पहले वकालत फिर खिलाफत

    दिनांक 09-दिसंबर-2020   
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 कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों ने संसद की स्थायी समिति में किसान विधेयक में इन्हीं सुधारों की वकालत की थी और अब जब नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों के हित में उन सुधारों को लागू कर रही है तो विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं।

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कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों ने संसद की स्थायी समिति में किसान विधेयक में इन्हीं सुधारों की वकालत की थी और जब नरेन्द्र मोदी सरकार किसानों के हित में उन सुधारों को लागू कर रही है तो विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं।

यूपीए-2 की सरकार में कृषि मंत्री रहे शरद पवार ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी एक्ट में बदलाव की जरूरत बताते हुए देश में एक मॉडल एक्ट की वकालत की थी. कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों के चुनावी घोषणा पत्र में एपीएमसी एक्ट में संशोधन की बात प्रमुखता से कही गई. समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव, टीएमसी, अकाली दल और कांग्रेस के नेताओं ने संसद की स्थायी समिति में एपीएमसी एक्ट में संशोधन की आवश्यकता का समर्थन किया था.

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इन सभी दलों ने समय-समय पर 'वन नेशन-वन मंडी' को देश के लिए उपयोगी बताया था लेकिन आज जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के उत्तम भविष्य को सुनिश्चित करते हुए यही कानून लाई है तो यही राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं. जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आई तो तत्कालीन कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था कि हमें एपीएमसी एक्ट में संशोधन के लिए कोशिश करनी चाहिए. यही नहीं, दिल्ली की केजरीवाल सरकार तो नए अध्यादेश के मुताबिक नोटिफिकेशन जारी करने के बाद अब फिर इसी का विरोध कर रही है.

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मसले पर कहा, “ यह दल जब सत्ता में रहते हैं तो इनका वक्तव्य कुछ और रहता है। स्टैंडिंग कमेटी में जहां गहन चर्चा होती है, वहां कुछ और कहते हैं और जब विपक्ष में होते हैं, तो इनके बयान आश्चर्यजनक रूप से बदल जाते हैं. दरअसल यही दोहरा चरित्र इनका असल चेहरा है. जनता इसे भली भांति समझती है. देश इस दोहरे रवैये वाले चरित्र को स्वीकार नहीं करेगा. एक ऐसे दौर में जबकि हम कोरोना के खिलाफ जारी वैश्विक जंग जीतने के कगार पर हैं, तब विपक्षी दलों द्वारा इस तरह किसानों को गुमराह कर अराजकता फैलाने की कोशिश हमारी लड़ाई को कमजोर करने का कुत्सित प्रयास है. पीएम किसान सम्मान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित अनेक योजनाओं के केंद्र में किसान कल्याण ही है. किसान भाइयों को गुमराह करने की हर कुत्सित कोशिश बेकार जाएगी. केंद्र की सरकार लगातार किसानों से वार्ता कर रही है, जल्द ही इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा.”

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केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है, “ हर चीज़ पर लोगों को गुमराह करना, देश की छवि को बदनाम करने की साजिश करना इनका (विपक्षी दलों) पुराना तरीका रहा है. अपने शासन काल में कांग्रेस, एनसीपी, अकाली दल, लेफ्ट पार्टियां इस तरह के बिल का सीना ठोक कर समर्थन करती रही हैं।”