पुलवामा पर सवाल उठाने वाले राहुल, गोपीनाथ से सीखो देशभक्ति
   दिनांक 14-फ़रवरी-2020
महाराष्ट्र के उमेश गोपीनाथ जाधव ने पिछले एक साल में पुलवामा शहीदों के घरों और चिता की मिट्टी लेने के लिए 61,000 किलोमीटर की यात्रा की है, शहीदों के परिजनों का आशीर्वाद पाकर वो खुद को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं...

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राहुल गांधी को महाराष्ट्र के उमेश गोपीनाथ जाधव से देशभक्ति सीखनी चाहिए। जी हां, उमेश वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने पिछले एक साल में 61,000 किलोमीटर की लंबी यात्रा करके पुलवामा में शहीद हुए 40 वीर जवानों के घरों और चिता की मिट्टी इकट्ठा की है। वो कश्मीर में इन शहीदों की याद में बनने वाले स्मारक की आधारशिला रखने के कार्यक्रम बतौर विशेष अतिथि पहुंचे। गोपीनाथ ने कहा, मैं शहीदों के परिजनों से मिलकर खुद को गौरान्वित महसूस कर रहा हूं। मैंने उनका आशीर्वाद लिया है। एक तरह गोपीनाथ हैं, जो शहीदों के सम्मान में पिछले एक साल से घर छोड़कर देशभर में घूम रहे हैं, दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हैं, जिन्होंने पुलवामा हमले की पहली बरसी पर फिर शंका जताकर पाकिस्तान को मौका दिया।
14 फरवरी की सुबह जब पूरा देश पुलवामा शहीदों को याद कर रहा था, तब राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि इस हमले से सबसे ज्यादा कौन लाभान्वित हुआ, हमले की जांच का परिणाम क्या निकला और भाजपा सरकार में किसने इस हमले को लेकर हुईं सुरक्षा खामियों की जिम्मेदारी ली। सवाल यह उठता है कि जब यह हमला हुआ था, तब राहुल गांधी ने जमकर इस मुद्दे को उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। पाकिस्तान में राहुल गांधी के बयान सुर्खियों में रहे थे और पड़ोसी देश ने कांग्रेस नेता के बयान को आधार बनाकर खुद को निर्दोष साबित करने की विफल कोशिश की थी। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान राहुल गांधी के बयान को संयुक्त राष्ट्र सभा में कोट कर चुके हैं। इस शंकाओं पर जनता ने लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को करारा जवाब दिया। जो पार्टी पांच साल पहले सत्ता में थी, वो तिहाई अंक के आंकड़े तक अपनी सीटों को नहीं पहुंचा पाई। पुलवामा हमले में सबसे ज्यादा शहीद होने वाले जवान उत्तर प्रदेश से थे। शायद यही कारण था कि राहुल गांधी अपनी परंपरागत अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से एक सीट ही मिली।
देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बेतुके बयान देना राहुल गांधी के लिए नया नहीं है। जम्मू-कश्मीर से जब अनुच्छेद हटाया गया था, तब भी राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस पार्टी ने घड़ियाली आंसू बहाने शुरू कर दिए थे। तब से अब तक राहुल बीच-बीच में कश्मीर पर अटपटी बातें कर पाकिस्तान को मौका देते रहते हैं। इसी तरह नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जिस तरह से कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने अल्पसंख्यकों को भड़काने का काम किया है, वो आज जगजाहिर है। गांधी परिवार के खास मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान से सीधा दिल्ली के शाहीन बाग में पहुंचकर जहर उगलते हैं। पहले भी अय्यर पाकिस्तान में भारत की सरकार को अस्थिर करने के लिए मदद मांग चुके हैं।
गांधी परिवार के एक और करीबी कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम अल्पसंख्यकों को लगातार भड़का रहे हैं। 2014 में सत्ता के बेदखल होने के बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले करने के लिए जितने भी हथकड़े अपनाए हैं, सभी में वो विफल रहे हैं। उनका हर दांव उल्टा पड़ा है। ताजा उदाहरण दिल्ली विधानसभा चुनावों का है। चुनावी सभा के दौरान राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डंडे मारने की बात कह दी। नतीजा यह रहा है कि उनकी पार्टी का दिल्ली में खाता तक नहीं खुला और वोट प्रतिशत 4.26 पर आ गया। 62 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। लोकसभा चुनाव के दौरान भी राहुल ने प्रधानमंत्री पर राफेल लड़ाकू विमानों की डिल को लेकर तीखे हमले किए थे, जो उन पर उल्टे पड़े हैं।
शहीद परिवारों के घरों और चिता के मिट्टी लेने के लिए उमेश गोपीनाथ ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, असम, ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। शहीद जिस मिट्टी में पैदा हुए, उसे स्पर्श करके खुद को भाग्यशाली समझा। राहुल गांधी को उमेश गोपीनाथ जाधव से सीखने की जरूरत है।