सेवायन ने कराया 202 जोड़ों का विवाह
   दिनांक 10-फ़रवरी-2020
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  विवाह के बाद नव दंपति को उपहार देते (बाएं से) श्री सत्य प्रकाश मंगल एवं स्वामी अमृतानंद जी महाराज
 
गत दिनों बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र हासीमारा के सुभाषिनी रामलीला मैदान में घोर जंगलों में रहने वाले वनवासी समुदाय के लोगों के सामूहिक विवाह का आयोजन सेवायन एवं सेवा भारती पूर्वांचल के तत्वावधान में संपन्न हुआ। आयोजन में मुख्य रूप से बृज के पूज्य संत स्वामी श्री अमृतानन्द जी महाराज ने 202 वनवासी जोड़ों को जीवन पथ पर अग्रसर होने का आशीर्वाद देते हुए राष्ट्र कार्य में सहभागी होने का आह्वान किया। इस मौके पर सेवायन के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री सत्य प्रकाश मंगल ने कहा कि एक आधार लेकर 2015 में इस तरह के सामूहिक विवाह अनुष्ठान का आयोजन संघ के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रेरणा से शुरू किया गया था। इस तरह के कार्यक्रम का उद्देश्य महज विवाह कराना नहीं है, बल्कि अपने लोगों को इसके जरिए और पास लाना है। हमारी भावना है जिस वनवासी समाज के व्यक्ति का विवाह संस्कार हमारी भूल के कारण छूट गया था, उसके भूल सुधार का यह अवसर है। यानी उनके विवाह संस्कार करवाकर हम अपनी भूल सुधार रहे हैं। विवाह संस्कार में मूल बात होती है प्रेम की। ये वे लोग हैं जो तमाम लोभ, छल-प्रंपचों को सहते हुए भी अपने देश, समाज, धर्म, संस्कृति को जीते आ रहे हैं। तमाम दबाव पड़ते हैं लेकिन ये अपने धर्म से विमुख नहीं होते। तब हिन्दू समाज की जिम्मेदारी बनती है कि इस समाज के लोगों की चिंता करें। उल्लेखनीय है कि असम एवं बंगाल में वनवासी समुदाय का एक बड़ा वर्ग पिछली कई पीढ़ियों से बिना विवाह संस्कार के रहते हुए भी पारिवारिक जीवन जैसा ही सब कुछ करते आ रहे थे। पर वे मूल संस्कारों से दूर थे, जिसके चलते उनका जीवन कष्ट से गुजर रहा है। ये वे लोग हैं जो विभिन्न प्रकार के लोभ, प्रलोभन, लालच देने के बाद भी अपनी संस्कृति, धर्म से दूर नहीं हुए। अपने विश्वास, आस्था पर डटे रहे। जलालत भरी जिंदगी जीते रहे, अनपढ़ रहे, लेकिन किसी के बहकावे में नहीं आए और न किसी प्रलोभन में फंसे। बिना डरे आज भी ये लोग सब परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करते हैं। ऐसे में सेवायन इस समुदाय के विवाह कराने का काम करता आ रहा है।