अनुदान देने की व्यवस्था की हो समीक्षा
   दिनांक 10-फ़रवरी-2020
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मंच पर (बाएं से) मृदुला सिन्हा एवं श्री अतुल कोठारी 
 
‘‘जेएनयू में घटित घटनाओं के मूल में जाकर समस्याओं का समाधान खोजना होगा। अब समय आ गया है, जब इन घटनाओं को समाज में उजागर कर चिंतन किया जाए।’’ उक्त बात गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने कही। वे पिछले दिनों नई दिल्ली स्थित नेहरू स्मारक संग्रहालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित ‘जेएनयू-शिक्षा और राजनीति’ विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। अध्यक्षीय उद्बोधन में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी ने कहा कि जेएनयू में हुए आंदोलन व हिंसात्मक घटना से कार्य बाधित हुआ। आम छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया। अपनी विचारधारा के तुच्छ स्वार्थों के लिए छात्रों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है, वह अक्षम्य है। जेएनयू में असहमति की परिणति जैसी उग्रता में हुई, वैसी पहले कभी नहीं हुई थी। घटना का हिंसात्मक पक्ष प्रमुखता से देश और विश्व के सामने गया, लेकिन शिक्षा और शैक्षणिक वातावरण की हानि पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों को अतार्किक रूप से अनुदान दिए जाने पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि सरकार देश के सुदूर क्षेत्रों में चल रहे शिक्षण संस्थानों को कुछ लाख रुपए का अनुदान देती है, वहीं जेएनयू जैसे कुछ संस्थानों को 500 करोड़ रु. तक देती है। ऐसे में सरकार को अनुदान देने वाली व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।