आजम खान के पूरे परिवार पर लटक रही गिरफ्तारी की तलवार
   दिनांक 16-फ़रवरी-2020
आजम खान के बेटे अब्दुल्ला का निर्वाचन भी रद्द हो चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की गई याचिका भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो गई. आजम खान को अब पूरे परिवार समेत रामपुर जनपद न्यायालय में आत्म समर्पण करना पड़ेगा
 
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अपने पत्नी और बेटे के साथ आजम खान
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में मूल जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर आजम खान के पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान की उम्र विधायक का चुनाव लड़ने के लिए कम पड़ रही थी. आजम खान अपने बेटे को जल्दी से विधायक निर्वाचित होते हुए देखना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने अपने मंत्री पद के प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए अपने बेटे का दूसरा जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया. इस तरह से अब्दुल्ला को विधायक बनाने की उनकी हसरत तो पूरी हो गई मगर अब आलम यह है कि अब्दुल्ला का निर्वाचन भी रद्द हो चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए दायर की गई याचिका भी इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो गई. आजम खान को अब पूरे परिवार समेत रामपुर जनपद न्यायालय में आत्म समर्पण करना पड़ेगा.
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला आज़म खान के गले की फांस बन गया है. इस प्रकरण में एक तो उनका पूरा परिवार मुल्जिम है. दूसरे चुनाव, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान के पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान का निर्वाचन भी रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट गए थे मगर वहां से भी कोई राहत नहीं मिली. फिलहाल गिरफ्तारी से बचने के लिए आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में पुलिस ने रामपुर जनपद न्यायालय में जो चार्जशीट दाखिल की है उस चार्जशीट को रद कर दिया जाए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया चार्जशीट में मुकदमा चलाए जाने के पर्याप्त आधार हैं.
उल्लेखनीय है कि पूर्व नगर विकास मंत्री आज़म खान, उनके पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान और उनकी पत्नी तन्जीन फात्मा पर जनपद रामपुर के थाना गंज में कूटरचना और जालसाजी करने के आरोप में एफ.आई.आर. दर्ज की गई थी. रामपुर जनपद के भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने एफआईआर दर्ज कराई थी कि आजम खान और उनकी पत्नी ने जालसाजी करके अपने पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान का दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था. दोनों जन्म प्रमाण पत्रों को अलग -अलग जगह पर उपयोग करके अनैतिक लाभ लिया गया. आकाश सक्सेना की शिकायत पर शासन ने जांच के आदेश दिए थे. प्रारम्भिक जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सच प्रतीत होने पर तीनों लोगों के खिलाफ आई.पी. सी. की धारा 420, 467 एवं 468 के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया था. पुलिस ने विवेचना के दौरान यह पाया कि कूटरचना की गई है. साक्ष्य संकलन के बाद रामपुर जनपद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई. इसके बाद रामपुर जनपद न्यायालय ने तीनों लोगों को हाजिर होने के लिए समन जारी किया है.
भाजपा नेता आकाश सक्सेना बताते हैं कि "जौहर विश्वविद्यालय में अनैतिक लाभ देने के लिए दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाया गया था. फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मंत्री पद का दुरूपयोग करते हुए आज़म खान ने बनवाया था. दोनों जन्म प्रमाण पत्रों में जन्म स्थान अलग - अलग दर्शाया गया. एक जन्म प्रमाण पत्र 28 जून 2012 को नगर पालिका परिषद रामपुर से बनवाया गया. इसमें जन्म स्थान रामपुर दर्शाया गया. जबकि दूसरा जन्म प्रमाण पत्र 21 जनवरी 2015 को नगर निगम लखनऊ से बनवाया गया. नगर निगम लखनऊ से जारी हुए जन्म प्रमाण पत्र में एक निजी अस्पताल का प्रमाण पत्र लगा हुआ है. पहला जन्म प्रमाण पत्र जो रामपुर नगर पालिका परिषद् से जारी किया गया है , उसी के आधार पर अब्दुल्ला आज़म खान ने अपना पासपोर्ट बनवाया है."
बताते चलें कि वर्ष 2012 में आजम खान सपा सरकार में नगर विकास मंत्री थे. इसके कुछ समय बाद उनकी पत्नी प्रोफ़ेसर तंजीन फात्मा, समाजवादी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा सांसद निर्वाचित हुई. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में आज़म खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान ने रामपुर जनपद की अलग –अलग विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए. जिस समय आज़म खान सपा सरकार में मंत्री थे. उस समय उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय बनावाया. जौहर विश्वविद्यालय के लिए अधिग्रहित भूमि को लेकर भी कई प्रकार के विवाद चल रहे हैं. फिलहाल आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आज़म खान पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.