केंद्रीय शिक्षा मंत्री पोखरियाल को शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्यों के लिए मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान

    दिनांक 08-दिसंबर-2020
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डॉ अंशु जोशी

भारत के शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' को वातायन ब्रिटेन द्वारा प्रतिष्ठित वातायन अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान और अब कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये असाधारण कार्यों के लिए पुरस्कार और सम्मान दिया जाना निश्चित ही गौरवान्वित कर देने वाली खबर है।
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भारत के शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' को वातायन ब्रिटेन द्वारा प्रतिष्ठित वातायन अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान और अब कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये असाधारण कार्यों के लिए पुरस्कार और सम्मान दिया जाना निश्चित ही गौरवान्वित कर देने वाली खबर है। श्री पोखरियाल को मिले ये अंतर्राष्ट्रीय सम्मान निश्चित ही भारत और भारतवासियों के लिए गौरव का विषय हैं।

श्री निशंक को पहले भी कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वैश्विक पटल पर अपने संवेदनशील तथा राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत साहित्य लेखन हेतु उन्हें अंतरराष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, कोलम्बो, श्रीलंका द्वारा साहित्य के क्षेत्र में डी.लिट. की मानद उपाधि प्राप्त हुई तो गोपियो (ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ऑरिजन) संगठन द्वारा मॉरीशस में अंतरराष्ट्रीय असाधारण उपलब्धि सम्मान से सम्मानित किया गया। मॉरीशस सरकार द्वारा उन्हें मॉरीशस सम्मान से सम्मानित किया गया तो वहीं अपने देश में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा उन्हें साहित्य गौरव सम्मान प्रदान किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा उन्हें साहित्य भारती सम्मान से नवाज़ा गया तो हैंबर्ग विश्वविद्यालय जर्मनी ने उन्हें उनकी रचनाओं के लिए साहित्य सम्मान प्रदान किया। मॉरिशस सरकार द्वारा श्री निशंक की पुस्तक ‘स्पर्श गंगा’ को देश के विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा की गयी तो वहीं उनके असाधारण, प्रेरणास्पद एवं उत्कृष्ट साहित्य सृजन हेतु श्रीलंका, हॉलैंड, नॉर्वे, जर्मनी और मॉस्को में भी उन्हें सम्मानित किया गया।  उन्हें हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज (उ.प्र.) द्वारा विद्या वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गयी तो नालंदा विद्यापीठ, बिहार द्वारा साहित्य वाचस्पति की उपाधि से विभूषित किया गया। भारत गौरव सम्मान, हिन्दी गौरव सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, साहित्य मनीषी सम्मान सहित अनेकानेक पुरस्कारों से सम्मानित श्री निशंक  को साहित्य में उनके अनुपम योगदान के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 300 से अधिक संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। निशंक जी की प्रथम रचना कविता संग्रह ‘समर्पण’ का प्रकाशन 1983 में हुआ था। तब से व्यस्तताओं के बावजूद उनकी साहित्य यात्रा अनवरत जारी है।

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आखिर ऐसा क्या है, उनके रचना संसार में ? उनकी कविताएं, कहानियां, उपन्यास और यात्रा वृत्तांत, सभी इंद्रधनुषी और बहुआयामी हैं। इन रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता है अपने पाठकों के साथ सीधा संवाद कर उनके मन में पैठ कर जाने की क्षमता। निशंक जी अपनी रचनाओं के माध्यम से न केवल पाठकों के मन से सीधे जुड़ जाते हैं, बल्कि उन्हें बड़ी सहजता से अपना बना राष्ट्र निर्माण की दिशा में पाथेय भी प्रदान करते हैं। उनके उपन्यास 'पल्लवी' के नायक 'ध्रुव' के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रप्रेम, जिजीविषा और अनूठी मानवीयता का सन्देश दिया है, तो कहानी संग्रह 'अंतहीन' के माध्यम से उन्होंने कठिन पहाड़ी जीवन जीने वाले जन सामान्य की पीड़ा को स्वर दिए है। उनके काव्य संग्रह 'ऐ वतन तेरे लिए' के माध्यम से उन्होंने सभी देशवासियों को राष्ट्रनिष्ठा का सन्देश दिया है तो वहीं खंडकाव्य 'प्रतीक्षा' में एक भारतीय सैनिक की प्रतीक्षारत मां के माध्यम से श्री निशंक ने राष्ट्र की साधना में अपने स्वत्व को होम कर देने की भावना उजागर की है। उनके लिखे यात्रा वृत्तांत भी विविध विषयों को बड़ी सरलता से अपने पाठकों तक पहुंचाते हैं। बिम्ब इतना शक्तिशाली कि पढ़ते-पढ़ते लगे कि आप स्वयं वर्णित स्थल पर पहुँच गए हैं। उनके इंडोनेशिया पर लिखे यात्रा वृत्तांत में बड़ी सरलता से उन्होंने इंडोनेशिया को भारतीय संस्कृति से जोड़ा है। वे इंडोनेशिया की भारतीय संस्कृति को सहेजने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करने के साथ ही वहां के आर्थिक, सामजिक, राजनीतिक तथा भौगोलिक पक्ष से भी पाठकों को अवगत करा देते हैं। इस किताब की महती भूमिका दोनों देशों के मध्य सम्बन्ध और सक्षम करने में स्पष्ट दिखाई पड़ती है। यह किताब अपने बहुआयामी कलेवर की वजह से साहित्य के पाठकों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध के शोधार्थियों तथा विशेषज्ञों के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे ही उनकी पुस्तक 'केदारनाथ से पशुपतिनाथ तक: एक दिन नेपाल में' भी गागर में सागर समाये हुए है। दोनों देशों के बीच अनूठे सांस्कृतिक बंधन को यह पुस्तक विभिन्न आयामों से पाठकों के समक्ष रखती है।

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ये रचनाएं राष्ट्र के निर्माण की भावना से प्रेरित हैं और राष्ट्र चेतना को प्रमुखता से पाठकों के सामने प्रस्तुत करती हैं। राष्ट्र के प्रति प्रेम का स्पंदन ह्रदय में जागृत करती हैं और साथ ही मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदना भी। निशंक जी की रचनाओं में बड़े अनूठे तरीके से राष्ट्रीय चेतना का स्वर मानव पीड़ा के साथ मिलकर एक विलक्षण सृष्टि करता है। सहज, सरल भाषा में लिखी उनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास एक सामान्य मनुष्य की पीड़ाओं और संघर्षों का सजीव वर्णन तो करते ही हैं, अंततः पाठकों के मन को छूकर आशा का एक नया प्रकाश जागृत करते हैं।

श्री निशंक का साहित्य संसार बहुत विस्तृत है। बेहद संवेदनशील, सहज, सरल पर गहरा प्रभाव छोड़ने वाला। उन्होंने साहित्य की लगभग सारी विधाओं जैसे कविता, खण्ड काव्य, लघु कहानियां, उपन्यास, यात्रा साहित्य आदि में 77 से ऊपर पुस्तकें लिखीं हैं। इन रचनाओं में नदी सा प्रवाह है और राष्ट्रीय चेतना के बुलंद स्वर भी। अपनी रचनाओं के माध्यम से पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने की भावना का ही प्रभाव कह सकते हैं कि उनकी रचनाओं को विश्व की कई भाषाओं जैसे जर्मन,अंग्रेजी, फ्रैंच, स्पेनिश आदि में अनूदित किया जा चुका है। इसके अलावा उनकी रचनाओं को मद्रास, चेन्नई तथा हैंबर्ग विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है।

उनकी रचनाओं में वे स्व-चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण और दुराग्रहों से मुक्त एक स्वस्थ समाज के निर्माण की बात करते दिखाई देते हैं। उनकी रचनाएं गौरवशाली भारतीय संस्कृति के झरोखे तो खोलती ही हैं, साथ ही समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर कर समाज को नयी दिशा प्रदान करती दिखाई पड़ती हैं।

एक पाठक और लेखिका, दोनों रूपों में मेरा मानना है कि एक लेखक की सफलता उसके पाठकों के मन से जुड़ जाने की क्षमता पर निर्भर करती है। उसकी रचनाओं में वर्णित पीड़ा उसके पाठक की आँख का अश्रु बन जाए, शक्ति की हुंकार उसके पाठकों में कुछ कर गुजरने का माद्दा पैदा कर दे, नवचेतना के स्वर भटकों को रास्ता दिखा दें। श्री निशंक जी ऐसे ही लेखक हैं। उनकी लेखनी मन पर अंकन करती है, संघर्ष के बीच सफलता का मार्ग दिखलाती है, कर्त्तव्य के कंटकाकीर्ण पथ पर मुस्कुरा कर चलने की शक्ति प्रदान करती है। उनकी साहित्य रचना वैश्विक स्तर पर भारत को गौरवान्वित करती रहे, यही शुभकामना।
(लेखिका जेएनयू में सहायक प्राध्यापक हैं