सवाल है कि भला यह कैसे हो सकता है,

इसमें तुक भी क्या है? लेकिन इंटरनेट आफ थिंग्स एक हकीकत है जो प्रौद्योगिकी के फायदों और उसकी ताकत को औरबढ़ाती है।

इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी) इंटरनेट से जुड़े ऐसे उपकरणों का संजाल है जो इंटरनेट पर मौजूद सेवाओं का उपभोग कर सकते हैं। वे अपने जैसे दूसरे उपकरणों से संपर्क कर सकते हैं, इंटरनेट के जरिए दूर से नियंत्रित किए जा सकते हैं और इसी तरह से उनकी निगरानी भी की जा सकती है। एक आम उदाहरण हमारे घरों के बाहर-भीतर लगाए जाने वाले आईपी कैमरे हैं, जो इंटरनेट के जरिए आपके स्मार्टफोन या पर्सनल कंप्यूटर तक तस्वीरें भेज सकते हैं। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर वे दूर से ही चालू या बंद किए जा सकते हैं। जरूरी नहीं कि इंटरनेट आफ थिंग्स से जुड़े ये उपकरण कोई बहुत आधुनिक किस्म के तकनीकी गैजेट हों। ये रोजमर्रा के काम में आने वाली सामान्य चीजें, मशीनें आदि भी हो सकती हैं। शर्त यह है कि उनमें डिजिटल संकेतों को प्रसंस्करित करने, इंटरनेट से जोड़ने और ऐसी ही दूसरी डिजिटल गतिविधियां चलाने की क्षमता हो।

घरों में लगने वाले एअरकंडीशनर को ही देखिए। बुनियादी किस्म के एअरकंडीशनर में आप बटन या रिमोट के जरिए तापमान को घटा या बढ़ा सकते हैं। लेकिन बेहतर किस्म के एअरकंडीशनरों में एक छोटी सी डिजिटल स्क्रीन भी होती है, जिसमें उस समय का तापमान भी अंकित होता है। आप  रिमोट कंट्रोल के जरिए इन एअरकंडीशनरों का तापमान तय कर सकते हैं, कुछ ही देर में कमरे का तापमान उस स्तर पर पहुंच जाता है। यह तापमान एअरकंडीशनर की स्क्रीन पर दिखाई भी देता है। अब जरा कल्पना कीजिए कि किसी एअरकंडीशनर में अलग से एक हार्डवेयर एम्बेड (फिट) किया गया हो, जो इंटरनेट पर मौजूद किसी प्रणाली या सेवा के साथ जुड़ सके। तब ऐसा मोबाइल एप बनाया जा सकता है जो उसी सेवा से जुड़कर आपके एअरकंडीशनर को नियंत्रित कर सकता है। और अपने दफ्तर में बैठे-बैठे ही आप घर का एसी चालू या बंद कर सकें। ऐसा एअरकंडीशनर इंटरनेट आफ थिंग्स की श्रेणी में आएगा।

दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेट आफ थिंग्स महज चीजों तक सीमित नहीं है बल्कि आपका कमरा, घर, मुहल्ला, दफ़्तर और यहां तक कि पूरा शहर भी इस नेटवर्क का एक सदस्य हो सकता है। शर्त वही है कि इसमें डिजिटल संकेतों तथा सूचनाओं को प्रसंस्करित करने, इंटरनेट से संपर्क करने और संकेतों के लेन-देन की क्षमताएं होनी चाहिए।

ऐसा भी कहा जा सकता है कि इंटरनेट आफ थिंग्स इंटरनेट के विकास का अगला चरण है। पहले हम केवल कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा करते थे। उसके बाद स्मार्टफोन भी इंटरनेट से जुड़ गया और आज भारत जैसे देशों में इंटरनेट के इस्तेमाल का सबसे बड़ा जरिया स्मार्टफोन ही है। विकास के अगले चरण में अब हम इंटरनेट से वस्तुओं, उपकरणों, प्रक्रियाओं और ‘चीजों’ की एक पूरी श्रृंखला को जोड़ रहे हैं। स्वचालित कारें और ‘कनेक्टिड’ कारें भी इसी अवधारणा से जुड़ती हैं। आइए, देखते हैं कि दूरसंचार और आधुनिक तकनीक के इतिहास में इंटरनेट आफ थिंग्स की क्या भूमिका है।

इंटरनेट-पूर्व
इंटरनेट आफ थिंग्स के विकास को अगर पांच चरणों में विभाजित किया जाए तो सबसे पहला चरण इंटरनेट से पूर्व का होगा, जिसमें लोग या तो सीधे एक दूसरे के साथ संपर्क किया करते थे या फिर फिक्स्ड टेलीफोन और मोबाइल टेलीफोन के जरिए। फोन ने उपभोक्ताओं के नेटवर्क बनाने में मदद की, क्योंकि लोग दूर से भी एक दूसरे के संपर्क में रहने लगे।

इंटरनेट आफ कन्टेन्ट
दूसरे चरण की शुरुआत वर्ल्ड वाइड वेब से हुई जब हम ईमेल, इंटरनेट पर मौजूद सूचनाओं, इंटरनेट पर उपलब्ध मनोरंजन आदि का प्रयोग करने लगे। इसी चरण में कई आईटी प्लेटफॉर्म और सेवाएं विकसित हुर्इं। नेटवर्किंग की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा आसान हो गई, लेकिन अभी भी नेटवर्क के रूप में हम कंप्यूटर या कंप्यूटर जैसे उपकरणों तक ही सीमित थे।

इंटरनेट आफ सर्विसेज
तीसरे चरण को हम वेब 2.0 के रूप में जानते हैं जब इंटरनेट का इस्तेमाल महज सूचनाओं, मनोरंजन और संवाद से आगे बढ़ गया। अब वह उत्पादकता, वाणिज्य, शिक्षा, सरकार आदि क्षेत्रों में पहुंचा। यह ई-कॉमर्स, ई-शिक्षा, ई-गवर्नेंस आदि के विकास और स्थापना का काल था। इसी दौरान स्मार्टफोन और स्मार्ट एप्लीकेशन की शुरुआत हुई। यही वह समय था जब एप्पल ने आइ फोन का विकास किया जिसके बाद कंप्यूटिंग, संचार और कन्टेन्ट के प्रसार और इस्तेमाल के तौर-तरीके बदल गए।

इंटरनेट आफ पीपल
चौथे चरण को सोशल मीडिया के दबदबे वाले युग के रूप में देखा जा सकता है। इस दौरान इंटरनेट का प्रयोग करते हुए लोगों को करीब लाना और आपस में जोड़ना बेहद आसान हो गया। इस दौरान क्रांतिकारी प्लेटफॉर्म, सेवाएं और ऐसे प्लेटफॉर्म उभरे जिन्होंने भौगोलिक दूरियों को पाट दिया। स्काइप, फेसबुक, यूट्यूब, लिंक्डइन आदि देखते ही देखते बेहद लोकप्रिय हो गए और उन्होंने इनसानों के इंटरनेट के विकास को और आगे बढ़ाया। इसी दौरान स्मार्ट उपकरणों, स्मार्ट चीजों, स्मार्ट टैग आदि का भी प्रादुर्भाव हुआ।

इंटरनेट आफ थिंग्स
इस पांचवें और आखिरी चरण में इंटरनेट इनसानों, सामग्री या सेवाओं से आगे बढ़कर इतना विस्तार पा गया कि उसमें मशीनों या चीजों को भी शामिल कर लिया गया। दुनिया की अरबों मशीनें इंटेलिजेंट और स्मार्ट बन गर्इं, क्योंकि उनमें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल तकनीकों को एम्बेड (फिट) किया गया था। इन मशीनों के बीच आपस में भी संपर्क होने लगा और वे एक-दूसरे के साथ तालमेल करके काम करने लगीं। साथ ही, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल माध्यमों से दूर से ही संचालित करना, पहचानना, निगरानी करना भी संभव हो गया।
इंटरनेट आफ थिंग्स के आने से इन तमाम उपकरणों के जरिए बड़ी मात्रा में डेटा तैयार होने लगा। इस डेटा को दूसरे डिजिटल माध्यमों के साथ जोड़कर प्रसंस्करित करना भी आसान हो गया। डेटा तैयार करने का जिम्मा अब इनसान तक ही सीमित नहीं रह गया था बल्कि स्मार्ट मशीनों ने उसका कुछ काम खुद संभाल लिया था। इनमें छोटी-बड़ी तमाम तरह की मशीनें शामिल थीं जो न सिर्फ सूचनाओं का इस्तेमाल कर सकती थीं बल्कि खुद सूचनाएं पैदा भी कर रही थीं-अपने बारे में, अपनी गतिविधियों के बारे में, अपनी स्थिति के बारे में, अपने आसपास के बारे में और यहां तक कि दूसरों के बारे में भी।
इंटरनेट आफ थिंग्स के आने से हम एक और क्रांतिकारी दौर में आ गए हैं जब जीवन के तमाम क्षेत्रों में इंटेलिजेंट उपकरण अपनी जगह बनाते जा रहे हैं। ये उपकरण हमारे जीवन को बेहतर और ज्यादा सुविधाजनक बनाने वाले हैं। वे हमारे लिए बेहतर इलाज, बेहतर सुरक्षा और बेहतर परिवहन आदि का भी रास्ता खोलेंगे। आज आप आसानी से ऐसे फ्रिज की कल्पना कर सकते हैं जो अपने भीतर रखी चीजों का हिसाब-किताब रख सके और जरूरत पड़ने पर आपको सूचित कर सके कि उसमें फलां चीज बहुत कम रह गई है। आप ऐसे पेसमेकर की कल्पना कर सकते हैं जो हृदय में कोई असामान्य गतिविधि होने पर मरीज या डॉक्टर को खबर कर दे। अलेक्सा जैसे वर्चुअल सहयोगियों को ही देख लीजिए जो आपकी भाषा को समझते हैं और आपकी तरफ से दिए जाने वाले मौखिक निर्देशों का पालन करते हैं। इन्हें यह क्षमता इंटरनेट आॅफ थिंग्स से ही मिली है। लेकिन अभी तो यह शुरुआत है।   (लेखक सुप्रसिद्ध तकनीक विशेषज्ञ हैं)