आज देश को नेता नहीं, नायक की आवश्यकता
   दिनांक 10-फ़रवरी-2020
आज हमारी स्वयं कुछ न करते हुए, सब कुछ प्राप्त करने की अपेक्षा पालने की गलत आदत बन गई है।
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मंच पर (बाएं से) श्री अशोक सोहनी, श्री मोहनराव भागवत एवं श्री सतीश पिम्प्लिकर 
 
‘‘जब तक समाज नहीं बदलता, देश का भविष्य नहीं बदल सकता। आज हमारी स्वयं कुछ न करते हुए, सब कुछ प्राप्त करने की अपेक्षा पालने की गलत आदत बन गई है। यदि भवसागर से पार होना है तो केवल प्रार्थना से काम नहीं चलेगा, आपको सद्कर्म भी करने होंगे। इसी प्रकार यदि आप राष्ट्र का उत्थान चाहते हैं तो आपको इसके लिए प्रयास भी करने होंगे।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे गत दिनों गुना में आयोजित मध्य भारत प्रांत के तीन दिवसीय युवा संकल्प शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
 
उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति सामने आकर नेता बनने का प्रयास करता है, यह ठीक नहीं है। कुछ लोग कभी सामने नहीं आते, लेकिन वे नींव के पत्थर का काम करते हुए देश के हित में अपना जीवन लगा देते हैं। उनका नाम भी कोई नहीं जानता, लेकिन उनके प्रयासों के कारण देश का नाम और ख्याति लगातार बढ़ रही है। आज हमें उन लोगों की पद्धति का अनुसरण करने का प्रयास करना चाहिए। हमारा व्यक्तित्व भी उन्हीं की तरह होना चाहिए। आज देश को नेता की नहीं नायक की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा या भूगोल नहीं, स्वभाव का नाम है। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे। -विसंकें, गुना