शाखा में स्वयंसेवक ‘मैं’ को छोड़ ‘हम’ की ओर होता है अग्रसर
   दिनांक 10-फ़रवरी-2020
‘‘भारत देश की एक संस्कृति है, जो विविधता लिए हुए है। हमारी मानवता आधारित सनातन संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति में एक ईश्वर निहित है तथा विभिन्न विविधताएं मानव को मुक्ति की ओर ले जाने के अलग-अलग मार्ग इंगित करती हैं।
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एकत्रीकरण को संबोधित करते डॉ. मनमोहन वैद्य (बाएं)
 
‘‘भारत देश की एक संस्कृति है, जो विविधता लिए हुए है। हमारी मानवता आधारित सनातन संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति में एक ईश्वर निहित है तथा विभिन्न विविधताएं मानव को मुक्ति की ओर ले जाने के अलग-अलग मार्ग इंगित करती हैं। परन्तु सभी के मूल में केवल एक ही विचार है, वह है हिन्दुत्व।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कही। वे गत दिनों कोटा प्रवास के दौरान गीता भवन में आयोजित व्यवसायी स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रतिदिन एक घंटे की नियमित शाखा स्वयंसेवकों के सामूहिक गुणों का विकास करने का एक स्थान है, क्योंकि संघ में स्वयंसेवक सदस्य नहीं, बल्कि घटक बनकर कार्य करता है। संघ की शाखा से निर्माण हुआ स्वयंसेवक बिना रुके, बिना झुके और बिना डरे दिन के शेष 23 घंटे में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए समाजोत्थान का कार्य करता है। एक घंटे की शाखा स्वयंसेवकों को ऊर्जा प्रदान करने का कार्य करती है, जिससे स्वयंसेवक अपने ‘मैं’ को छोड़कर ‘हम’ की ओर अग्रसर होता है। हमारा मूल उद्देश्य सम्पूर्ण संमाज को संगठित करना है और शाखा उसका एक उपक्रम है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि हमें अपने आचरण और व्यवहार से सामाजिक भेदभाव को दूर करते हुए सम्पूर्ण समाज को एकरस करना है। जिन लोगों के मन में संघ के प्रति भ्रांतियां हैं, उन्हें अपने आचरण एवं व्यवहार से दूर करना है। हमें ऐसे समाज का निर्माण करना है जो शासन पर कम से कम निर्भर हो और स्वावलम्बी होकर अपना योगदान भी समाजोत्थान में दे सके। इस मौके पर कोटा महानगर संघचालक श्री ताराचन्द गोयल, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य श्री राजेन्द्र द्विवेदी, प्रांत प्रचारक श्री विजयानंद आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।