जिहादियों की भीड़ ने मूर्ति विसर्जन पर बम मारे, गोलियां चलाईं
   दिनांक 01-फ़रवरी-2020
संजीव कुमार
पटना का लालबाग मुस्लिम बहुल इलाका है। पिछले कई दिनों से  यहां सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शाम को रोजाना वहां विरोध प्रदर्शन किया जाता है। जब छात्र वहां से निकले पर तो उन पर भी हमला किया गया

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पटना में सरस्वती पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन यात्रा पर जिहादियों की भीड़ ने बम मारे और गोलियां चलाईं। मुसलमानों की भीड़ ने 31 जनवरी की रात पटना विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा निकाले जा रहे जुलूस पर हमला किया।
जानकारी के अनुसार पटना विश्वविद्यालय के पटना काॅलेज के मिंटो, नूतन और जैैक्शन हाॅस्टल के छात्र 31 जनवरी की मां सरस्वती की प्रतिमा विसर्जन करने निकले थे। जैसे ही वे लालबाग मोहल्ले से गुजरे तो मुसलमानों ने बमबाजी और पथराव शुरू कर दिया। बताया रहा है कि लालबाग के लोग पहले से तैयारी करके बैठे थे। जैसे ही जुलूस वहां पहुंचा, दनादन बम और पत्थर चलने लगे।
तीन घंटे तक यह बवाल चलता रहा। उपद्रवियाों ने दर्जनों वाहनों में तोड़-फोड़ की, दो कारों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान 50 राउंड से ज्यादा फायरिंग हुई। कई बम भी फोड़े गए। बम धमाके में पीरबहोर थाना के दारोगा मनोज कुमार और पथराव में एक सिपाही भी घायल हो गये। मनोज कुमार के पैर में बम के छर्रे लगे हैं। उपद्रवियों को शांत कराने जब कदमकुआं, सुल्तानगंज और गांधीमैदान की पुलिस पहुंची तो उपद्रवियों ने उनपर भी हमला बोल दिया। आधे घंटे बाद जब पूरी रणनीति के साथ प्रशासन जुटा तब जाकर उपद्रवी शांत हुए । पुलिस ने एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है।
गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल लालबाग का यह इलाका अक्सर विवादों में रहता है। पटना काॅलेज में जब भी कोई बवाल होता है तो कहीं न कहीं लालबाग के उपद्रवियों का हाथ इस घटना में जरूर होता है। पहले भी कई बार पटना विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ इनलोगों ने मार-पीट की है। गत सितंबर माह में भी इस तरह की घटनाएं घटी थी। लालबाग में पिछले कई दिनों से सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शाम को रोजाना वहां विरोध प्रदर्शन किया जाता है। यहां भाषण देने के लिए गुजरात के जिग्नेश मेवानी और आईशा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमलप्रीत कौर समेत कई लोग आ चुके हैं। गत माह सीएए और एनआरसी को लेकर पटना के कारगिल चैक पर हिंसक प्रदर्शन किया गया। इसमें मुख्य भूमिका लालबाग और सब्जीबाग के लोगों की ही थी।