सेकुलर और निष्पक्ष पत्रकारों का सच जो आम आदमी पार्टी की जीत पर जश्न में डूबे
   दिनांक 14-फ़रवरी-2020

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आम आदमी पार्टी की जीत की खुशी में आज तक के स्टूडियो में लाइव कैमरे पर सरदेसाई और ‘एक्सिस माय इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत गुप्ता ने नाचना शुरू कर दिया 
दिल्ली में मीडिया के अंदर आईसा—एसएफआई की छात्र राजनीति से प्रभावित रहे पत्रकार कांग्रेस की सरकार के दिनों में बड़े प्रभावशाली रहे। इतने प्रभावशाली कि सरकार में किसे मंत्री बनवाना है और किसे इस सरकार में मंत्री नहीं बनने देना जैसे घोर राजनीतिक फैसलों में भी इन कॉमरेड पत्रकारों की भूमिका होती थी।
कांग्रेस पार्टी और निष्पक्ष—सेकुलर पत्रकारों के बीच के सांठ—गांठ को समझने के लिए नई उम्र के पत्रकारिता के छात्रों को कैश फॉर वोट के संबंध में उस समय के पत्रकारों से जानना चाहिए। किस तरह कांग्रेस से अपनी वफादारी साबित करने के लिए राजदीप सरदेसाई ने पैसों के लेन—देन और सांसदों की खरीद—फरोख्त से जुड़ी खबर दबा दी थी। इसी का प्रसाद था कि दस साल बाद जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को साक्षात्कार देने के लिए किसी एक पत्रकार का नाम सूझा तो वह नाम राजदीप का था।
राजदीप के एनडीटीवी के जमाने के मित्र पंकज पचौरी की सेवाएं कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार के तौर पर ली थीं। यह सारी बातें इसलिए कि एनडीटीवी के पत्रकारों ने जिस गोदी मीडिया शब्द की खोज की है। वास्तव में यह कोई नया शब्द नहीं है, दशकों तक एनडीटीवी कांग्रेस की गोद में ही बैठकर पला और बड़ा हुआ है। आज भी एनडीटीवी कांग्रेस का सबसे वफादार चैनल है। एनडीटीवी के पूरे पत्रकारिता के इतिहास में आपको सोनिया गांधी की आलोचना में एक कार्यक्रम नहीं मिल सकता। जबकि प्रधानमंत्री मोदी जबसे सक्रिय राजनीति में आए हैं, मोदी के इन 18 सालों के राजनीतिक कॅरियर में उनके हर कदम के खिलाफ एक रिपोर्ट की दर से खबर मिल जाएगी। उसके बाद एनडीटीवी जब यह दावा करता है कि वह भारतीय राजनीति का स्थायी विपक्ष है, तो हंसी आती है।
मैथिली के साहित्यकार नवीन चौधरी ने लिखा — ''मेरी एक टीम मेम्बर एनडीटीवी में इन्टर्न थी। उसका कहना था कि वहां गलती से मोदी नहीं बोलना और कांग्रेस की बुराई नहीं करना। 2015 में वह लड़की वहां थी। उसका कहना था कि वहां एक अलग ही माहौल था। जहां मोदी सरकार के पक्ष में बोलने पर अजीब तरह से देखा जाता था। अक्सर चैनल के अंदर यह बात होती कि कांग्रेस की सरकार होती तो यह काम करवा लेते।''
एनडीटीवी के पूर्व पत्रकार राजदीप सरदेसाई और उनकी पत्नी सागरिका घोष के अन्दर भाजपा के लिए नफरत ही थी, जो दिल्ली चुनाव परिणाम के साथ ही अलग—अलग तरह से जाहिर हुई।
सागरिका घोष ने दिल्ली चुनाव 2020 के हैस टैग के साथ लिखा — ''भारत की राष्ट्रीय राजधानी लगता है, शाह—हीन हो गई है। माफ कीजिए हम कुछ नहीं कर सकते।''
दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत की खुशी में आज तक के स्टूडियो में लाइव कैमरे पर सरदेसाई और ‘एक्सिस माय इंडिया’ के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रशांत गुप्ता ने नाचना शुरू कर दिया। यह कैसी पत्रकारिता थी? कभी इस चैनल पर नाग—नागिन नाचते थे। अब सरदेसाई और गुप्ता नाच रहे हैं।
राजदीप की इस हरकत की आलोचना पत्रकारिता और फिल्म क्षेत्र के कई बड़े नामों द्वारा की गई। टीवी एंकर अमिश देवगन ने लिखा — एक सेक्युलर/ निष्पक्ष पत्रकार द्वारा स्टूडियो में डांस का प्रदर्शन किया गया। ये वही लोग हैं जो पत्रकारिता पर समाज को ज्ञान देते हैं। वास्तव में 30 साल का इनका किया—धरा एक्सपोज हो रहा है।''
फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सपाट शब्दों में राजदीप के लिए लिखा— ''देखो कैसे मीडिया ने,पत्रकारिता को ठोका।''
वैसे यहां नाम सिर्फ राजदीप और सागरिका का क्यों लिखा जाए जबकि अन्य पत्रकारों ने भी आम आदमी पार्टी की जीत की खुशी में अपना सेकुलर और निष्पक्षता का लबादा उतार फेका।
ये हैं कुछ उदाहरण : —
निधि राजदान ने लिखा — भारत जीत गया।
राना अयूब ने लिखा — आज बुखार है लेकिन इसके बावजूद आज की रात शाहीन बाग में उपस्थित रहूंगी। आज तो बनता है
शबा नकवी ने लिखा — दिल्ली मेरी जान, तुमने गोली मारो की राजनीति को हरा दिया। जियो।
हरीन्दर बावेजा ने लिखा — नफरत और कट्टरता की राजनीति का परिणाम बैलेट बॉक्स पर असफल रहा। वेलडन दिल्ली
स्वाति चतुर्वेदी ने लिखा — दो हिंसक ठगों और नफरत फैलाने वालों पर झाड़ू फिर गया है। यह जानकर खुश हूं। बताओ वे कौन हैं?
बरखा दत्त ने दिल्ली चुनाव 2020 के हैश टैग के साथ लिखा — रात के खाने में बिरयानी?
शिवम विज ने लिखा — नरसंहार करने वालों के हाथ से भगवा रंग पर दावा, हमेशा एक अच्छा विचार है।
पुण्य प्रसून वाजपेयी ने लिखा — लोकतंत्र पर पहरा लगाकर, भारत को हराने चले थे।