कहानी एक कैब ड्राइवर की: उबर ने इसलिए एकाउंट रद कर दिया क्योंकि वह उसकी कैब में देश विरोधी बातें करने वाले को थाने लेकर पहुंच गए थे
   दिनांक 10-फ़रवरी-2020
सीएए को लेकर देश विरोधी बात करने वाले, मुंबई में दिल्ली जैसा शाहीन बाग बनाने की बात करने वाले बप्पादित्य सरकार को ड्राइवर रोहित ने थाने पहुंचाया तो उबर ने ड्राइवर का उबर एकाउंट रद किया

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 रोहित मुंबई में कैब चलाते हैं, उनकी कैब में बैठकर वामपंथी कवि बप्पादित्य सरकार देशविरोधी बातें कर रहा था वह उसे लेकर थाने पहुंच गए थे।
चंद दिनों पहले तक रोहित सिंह गौर दुनिया के लिए अनजान नाम था, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जागरुकता ने उसे रातोंरात स्टार बना दिया है। रोहित वही उबर टैक्सी ड्राइवर है, जो 8 फरवरी की रात को देश को जलाने की बात करने वाले अपने एक ग्राहक को मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन लेकर पहुंच गया था। टैक्सी में बैठा वामपंथी सोच वाला कवि बप्पादित्य सरकार था। बप्पादित्य देश को जलाने और मुंबई में दिल्ली जैसा शाहीन बाग बनाने की बात कर रहा था। रोहित ने उसकी षड्यंत्रकारी बातों को भांप लिया। सतर्क रहने के लिए रोहित को पुरस्कृत करने के बजाय उबर टैक्सी सर्विस ने उसका अकाउंट रद्द कर दिया है। हमेशा की तरह हर देशहित की बात का विरोध करने वाले कुछ लोगों ने रोहित की आलोचना शुरू कर दी। हालांकि, रोहित जैसे बहादुर युवाओं को इससे खास फर्क पड़ने वाला नहीं है। भले रोहित का उबर अकाउंट रद्द कर दिया गया है, लेकिन उसका हौसला आसमान सा ऊंचा है। उसने दो टूक कहा है कि उसे दोबारा ऐसा मौका मिला तो फिर वही करेगा, जो उसने बप्पादित्य सरकार के साथ किया। देश विरोधी ताकतों ने जो माहौल उत्पन्न कर रखा है, उसमें हमें एक नहीं सैकड़ों रोहित सिंह गौर जैसे युवाओं की जरूरत है। यदि हर टैक्सी वाला, हर ऑटो वाला और हर नागरिक रोहित की तरह अपनी जिम्मेदार निभाए तो देश से आतंकवाद का नामो-निशान मिट जाएगा।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जिस तरह से विभाजनकारी ताकतें एकजुट हुई हैं, वो एक बहुत बड़ी साजिश है। सीएए पर बिना किसी ठोस तर्क के मुस्लिम भीड़ ने दिल्ली के शाहीन बाग में दो माह से मुख्य मार्ग को रोका हुआ है। शाहीन बाग देश के खिलाफ साजिशों का अड्डा बन चुका है। हिंदू और हिंदुओं के चिह्नों का अपमान करने के अलावा ये ताकतें हर शहर में शाहीन बाग बनाने पर उतारू हैं। शाहीन बाग वालों को राष्ट्रवादी सोच वाले लोग पसंद नहीं हैं। हाल में पहचान छुपाकर शाहीन बाग में रिपोर्टिंग करने वाली गुंजन कपूर को इन लोगों ने बंधक बना लिया था। देशहित की बात करने वाले दो बड़े पत्रकारों को घुसने नहीं दिया था। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान समेत कई राज्यों में शाहीन बाग मार्फत प्रदर्शन चालू हैं। शर्जील इमाम जैसे बेहद कट्टरपंथी का वीडियो सामने आने के बाद इनकी साजिशों का खुलासा हो चुका है। यह साफ हो चुका है कि अपनी नाजायज मांगों को मनवाने और सरकार पर दबाव में लेने के लिए ये किसी भी हद तक देश के खिलाफ जा सकते हैं। दिल्ली जैसा ही शाहीन बाग आर्थिक राजधानी मुंबई में बनाने के षड्यंत्र की बात बप्पादित्य सरकार भी कर रहा था।
विडंबना यह है कि मीडिया का एक वर्ग इन विभाजनकारी ताकतों को बढ़ावा देने में लगा है। कई नामचीन पत्रकार सोशल मीडिया समेत हर मंच पर इन्हें न केवल उकसा रहे हैं, बल्कि भड़काने वाली पोस्ट डालते रहते हैं। जमकर झूठी खबरों का सहारा लिया जा रहा है। ये लोग पहले दिन से शाहीन बाग को सीएए के विरोध का प्रतीक बनाने पर तुले हैं, जबकि ये खुद भली-भांति जानते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून से एक भी भारतीय की नागरिकता नहीं जाएगी। विपक्षी पार्टियों और इन तथाकथित पत्रकारों ने मुसलमानों को इस कदर भड़काया हुआ है कि वो मरने-मारने पर उतारू हो गए हैं। इन्हें किस हद तक गुमराह कर दिया गया है, इसका एक उदाहरण पिछले दिनों राजस्थान के कोटा शहर में पोलियो ड्राप पिलाने गई स्वयंसेविका पर हमला है। हद तो यह थी कि स्वयंसेविका, जो स्वयं मुस्लिम थी, को मुस्लिम बस्ती के लोगों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर (एनपीआर) में एंट्री करने वाली समझा और बंधक बना लिया। उसने अपनी धार्मिक पहचान के सबूत देकर किसी तरह अपनी जान बचाई। ऐसे ही घटनाएं उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में हुईं हैं, जबकि सच्चाई यह है कि एनआरसी की बात से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनकार किया है। एनपीआर को कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार लाई थी। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने सर्वप्रथम एनपीआर कार्ड बनवाया था। अब जब यही एनपीआर भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार लाई है तो विपक्षी पार्टी देश के मुसलमानों को भड़काने में लग गई हैं।
विपक्षी पार्टियों के नाजायज तरीके से बढ़ावा देने का ही नतीजा है कि मुस्लिम समुदाय छोटी से छोटी सी बात पर सड़कों पर निकल रहा है। आग लगा रहा है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है। सरकारी योजनाओं में व्यवधान पैदा कर रहा है। पश्चिम बंगाल में तो स्थिति यह है कि हिंदू समुदाय के धार्मिक स्थल भी सुरक्षित नहीं हैं। जहां भी मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या 25 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां हिंदू खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। कैराना से हिंदुओं के पलायन की घटना सबके सामने है। कैराना जैसे हालात कई शहरों में मिल जाएंगे। आश्चर्य की बात यह है कि इन घटनाओं पर विपक्ष और तथाकथित पत्रकारों के होठ सील जाते हैं। वो एक शब्द तक नहीं बोलते, लेकिन बहुसंख्यकों की छोटी से छोटी बात को इस तरह से विश्व समुदाय के आगे पेश करते हैं, जैसे भारत के अल्पसंख्यकों पर बहुत जुल्म किया जा रहा हो। जामिया यूनिवर्सिटी के सामने देसी तमंचे से फायर करने वाले नाबालिग को ये लोग आतंकी बताने पर उतारू हो गए थे, जबकि शर्जील इमाम को इन्होंने ऐसे समर्थन दिया, जैसे वो भटका हुआ युवा है और सीएए ने उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। एक तथाकथित पत्रकार ने तो यहां तक हिदायत दे दी थी कि शर्जील इमाम के ढाई मिनट के वीडियो से उसे आंका न जाने। उसका पूरा वीडियो सुना जाए। वो तो देशहित की बातें कर रहा है।
जब रोहित सिंह गौर जयपुर के बप्पादित्य सरकार को सांताक्रूज पुलिस स्टेशन लेकर पहुंचा और पूरा माजरा बताया तो 26/11 जैसे आतंकी हमले को झेल चुकी महाराष्ट्र पुलिस ने शुरू में तो थोड़ी सतर्कता दिखाई, लेकिन बप्पादित्य को कुछ घंटे पूछताछ कर छोड़ दिया। महाराष्ट्र ही नहीं देश भर में पुलिस को बप्पादित्य सरकार जैसे अर्बन नक्सल्स पर सख्ती दिखाने की जरूरत है। यही वो कट्टरपंथी सोच वाले तत्व हैं, जो लोगों को जहरीला बना रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि रोहित सिंह गौर जैसा हौसला देश का हर युवा दिखाएगा, क्योंकि सुरक्षा बलों के साथ समाज को भी ऐसी ताकतों के खिलाफ खड़ा होना होगा। देश विरोधी नागों के फन को कुचलने के लिए हमें एक नहीं सैकड़ों रोहित चाहिए।